रात में खर्राटे लेते हैं तो सावधान! सोते वक्त शरीर में हो सकता है बड़ा खेल, इन 5 बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा
नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026: अगर कोई व्यक्ति रात में जोर-जोर से खर्राटे लेता है तो घर के लोग अक्सर इसे सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में लगातार तेज खर्राटे ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) जैसी गंभीर नींद संबंधी बीमारी का संकेत हो सकते हैं। इस स्थिति में सोते समय सांस की नली बार-बार संकरी या बंद हो सकती है, जिससे कुछ समय के लिए सांस रुकने और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिरने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
सबसे चिंता की बात यह है कि स्लीप एपनिया से पीड़ित व्यक्ति को रात में होने वाली इन घटनाओं का कई बार पता ही नहीं चलता। वह पूरी रात सोने के बाद भी सुबह थका हुआ उठ सकता है। दिन में अत्यधिक नींद आना, ध्यान लगाने में परेशानी, सुबह सिरदर्द और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
सिर्फ खर्राटे नहीं, सांस रुकने का संकेत भी हो सकता है
हर व्यक्ति के खर्राटे स्लीप एपनिया का संकेत नहीं होते। कभी-कभी सामान्य थकान, नाक बंद होने या सोने की स्थिति के कारण भी खर्राटे आ सकते हैं। लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज और लगातार आते हैं तथा उनके बीच सांस रुकने जैसी स्थिति दिखाई देती है, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार OSA में व्यक्ति के गले के पीछे की मांसपेशियां बहुत ज्यादा ढीली हो सकती हैं। इससे सांस की नली संकरी या बंद हो जाती है। कुछ समय के लिए सांस रुकने पर शरीर में ऑक्सीजन कम हो सकती है और दिमाग व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए जगा देता है ताकि सांस की नली फिर खुल सके। यह प्रक्रिया रात में कई बार दोहराई जा सकती है।
सोते समय ऑक्सीजन कम होने से क्या होता है?
स्लीप एपनिया में बार-बार होने वाली सांस की रुकावट रक्त में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर सकती है। साथ ही शरीर में तनाव प्रतिक्रिया सक्रिय हो सकती है, जिससे रक्तचाप और हृदय पर दबाव बढ़ सकता है।
समस्या यह है कि यह प्रक्रिया एक रात में एक-दो बार नहीं, बल्कि गंभीर मामलों में बार-बार हो सकती है। लगातार नींद टूटने के कारण व्यक्ति को पर्याप्त restorative sleep नहीं मिल पाती।
मेडिकल स्रोतों के अनुसार OSA के दौरान ऑक्सीजन में अचानक गिरावट रक्तचाप बढ़ा सकती है और cardiovascular system पर दबाव डाल सकती है।
हार्ट पर पड़ सकता है असर
स्लीप एपनिया और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर लंबे समय से शोध हो रहा है। OSA से जुड़े बार-बार होने वाले oxygen drops और blood-pressure changes हृदय तथा रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
Mayo Clinic के अनुसार OSA से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। कुछ मरीजों में heart attack, stroke और irregular heartbeat जैसी cardiovascular समस्याओं से भी इसका संबंध देखा गया है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को हार्ट की बीमारी होगी। बल्कि लगातार खर्राटे और सांस रुकने जैसे लक्षण होने पर underlying sleep apnea की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
डायबिटीज से भी जुड़ा है स्लीप एपनिया
स्लीप एपनिया को केवल नींद की बीमारी समझना सही नहीं है। शोधों में OSA और metabolic problems के बीच संबंध सामने आया है।
भारत में किए गए BLESS cohort अध्ययन में 958 वयस्कों की sleep study की गई। इसमें moderate-to-severe OSA की prevalence 30.5 प्रतिशत और severe OSA की prevalence 10.1 प्रतिशत पाई गई। अध्ययन में OSA की गंभीरता का संबंध diabetes, hypertension और metabolic syndrome से भी देखा गया।
इससे यह संकेत मिलता है कि जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, हाई BP या मोटापे जैसी समस्या है, उनमें लगातार खर्राटे और sleep apnea के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर का खतरा
रात में बार-बार सांस रुकने और ऑक्सीजन कम होने से शरीर में sympathetic nervous system सक्रिय हो सकता है। इससे रक्तचाप बढ़ने की समस्या पैदा हो सकती है।
कुछ लोगों में हाई BP का इलाज चल रहा होता है, लेकिन इसके बावजूद BP ठीक से नियंत्रित नहीं होता। ऐसे मामलों में डॉक्टर अन्य कारणों के साथ sleep apnea की संभावना पर भी विचार कर सकते हैं।
OSA और hypertension के बीच संबंध को भारतीय शोध में भी देखा गया है। BLESS cohort में ज्यादा गंभीर OSA का hypertension से स्वतंत्र संबंध पाया गया था।
दिनभर नींद आना भी है बड़ा संकेत
अगर कोई व्यक्ति रात में 7-8 घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद दिनभर उनींदा रहता है, काम करते समय आंखें बंद होने लगती हैं या टीवी देखते हुए बार-बार नींद आती है, तो इसे केवल आलस समझना सही नहीं है।
स्लीप एपनिया में रात के दौरान बार-बार नींद टूटने के कारण व्यक्ति को गहरी और आराम देने वाली नींद पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाती। इसका असर अगले दिन concentration, memory और mood पर भी पड़ सकता है।
विशेष रूप से गाड़ी चलाते समय अत्यधिक नींद आना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे सड़क दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।
सुबह सिरदर्द और मुंह सूखना
कुछ लोगों में सुबह उठते समय सिरदर्द, गले में खराश या मुंह सूखने की समस्या भी हो सकती है। रात में सांस लेने में रुकावट और मुंह से सांस लेने के कारण ऐसी परेशानियां हो सकती हैं।
हालांकि ये लक्षण केवल sleep apnea के कारण नहीं होते। इसलिए इनके आधार पर खुद से बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
अगर सुबह के लक्षणों के साथ तेज खर्राटे, सांस रुकने की घटना और दिन में अत्यधिक नींद भी मौजूद है, तो डॉक्टर से बात करना ज्यादा जरूरी हो जाता है।
किन लोगों में ज्यादा खतरा हो सकता है?
स्लीप एपनिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियां इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं। इनमें अधिक वजन, गर्दन के आसपास अतिरिक्त फैट, उम्र बढ़ना, धूम्रपान, नाक में लगातार congestion और कुछ शारीरिक संरचनात्मक कारण शामिल हो सकते हैं।
पुरुषों में भी OSA का जोखिम अधिक देखा जाता है, हालांकि महिलाओं में menopause के बाद जोखिम बढ़ सकता है।
बच्चों में भी enlarged tonsils या adenoids जैसी स्थितियां sleep apnea का कारण बन सकती हैं।
भारत में भी चिंता बढ़ा रही है बीमारी
भारत में OSA को लेकर उपलब्ध आंकड़े लंबे समय तक सीमित रहे हैं, लेकिन हालिया BLESS cohort अध्ययन ने स्थिति की गंभीरता पर महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
इस अध्ययन में moderate-to-severe OSA की prevalence 30.5 प्रतिशत रही। शोधकर्ताओं ने OSA और diabetes, hypertension तथा metabolic syndrome के बीच संबंध भी पाया।
एक अलग भारतीय systematic review में सामान्य वयस्क आबादी में OSA की pooled prevalence लगभग 11 प्रतिशत आंकी गई थी, हालांकि अलग-अलग अध्ययनों और जांच पद्धतियों के कारण आंकड़ों में काफी अंतर था।
इसलिए भारत में लगातार खर्राटे और sleep-related breathing problems को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है।
कैसे पता चलता है कि खर्राटे बीमारी का संकेत हैं?
अगर परिवार का कोई सदस्य बताता है कि सोते समय आपकी सांस कुछ सेकंड के लिए रुकती है, फिर जोर से खर्राटे या हांफने की आवाज आती है, तो इसे गंभीर संकेत माना जाना चाहिए।
अन्य संकेतों में:
बहुत तेज और लगातार खर्राटे
सोते समय सांस रुकना
रात में घुटन या हांफकर उठना
दिन में अत्यधिक नींद
सुबह सिरदर्द
ध्यान लगाने में परेशानी
चिड़चिड़ापन
हाई ब्लड प्रेशर
शामिल हो सकते हैं।
इनमें से कई लक्षण दूसरी समस्याओं में भी हो सकते हैं, इसलिए diagnosis के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
जांच के लिए क्या किया जाता है?
स्लीप एपनिया की जांच के लिए डॉक्टर व्यक्ति के लक्षण और जोखिम देखकर sleep study की सलाह दे सकते हैं। इसमें रात के दौरान सांस, ऑक्सीजन, हृदय गति और नींद से जुड़े अन्य संकेतों की निगरानी की जा सकती है।
कुछ मरीजों के लिए घर पर होने वाली sleep testing उपयुक्त हो सकती है, जबकि कुछ मामलों में sleep laboratory में polysomnography की जरूरत पड़ती है।
भारत के BLESS अध्ययन में भी OSA की पहचान के लिए Level I polysomnography का इस्तेमाल किया गया था।
क्या खर्राटे कम किए जा सकते हैं?
अगर खर्राटों के पीछे sleep apnea या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो उसका उपचार डॉक्टर की सलाह के अनुसार किया जाता है। वजन अधिक होने पर चिकित्सकीय सलाह से वजन कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से बचना और सोने की आदतों में सुधार मदद कर सकते हैं।
कुछ मरीजों में डॉक्टर CPAP जैसी मशीन की सलाह दे सकते हैं, जो सोते समय airway को खुला रखने में मदद करती है। लेकिन हर खर्राटे लेने वाले व्यक्ति को CPAP की जरूरत नहीं होती।
इसलिए बाजार में मिलने वाले किसी उपकरण या इलाज को बिना जांच के शुरू करने के बजाय पहले सही कारण पता करना जरूरी है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर खर्राटे कभी-कभार आते हैं और कोई अन्य समस्या नहीं है तो जरूरी नहीं कि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो। लेकिन अगर खर्राटे रोज आते हैं, बहुत तेज हैं, सोते समय सांस रुकती है, व्यक्ति हांफकर उठता है या दिन में अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर से जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
खासकर जिन लोगों को पहले से हाई BP, डायबिटीज, मोटापा या हृदय संबंधी समस्या है, उनमें लगातार sleep apnea के लक्षणों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
रात में खर्राटे लेना हमेशा बीमारी नहीं होता, लेकिन लगातार तेज खर्राटे कभी-कभी शरीर की गंभीर समस्या की चेतावनी हो सकते हैं। ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया में सोते समय सांस बार-बार रुक सकती है और रक्त में ऑक्सीजन कम हो सकती है। इसके साथ हाई BP, हृदय संबंधी समस्याओं और टाइप-2 डायबिटीज जैसे स्वास्थ्य जोखिम जुड़े पाए गए हैं।
इसलिए अगर कोई व्यक्ति रोज रात में जोरदार खर्राटे लेता है और उसके साथ सांस रुकने, हांफने या दिनभर नींद आने की समस्या भी है, तो इसे सिर्फ आदत समझकर छोड़ना सही नहीं है। समय पर डॉक्टर से सलाह और जरूरत पड़ने पर sleep study बीमारी की पहचान में मदद कर सकती है।

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