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कैंसर से जंग के बाद H1N1 का हमला, खांसी इतनी बढ़ी कि बोलना हुआ मुश्किल; 30 साल के मरीज के साथ फिर क्या हुआ?



नई दिल्ली: दिल्ली में मौसमी इन्फ्लुएंजा और H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच एक 30 वर्षीय कैंसर मरीज की कहानी सामने आई है, जिसने यह दिखाया कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए फ्लू कितना गंभीर रूप ले सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज Acute Myeloid Leukaemia (AML) से जूझ रहा था और हाल ही में कीमोथेरेपी से गुजरा था। इसी दौरान उसे H1N1 संक्रमण हो गया और उसकी हालत इतनी खराब हो गई कि लगातार खांसी के कारण उसके लिए एक पूरा वाक्य बोलना भी मुश्किल हो गया।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में H1N1 संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के हालिया आंकड़ों में राजधानी में H1N1 के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कीमोथेरेपी के बाद आया संक्रमण

रिपोर्ट के मुताबिक, 30 वर्षीय मरीज को Acute Myeloid Leukaemia (AML) था। वह कैंसर के इलाज के लिए कीमोथेरेपी करा चुका था। इलाज के बाद उसकी बोन मैरो जांच में बीमारी के नियंत्रण में आने के संकेत मिले थे, लेकिन कीमोथेरेपी के कारण उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर थी।

इसी दौरान उसे सांस से जुड़ा संक्रमण हुआ। शुरुआत में लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई दे सकते थे, लेकिन मरीज की कमजोर इम्युनिटी के कारण संक्रमण ने गंभीर रूप ले लिया। उसे दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया।

मरीज ने अपने अनुभव को याद करते हुए बताया कि खांसी इतनी ज्यादा थी कि वह बिना खांसे एक पूरा वाक्य तक नहीं बोल पा रहा था। यह स्थिति इस बात का संकेत थी कि संक्रमण उसके लिए सामान्य मौसमी फ्लू से कहीं ज्यादा गंभीर साबित हो रहा था।

कैंसर का इलाज खत्म हुआ, लेकिन खतरा अभी बाकी था

कैंसर से जूझ रहे मरीजों में बीमारी के इलाज के दौरान शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर काफी असर पड़ सकता है। खासकर कीमोथेरेपी के बाद कुछ समय तक संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है।

इस मरीज के मामले में भी कैंसर के इलाज के बाद उसकी बोन मैरो जांच में उत्साहजनक परिणाम मिले थे। लेकिन शरीर अभी पूरी तरह संक्रमण से लड़ने की स्थिति में नहीं पहुंचा था। ऐसे में H1N1 वायरस ने उसकी हालत को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।

यही कारण है कि डॉक्टर कैंसर मरीजों और हाल ही में कीमोथेरेपी करा चुके लोगों को फ्लू जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेने की सलाह देते हैं।

सामान्य व्यक्ति और कमजोर इम्युनिटी वाले मरीज में बड़ा अंतर

स्वस्थ व्यक्ति में मौसमी इन्फ्लुएंजा कई बार कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। लेकिन कैंसर, कीमोथेरेपी, अंग प्रत्यारोपण या अन्य कारणों से कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्ति में संक्रमण गंभीर हो सकता है।

ऐसे मरीजों में फ्लू के कारण फेफड़ों में संक्रमण, निमोनिया और सांस लेने में गंभीर परेशानी जैसी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर इस समूह में लक्षण शुरू होते ही चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर देते हैं।

मरीज के मामले ने भी इसी खतरे को उजागर किया। शुरुआत में संक्रमण श्वसन संबंधी समस्या के रूप में सामने आया, लेकिन लगातार खांसी और सांस संबंधी परेशानी के कारण स्थिति गंभीर हो गई।

H1N1 में कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?

H1N1 और अन्य मौसमी इन्फ्लुएंजा संक्रमण में कई सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, थकान और कमजोरी शामिल हैं।

कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। बच्चों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में लक्षण अलग या अधिक गंभीर रूप में दिखाई दे सकते हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल लक्षण देखकर H1N1 की पुष्टि नहीं की जा सकती। डॉक्टर मरीज की स्थिति और जोखिम कारकों को देखते हुए जांच और उपचार का निर्णय लेते हैं।

लगातार खांसी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

इस मामले में मरीज के अनुभव ने खास तौर पर लगातार खांसी को लेकर ध्यान खींचा है। अगर खांसी इतनी बढ़ जाए कि बोलने, चलने या सामान्य गतिविधियां करने में परेशानी होने लगे, तो इसे सामान्य फ्लू मानकर घर पर इंतजार करना सही नहीं है।

सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या दबाव, लगातार बढ़ता बुखार, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम या होंठों का नीला पड़ना जैसे संकेत गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

कैंसर मरीजों को क्यों ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?

कैंसर का इलाज कई तरह से प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकता है। कीमोथेरेपी के दौरान और उसके बाद शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। ऐसे में सामान्य संक्रमण भी कुछ मरीजों के लिए ज्यादा गंभीर हो सकता है।

हालांकि हर कैंसर मरीज को H1N1 होने पर गंभीर जटिलता होगी, लेकिन जोखिम सामान्य स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में अधिक हो सकता है। इसलिए इस समूह के लोगों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार संक्रमण से बचाव और समय पर उपचार महत्वपूर्ण है।

दिल्ली में बढ़ते मामलों के बीच अस्पताल सतर्क

राजधानी में H1N1 के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों ने भी तैयारियां बढ़ाई हैं। दिल्ली के कई अस्पतालों में फीवर क्लीनिक, आइसोलेशन सुविधा और फ्लू मरीजों के लिए अतिरिक्त बेड की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी इन्फ्लुएंजा के साथ अन्य मौसमी बीमारियों पर निगरानी बढ़ाने और अस्पतालों को तैयार रखने पर जोर दिया है।

क्या फ्लू वैक्सीन मदद कर सकती है?

मौसमी इन्फ्लुएंजा वैक्सीन में H1N1 से संबंधित घटक शामिल हो सकता है और टीकाकरण फ्लू के संक्रमण तथा गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि किस व्यक्ति को वैक्सीन लगवानी चाहिए और कब लगवानी चाहिए, इसका फैसला डॉक्टर से सलाह लेकर करना बेहतर है।

खास तौर पर कैंसर का इलाज करा रहे या हाल ही में कीमोथेरेपी पूरी कर चुके लोगों को वैक्सीन समेत किसी भी चिकित्सा कदम से पहले अपने ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह लेनी चाहिए।

मरीज की कहानी से क्या सीख मिलती है?

30 वर्षीय मरीज का अनुभव सिर्फ H1N1 संक्रमण की एक कहानी नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के लिए चेतावनी भी है जिनकी प्रतिरोधक क्षमता किसी बीमारी या उपचार के कारण कमजोर है।

कैंसर का इलाज पूरा होने के बाद भी शरीर को पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। ऐसे में बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी या अचानक कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

सबसे जरूरी बात यह है कि हर फ्लू गंभीर नहीं होता, लेकिन कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्ति में स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए जोखिम वाले लोगों में शुरुआती चिकित्सकीय सलाह और जरूरत के अनुसार समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है।

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