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किडनी के अंदर दिखा ऐसा नजारा कि डॉक्टर भी रह गए हैरान! 40 साल के मरीज से एक-एक कर निकलीं 37 पथरियां



प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने एक गंभीर मरीज की किडनी का जटिल ऑपरेशन कर एक ही बार में 37 पथरियां निकालने में सफलता हासिल की है। मरीज की दोनों किडनियों में बेहद बड़ी पथरियां मौजूद थीं और हालत बिगड़ने के बाद वह गंभीर संक्रमण यानी सेप्सिस और किडनी फेल्योर की स्थिति तक पहुंच गया था।

मरीज की स्थिति इतनी गंभीर थी कि अस्पताल पहुंचने के बाद उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। उसे कुछ समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया और डायलिसिस भी करानी पड़ी। ऑपरेशन के समय उसका सीरम क्रिएटिनिन 4.2 था। डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसी हालत में किडनी की सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था।

करीब एक साल से परेशान था मरीज

मरीज की पहचान शत्रुघ्न के रूप में हुई है, जो मध्य प्रदेश के रीवा जिले के पनासी गांव का रहने वाला है। वह करीब एक साल से दोनों किडनियों में पथरी की समस्या से जूझ रहा था।

परिजनों के अनुसार, पथरी को गलाने के लिए मरीज ने पहले होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक उपचार भी लिया था। हालांकि समस्या पूरी तरह दूर नहीं हुई और समय के साथ उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

करीब एक महीने से उसे लगातार बुखार और सांस लेने में परेशानी होने लगी। जब स्थिति गंभीर हुई तो परिवार उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा।

अस्पताल पहुंचते ही आईसीयू में भर्ती करना पड़ा

अस्पताल पहुंचने के समय मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। उसे गंभीर संक्रमण और किडनी फेल्योर की समस्या थी। डॉक्टरों ने तत्काल उसे आईसीयू में भर्ती किया।

मरीज को करीब तीन दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इस दौरान उसका हीमोडायलिसिस भी किया गया। हालत में कुछ सुधार आने के बाद उसे मेंटेनेंस डायलिसिस पर रखा गया।

जांच में पता चला कि दोनों किडनियों में बहुत बड़ी पथरियां थीं। इनका आकार करीब 4.5 सेंटीमीटर से 6 सेंटीमीटर तक था। इतनी बड़ी और कई पथरियों के कारण किडनी के सामान्य कामकाज पर गंभीर असर पड़ रहा था।

पहले बाईं किडनी का ऑपरेशन करने का फैसला

मरीज की स्थिति में कुछ सुधार आने के बाद यूरोलॉजी टीम ने दोनों किडनियों की समस्या को देखते हुए पहले बाईं किडनी का ऑपरेशन करने का फैसला किया।

21 अगस्त को PMSSY यूरोलॉजी ऑपरेशन थिएटर में मरीज की जटिल सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने Anatrophic Pyelolithotomy नाम की प्रक्रिया का इस्तेमाल किया।

यह एक जटिल सर्जिकल तकनीक है, जिसका इस्तेमाल चुनिंदा मामलों में बहुत बड़ी या बड़ी संख्या में मौजूद किडनी स्टोन को निकालने के लिए किया जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान किडनी को नियंत्रित तरीके से खोलकर उसके अंदर मौजूद पथरियों को एक-एक करके बाहर निकाला गया।

एक ही ऑपरेशन में निकलीं 37 पथरियां

इस जटिल सर्जरी की सबसे खास बात यही रही कि मरीज की बाईं किडनी से एक ही ऑपरेशन में 37 पथरियां निकाली गईं।

पथरियां निकालने के बाद डॉक्टरों ने किडनी की मरम्मत की और 5/26 डबल-जे (DJ) स्टेंट लगाया। ऑपरेशन के दौरान करीब 20 मिनट तक रीनल आर्टरी को क्लैंप किया गया।

डॉक्टरों के लिए यह प्रक्रिया इसलिए भी चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि मरीज पहले ही सेप्सिस और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति से गुजर चुका था।

डॉक्टरों की टीम ने संभाला चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन

इस ऑपरेशन का नेतृत्व यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. दिलीप चौरसिया ने किया। उनके साथ डॉ. शिरीष मिश्रा और डॉ. गजेंद्र भी ऑपरेशन टीम में शामिल रहे।

एनेस्थीसिया टीम में डॉ. धर्मेंद्र यादव, डॉ. प्रगति सक्सेना, डॉ. अर्ची सिंह, डॉ. कमल और डॉ. शिवमोहन शामिल थे।

प्रो. डॉ. दिलीप चौरसिया के मुताबिक, मरीज अस्पताल पहुंचने के समय बेहद गंभीर स्थिति में था और उसे वेंटिलेटर तथा डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी थी। मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद पहले बाईं किडनी का ऑपरेशन किया गया और उसमें मौजूद सभी 37 पथरियां निकाल दी गईं।

क्या है Anatrophic Pyelolithotomy?

Anatrophic Pyelolithotomy एक जटिल ओपन सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर तब किया जाता है जब किडनी में बहुत बड़ी या कई पथरियां मौजूद हों और सामान्य प्रक्रियाओं से उनका उपचार मुश्किल हो।

इसमें सर्जन किडनी तक पहुंच बनाकर उसे सावधानीपूर्वक खोलते हैं। इसके बाद पथरियों को निकाला जाता है और अंत में किडनी की मरम्मत की जाती है।

आज किडनी स्टोन के कई मामलों में कम इनवेसिव तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कुछ बेहद जटिल मामलों में ओपन सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

शत्रुघ्न का मामला भी बेहद जटिल था क्योंकि दोनों किडनियों में बड़े आकार की पथरियां थीं और मरीज की हालत पहले ही गंभीर संक्रमण तथा किडनी फेल्योर के कारण कमजोर थी।

दूसरी किडनी पर भी डॉक्टरों की नजर

फिलहाल डॉक्टर मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। पहली सर्जरी में बाईं किडनी से 37 पथरियां निकाल दी गई हैं, लेकिन मरीज की दूसरी किडनी में भी बड़ी पथरियां मौजूद हैं।

डॉक्टर मरीज की वर्तमान स्थिति और दूसरी किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने के बाद आगे के उपचार को लेकर फैसला करेंगे।

इसका मतलब यह है कि मरीज का इलाज अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उसकी रिकवरी और दूसरी किडनी की स्थिति आगे की चिकित्सा योजना तय करने में महत्वपूर्ण होगी।

समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर हो सकती है पथरी

किडनी स्टोन आम समस्या हो सकती है, लेकिन बड़ी या लंबे समय तक मौजूद रहने वाली पथरी कई बार गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकती है। खासकर अगर पथरी पेशाब के रास्ते में रुकावट पैदा करे या संक्रमण से जुड़ जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

इस मामले में भी मरीज को लंबे समय से पथरी की समस्या थी और बाद में बुखार तथा सांस लेने में परेशानी बढ़ गई। अस्पताल पहुंचने तक स्थिति सेप्सिस और किडनी फेल्योर तक पहुंच चुकी थी।

यही वजह है कि कमर या पेट में बार-बार दर्द, पेशाब में खून, पेशाब करते समय जलन, बुखार या पेशाब के प्रवाह में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

37 पथरियां निकलने के बाद परिवार को राहत

एक तरफ मरीज की हालत गंभीर थी और दोनों किडनियों में बड़ी पथरियां थीं, वहीं दूसरी तरफ एक ही ऑपरेशन में 37 पथरियों को निकालना डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती थी।

सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया है और डॉक्टर उसकी रिकवरी पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। दूसरी किडनी के उपचार को लेकर फैसला उसकी स्थिति के आधार पर किया जाएगा।

प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में हुई यह सर्जरी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक ही किडनी से 37 पथरियों को एक साथ निकालने के लिए बेहद जटिल प्रक्रिया अपनानी पड़ी, जबकि मरीज पहले से गंभीर संक्रमण, किडनी फेल्योर और डायलिसिस जैसी स्थिति से गुजर रहा था।

किडनी स्टोन के लक्षण होने पर घरेलू या अप्रमाणित उपचार के भरोसे लंबे समय तक इलाज टालना उचित नहीं है। पथरी का आकार, स्थान और किडनी की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जांच जरूरी होती है।

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