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बाल सुधार गृह से बाहर आते ही 17 साल के लड़के ने खोला बड़ा राज! ‘हर हफ्ते ₹1 हजार दो, वरना…’, हाथों पर मिले कट के निशान



जिले के गोकलपुर स्थित बाल सुधार गृह से 17 वर्षीय नाबालिग के बाहर आने के बाद वहां की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बाहर आने के बाद नाबालिग ने अपने पिता को बाल सुधार गृह के अंदर के कथित हालात के बारे में जानकारी दी। परिवार का आरोप है कि वहां करीब 10 से 12 लड़कों का एक समूह दूसरे बच्चों पर दबाव बनाता है और उनसे पैसे की मांग करता है। आरोप यह भी है कि पैसे नहीं देने वाले बच्चों के साथ मारपीट की जाती है।

नाबालिग के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद मामला गंभीर हो गया है। बाल सुधार गृह प्रबंधन ने भी बच्चे के साथ मारपीट और उसके हाथों पर कट लगने की बात स्वीकार की है, लेकिन कट लगाने में ब्लेड के इस्तेमाल को लेकर प्रबंधन और परिवार के दावों में अंतर है। वहीं, शिकायत के बाद बाल सुधार गृह में सर्चिंग किए जाने की बात सामने आई है, जिसमें मोबाइल फोन, गांजा, गुटखा और अन्य प्रतिबंधित सामान मिलने की जानकारी दी गई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा किया है कि आखिर बाल सुधार गृह जैसी निगरानी वाली जगह के भीतर प्रतिबंधित सामान कैसे पहुंचा और वहां रह रहे नाबालिगों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

हर सप्ताह एक हजार रुपये देने का दबाव, परिवार का आरोप

नाबालिग के पिता द्वारा पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त को उनके मोबाइल फोन पर बाल सुधार गृह से फोन आया था। परिवार का कहना है कि फोन पर बेटे ने वहां कुछ लड़कों द्वारा कथित तौर पर बनाए जा रहे दबाव के बारे में बताया।

आरोप के मुताबिक, नाबालिग से कहा गया कि यदि वह बाल सुधार गृह के अंदर सुरक्षित रहना चाहता है तो उसे हर सप्ताह एक हजार रुपये देने होंगे। परिवार का दावा है कि पैसे देने में असमर्थता जताने के बाद उसके साथ मारपीट की गई।

नाबालिग के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात भी परिवार की ओर से कही गई है। पिता का आरोप है कि बेटे के हाथों और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस और संबंधित अधिकारियों के सामने शिकायत की।

हालांकि, वसूली और मारपीट के इन आरोपों की विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना वास्तव में किस तरह हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

हाथों पर कट के निशान ने बढ़ाई चिंता

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात नाबालिग के हाथों पर मिले कट के निशान बताए जा रहे हैं। परिवार के मुताबिक, बच्चे ने बाहर आने के बाद बताया कि उसके दोनों हाथों पर कई कट लगाए गए थे।

परिवार का आरोप है कि एक लड़के ने कथित तौर पर ब्लेड से नाबालिग के हाथ पर अपना नाम तक लिख दिया। पिता का कहना है कि जब उनका बेटा बाल सुधार गृह से बाहर आया, तब भी उसके हाथ और शरीर पर चोट तथा कट के निशान दिखाई दे रहे थे।

यह आरोप सामने आने के बाद बाल सुधार गृह में बच्चों की निगरानी और उनके बीच होने वाली गतिविधियों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, इस मामले में परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

प्रबंधन ने कट लगने की बात मानी, लेकिन ब्लेड को लेकर अलग दावा

बाल सुधार गृह प्रबंधन की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद तत्काल जांच और सर्चिंग कराई गई। प्रबंधन ने एक बच्चे के साथ मारपीट होने तथा उसके हाथों पर कट लगने की बात स्वीकार की है।

हालांकि, प्रबंधन का कहना है कि कट शार्पनर से निकाली गई ब्लेड से लगाए गए थे। यानी परिवार जहां ब्लेड से हाथ पर नाम लिखे जाने का आरोप लगा रहा है, वहीं प्रबंधन ने कट लगने के पीछे शार्पनर की ब्लेड का इस्तेमाल होने की बात कही है।

बताया गया है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए पेन, पेंसिल और शार्पनर जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसी शैक्षणिक सामग्री में मौजूद शार्पनर की ब्लेड का गलत इस्तेमाल किए जाने की बात प्रबंधन की ओर से कही गई है।

अब जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि शार्पनर की ब्लेड बच्चों तक किस तरह पहुंची और क्या निगरानी के दौरान ऐसी वस्तुओं की नियमित जांच की जाती है।

सर्चिंग में मोबाइल फोन और प्रतिबंधित सामान मिलने का दावा

शिकायत सामने आने के बाद बाल सुधार गृह परिसर में सर्चिंग कराई गई। इस दौरान दो मोबाइल फोन, गांजा, गुटखा और अन्य प्रतिबंधित सामान मिलने की जानकारी सामने आई है।

यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है तो बाल सुधार गृह की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। बाल सुधार गृह में रहने वाले नाबालिगों की गतिविधियों पर निगरानी के साथ-साथ परिसर में बाहरी या प्रतिबंधित वस्तुओं की पहुंच रोकना भी प्रबंधन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

मोबाइल फोन मिलने की बात भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। सवाल यह है कि फोन वहां तक कैसे पहुंचे, उनका इस्तेमाल कौन कर रहा था और क्या इनके जरिए बाहर से किसी तरह का संपर्क या अन्य गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

इसी तरह गांजा और गुटखा मिलने के दावे की भी जांच की आवश्यकता है। प्रतिबंधित सामान की बरामदगी के स्रोत और उससे जुड़े लोगों का पता लगाना जांच एजेंसियों के लिए अहम होगा।

लूट और पिस्टल के मामले में पकड़ा गया था नाबालिग

जानकारी के अनुसार, बेलखेड़ा क्षेत्र में रहने वाले 17 वर्षीय नाबालिग को 10 अगस्त को लूट और पिस्टल रखने के मामले में पकड़ा गया था। इसके बाद उसे गोकलपुर स्थित बाल सुधार गृह में रखा गया।

करीब कुछ दिनों तक वहां रहने के बाद 19 अगस्त को वह जमानत पर बाहर आया। परिवार का कहना है कि बाहर आने के बाद नाबालिग ने अपने पिता को बाल सुधार गृह के अंदर के कथित हालात के बारे में बताया।

इसके बाद परिवार की ओर से शिकायत की गई। परिवार ने बाल सुधार गृह के साथ-साथ संबंधित न्यायालय में भी शिकायत करने की बात कही है।

यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि नाबालिग के खिलाफ दर्ज मूल मामले और बाल सुधार गृह के अंदर लगाए गए आरोप अलग-अलग विषय हैं। बाल सुधार गृह में रहने के दौरान उसके साथ क्या हुआ, इसकी पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

बाल न्यायालय को भेजी गई जानकारी

घटना सामने आने के बाद बाल सुधार गृह प्रबंधन ने संबंधित बाल न्यायालय को पत्र भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है। इससे पता चलता है कि मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के संज्ञान में भी पहुंच चुका है।

रांझी थाना पुलिस के अनुसार, परिवार की शिकायत सुनी गई है। परिवार की ओर से बाल सुधार गृह और कोर्ट में भी शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया गया है कि कोर्ट के निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में आने वाले समय में जांच के दौरान नाबालिग के बयान, चोटों से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, परिसर में हुई सर्चिंग और प्रतिबंधित सामान की बरामदगी जैसे बिंदुओं को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

करीब 50 बच्चे रह रहे हैं बाल सुधार गृह में

जानकारी के मुताबिक, गोकलपुर बाल सुधार गृह में फिलहाल करीब 50 नाबालिग रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या 16 से 17 वर्ष की उम्र के बच्चों की बताई जा रही है।

ऐसे में एक बच्चे की शिकायत केवल एक व्यक्तिगत घटना तक सीमित नहीं रह जाती। यदि वसूली, धमकी या मारपीट के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो इसका असर वहां रह रहे अन्य बच्चों की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद यह जरूरी हो जाता है कि वहां रहने वाले सभी बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि क्या किसी अन्य बच्चे ने भी इसी तरह की शिकायत की है या नहीं।

जांच के बाद ही साफ होगी पूरी सच्चाई

गोकलपुर बाल सुधार गृह से सामने आया यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। एक तरफ नाबालिग के परिवार ने वसूली, धमकी और मारपीट जैसे आरोप लगाए हैं, वहीं प्रबंधन ने मारपीट और कट लगने की घटना की पुष्टि करते हुए कट के लिए शार्पनर की ब्लेड के इस्तेमाल की बात कही है।

सर्चिंग में कथित तौर पर मोबाइल फोन, गांजा और गुटखा मिलने की जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब सबसे जरूरी यह है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो तथा यह पता लगाया जाए कि बाल सुधार गृह के अंदर वास्तव में क्या हुआ था।

जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जरूरत होगी। वहीं, यदि कुछ आरोप गलत या बढ़ा-चढ़ाकर लगाए गए हैं तो उसकी स्थिति भी जांच के बाद स्पष्ट होनी चाहिए।

फिलहाल यह मामला बाल सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, निगरानी और व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करता है। खासकर तब, जब वहां रहने वाले बच्चे पहले से ही संवेदनशील परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी तरह के दबाव, हिंसा या अवैध गतिविधि को रोकना बेहद महत्वपूर्ण है।

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