पेशाब में दिखने लगा ये बदलाव तो हो जाएं सावधान! डॉक्टर ने बताया किडनी डैमेज का वो संकेत जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं
नई दिल्ली। शरीर कई बार बीमारी के बारे में ऐसे संकेत देता है, जिन्हें हम सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। पेशाब भी इन्हीं संकेतों में शामिल है। पेशाब का रंग, मात्रा, गंध या उसमें असामान्य बदलाव कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। खासतौर पर बार-बार या लगातार पेशाब में झाग दिखाई देना कभी-कभी यूरिन में प्रोटीन आने का संकेत हो सकता है, जिसे किडनी की जांच कराने की वजह माना जाता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक, लगातार फोमी यूरिन यानी झागदार पेशाब किडनी की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
सोशल मीडिया पर डॉक्टरों की ओर से भी इस तरह के संकेतों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। हालांकि, केवल पेशाब में झाग देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी व्यक्ति की किडनी खराब हो रही है। कभी-कभी सामान्य परिस्थितियों में भी पेशाब में बुलबुले या झाग दिखाई दे सकते हैं। असली कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच महत्वपूर्ण है।
सबसे ज्यादा ध्यान उन लोगों को देना चाहिए जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, क्योंकि ये दोनों किडनी की बीमारी के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
पेशाब में झाग आखिर क्यों बनता है?
स्वस्थ किडनी का एक महत्वपूर्ण काम खून को फिल्टर करना है। किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हुए जरूरी प्रोटीन जैसे एल्बुमिन को खून में बनाए रखने की कोशिश करती है।
जब किडनी के फिल्टर यानी ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचता है, तो एल्बुमिन जैसे प्रोटीन की थोड़ी मात्रा पेशाब में आने लग सकती है। इसे एल्बुमिन्यूरिया कहा जाता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, यूरिन में बढ़ा हुआ एल्बुमिन किडनी डैमेज का मार्कर हो सकता है।
यही अतिरिक्त प्रोटीन कुछ लोगों में पेशाब को ज्यादा झागदार या बुलबुले वाला बना सकता है। इसलिए अगर झाग लगातार या बार-बार दिखाई देता है, खासकर अन्य लक्षणों या डायबिटीज-बीपी जैसी स्थितियों के साथ, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हर बार झागदार पेशाब का मतलब किडनी डैमेज नहीं
यह बात समझना बेहद जरूरी है। पेशाब में कभी-कभार कुछ बुलबुले या झाग दिखाई देना अपने आप में किडनी की बीमारी का प्रमाण नहीं है।
पेशाब का तेज प्रवाह, कम पानी पीना और टॉयलेट में मौजूद कुछ सफाई उत्पाद भी बुलबुले या झाग का कारण बन सकते हैं। इसलिए एक-दो बार ऐसा होने पर घबराने की जरूरत नहीं है।
लेकिन यदि समस्या बार-बार हो रही है या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। नेशनल किडनी फाउंडेशन भी बताता है कि बहुत ज्यादा या लगातार फोम प्रोटीन के यूरिन में आने का संकेत हो सकता है और इसकी जांच साधारण यूरिन टेस्ट से की जा सकती है।
डायबिटीज वालों को क्यों रहना चाहिए ज्यादा सावधान?
डायबिटीज का लंबे समय तक ठीक से नियंत्रित न रहना किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी वजह से डायबिटीज वाले लोगों में किडनी की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है।
किडनी की समस्या शुरुआती चरण में कई बार स्पष्ट लक्षण नहीं देती। ऐसे में केवल यह इंतजार करना कि किडनी की बीमारी के लक्षण दिखाई दें, सही रणनीति नहीं है।
KDIGO की डायबिटीज और CKD संबंधी गाइडलाइन में डायबिटीज के साथ एल्बुमिन्यूरिया को किडनी और हृदय संबंधी जोखिम से जोड़ा गया है।
इसलिए डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड और यूरिन दोनों की जांच कराते रहना चाहिए।
हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी पर डाल सकता है असर
लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। किडनी और ब्लड प्रेशर का संबंध दोतरफा भी है—किडनी की बीमारी ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकती है और हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।
ऐसे में अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से बीपी की समस्या है और साथ ही पेशाब में बार-बार झाग दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच के बारे में बात करना समझदारी होगी।
कौन-सा टेस्ट शुरुआती समस्या पकड़ सकता है?
किडनी की शुरुआती जांच के लिए महत्वपूर्ण परीक्षणों में से एक है Urine Albumin-Creatinine Ratio (uACR)। यह पेशाब में एल्बुमिन और क्रिएटिनिन की मात्रा का अनुपात बताता है।
नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, सामान्य uACR आमतौर पर 30 mg/g से कम माना जाता है। 30 mg/g या उससे अधिक परिणाम एल्बुमिन्यूरिया का संकेत हो सकता है और डॉक्टर आगे की जांच या दोबारा परीक्षण की सलाह दे सकते हैं।
KDIGO भी एल्बुमिन्यूरिया को अलग-अलग श्रेणियों में बांटता है। ACR 30 से 300 mg/g को मध्यम रूप से बढ़ा हुआ और 300 mg/g से अधिक को गंभीर रूप से बढ़ा हुआ माना जाता है।
इसलिए किसी रिपोर्ट में 30 mg/g से ऊपर का परिणाम आने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से उसका सही अर्थ समझना चाहिए।
सिर्फ क्रिएटिनिन देखकर किडनी को स्वस्थ न मानें
किडनी की जांच के दौरान कई लोग केवल सीरम क्रिएटिनिन रिपोर्ट देखते हैं। अगर क्रिएटिनिन सामान्य आया तो उन्हें लगता है कि किडनी पूरी तरह ठीक है। लेकिन किडनी की सेहत का आकलन केवल एक टेस्ट से नहीं किया जाता।
डॉक्टर आमतौर पर क्रिएटिनिन के साथ eGFR, यूरिन में एल्बुमिन या प्रोटीन और व्यक्ति की दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों को भी देखते हैं। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, uACR 30 mg/g या उससे अधिक होने पर किडनी की बीमारी का संकेत हो सकता है, भले ही eGFR 60 से ऊपर हो।
इसलिए यह दावा कि क्रिएटिनिन तभी बढ़ता है जब किडनी का 90 प्रतिशत नुकसान हो चुका हो, बहुत सामान्यीकृत है और इसे एक निश्चित मेडिकल नियम नहीं माना जाना चाहिए।
यूरिन टेस्ट क्यों है महत्वपूर्ण?
यूरिन टेस्ट एक आसान और सामान्य जांच है। इससे डॉक्टर पेशाब में प्रोटीन, खून, सफेद रक्त कोशिकाओं, बैक्टीरिया और अन्य असामान्य चीजों की जांच कर सकते हैं।
नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, यूरिन टेस्ट कई बीमारियों का पता लक्षण आने से पहले लगाने में मदद कर सकता है। पेशाब में प्रोटीन किडनी की बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है, खासकर डायबिटीज जैसे जोखिम वाले लोगों में।
हालांकि, एक असामान्य रिपोर्ट का मतलब हमेशा स्थायी किडनी रोग नहीं होता। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर दोबारा टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
पेशाब के रंग में बदलाव भी नजरअंदाज न करें
पेशाब में सिर्फ झाग ही नहीं, बल्कि रंग में असामान्य बदलाव भी ध्यान देने योग्य हो सकता है। गहरा पीला पेशाब अक्सर कम पानी पीने से हो सकता है, जबकि कुछ दवाएं और खाद्य पदार्थ भी रंग बदल सकते हैं।
अगर पेशाब लाल, भूरा या चाय-कोला जैसा दिखाई दे तो उसमें खून की संभावना समेत कई कारणों की जांच जरूरी हो सकती है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के अनुसार, पेशाब में खून किडनी की समस्या के अलावा संक्रमण, पथरी और अन्य स्थितियों के कारण भी हो सकता है।
इसी तरह पेशाब का धुंधला दिखाई देना संक्रमण जैसी स्थिति से जुड़ा हो सकता है। इसलिए केवल रंग देखकर बीमारी का नाम तय नहीं किया जा सकता।
कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए?
अगर पेशाब में लगातार झाग बन रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। खासतौर पर तब जब इसके साथ पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब की मात्रा में बदलाव, पेशाब में खून, लगातार थकान, सांस फूलना या ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसी समस्या भी हो।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को नियमित किडनी स्क्रीनिंग के बारे में अपने डॉक्टर से बात करनी चाहिए।
अगर पेशाब में खून दिखाई दे, पेशाब बहुत कम हो जाए, तेज दर्द हो या अचानक गंभीर लक्षण सामने आएं, तो इसे सामान्य मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।
क्या शुरुआती किडनी बीमारी को रोका जा सकता है?
किडनी की बीमारी का परिणाम उसके कारण और चरण पर निर्भर करता है। हर किडनी डैमेज पूरी तरह उलटा जा सके, ऐसा कहना सही नहीं है। लेकिन समस्या का जल्दी पता लगना बेहद महत्वपूर्ण है।
अगर एल्बुमिन्यूरिया या किडनी की कार्यक्षमता में शुरुआती बदलाव का पता चल जाए तो डॉक्टर कारण के अनुसार ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित करने, दवाओं, खान-पान और जीवनशैली में बदलाव सहित उपचार की योजना बना सकते हैं।
KDIGO के अनुसार डायबिटीज और CKD वाले लोगों में एल्बुमिन्यूरिया किडनी की बीमारी के बढ़ने के जोखिम को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
छोटी-सी सावधानी बचा सकती है बड़ी परेशानी
पेशाब में एक-दो बार झाग दिखाई देने पर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि यह लगातार होता है तो इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रखने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
याद रखें—झागदार पेशाब किडनी डैमेज का पक्का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह जांच कराने का एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर हो सकता है। uACR जैसे सरल यूरिन टेस्ट से पेशाब में एल्बुमिन की मात्रा का पता लगाया जा सकता है और शुरुआती किडनी समस्या की पहचान में मदद मिल सकती है।
सबसे जरूरी बात यह है कि सोशल मीडिया पर किसी डॉक्टर की पोस्ट या वीडियो को देखकर खुद बीमारी का निदान न करें। अगर पेशाब में लगातार बदलाव नजर आ रहा है, तो योग्य डॉक्टर से जांच और सलाह लेना ही सुरक्षित रास्ता है।

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