Breaking News

बारिश के पानी में छिपा है मौत का खतरा! 749 संदिग्ध मरीजों के बाद मचा हड़कंप, कहीं आप भी तो नहीं खतरे में?

 


पुणे। मानसून के साथ ही मच्छरजनित बीमारियों का खतरा एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र के पुणे में डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। इस साल अब तक पुणे में 749 संदिग्ध डेंगू मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से करीब दो-तिहाई मामले जून और जुलाई के दौरान दर्ज किए गए हैं। बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है, जिससे आने वाले दिनों में संक्रमण बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

डेंगू का खतरा केवल पुणे तक सीमित नहीं है। मानसून के दौरान देश के कई हिस्सों में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की निगरानी बढ़ाई जा रही है। गोवा के दक्षिणी जिले में अगस्त के शुरुआती 10 दिनों में 71 डेंगू मामलों की पुष्टि हुई, जिनमें 27 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी जुलाई और अगस्त की शुरुआत में डेंगू के मामले सामने आए हैं।

आखिर क्यों बढ़ रहा है डेंगू का खतरा?

डेंगू वायरस संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ पानी में भी पनप सकता है। बारिश के बाद घरों के आसपास रखे पुराने बर्तन, कूलर, टायर, गमले, छतों पर जमा पानी और अन्य छोटे कंटेनर मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकते हैं।

मानसून के दौरान तापमान और नमी की स्थिति भी मच्छरों के लिए अनुकूल हो सकती है। यही कारण है कि बारिश के मौसम में स्वास्थ्य विभाग लोगों को पानी जमा नहीं होने देने की लगातार सलाह देता है।

पुणे में इस साल सामने आए आंकड़ों में जून और जुलाई का योगदान विशेष रूप से चिंता बढ़ाने वाला है। साल के कुल 749 संदिग्ध मामलों में करीब दो-तिहाई मामले इन्हीं दो महीनों में दर्ज हुए हैं।

जुलाई में अचानक बढ़े मामले

पुणे में जुलाई के दौरान डेंगू मामलों में तेजी देखी गई। बारिश के कारण मच्छरों के प्रजनन की परिस्थितियां बढ़ीं और इसके साथ ही संक्रमण के मामलों में भी उछाल आया। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से आसपास पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है।

बारिश के बाद पानी का जमा होना अक्सर लोगों को सामान्य समस्या लगती है, लेकिन यही पानी कुछ दिनों में मच्छरों के पनपने का बड़ा कारण बन सकता है। खासकर ऐसी जगहें जहां पानी कई दिनों तक साफ नहीं किया जाता, वहां मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

डेंगू के लक्षणों को नजरअंदाज न करें

डेंगू होने पर हर मरीज में एक जैसे लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। आम तौर पर तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, कमजोरी, मतली या उल्टी और त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।

कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है। इसलिए लगातार तेज बुखार या अन्य संदिग्ध लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।

विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डेंगू की पुष्टि केवल लक्षण देखकर नहीं की जाती। डॉक्टर जरूरत के अनुसार रक्त जांच और अन्य चिकित्सकीय परीक्षण की सलाह दे सकते हैं।

हर बुखार डेंगू नहीं होता

मानसून में बुखार के कई कारण हो सकते हैं। डेंगू के अलावा मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियां भी बुखार का कारण बन सकती हैं। इसलिए केवल बुखार आने पर यह मान लेना कि मरीज को डेंगू ही है, सही नहीं है।

इसी वजह से उचित जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन महत्वपूर्ण है। अगर बुखार लगातार बना हुआ है या मरीज की हालत बिगड़ रही है तो चिकित्सकीय सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

अस्पतालों पर भी बढ़ सकता है दबाव

अगर मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर अस्पतालों पर भी पड़ सकता है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर जांच, बेड, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की जरूरत बढ़ जाती है।

दक्षिण गोवा में अगस्त के पहले 10 दिनों में 71 पुष्ट डेंगू मामलों में से 27 मरीजों को अस्पताल में भर्ती किया गया। इससे पता चलता है कि संक्रमण बढ़ने पर केवल मरीजों की संख्या ही नहीं, बल्कि अस्पतालों पर पड़ने वाला दबाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

लखनऊ में भी सामने आए नए मामले

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी डेंगू को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जुलाई में शहर में 15 मामले सामने आए थे, जबकि अगस्त के पहले सप्ताह में 11 और मामले दर्ज किए गए। अधिकारियों ने मच्छरों की रोकथाम और पानी जमा न होने देने पर जोर दिया है।

इससे साफ है कि मानसून के दौरान डेंगू की निगरानी केवल एक शहर या राज्य की चुनौती नहीं है। बारिश के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों में मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

नागपुर में घर-घर होगा सर्वे

डेंगू और अन्य मच्छरजनित बीमारियों की आशंका को देखते हुए नागपुर नगर निगम ने भी निगरानी मजबूत करने की तैयारी की है। नगर निगम 1,112 आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर मच्छरों के लार्वा की जांच करने के अभियान में लगाने की योजना बना रहा है।

इस अभियान का उद्देश्य डेंगू, चिकनगुनिया और अन्य वेक्टर जनित बीमारियों के खतरे को समय रहते पहचानना है। ऐसे अभियानों में मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों को खोजकर उन्हें खत्म करने पर भी जोर दिया जाता है।

घर में इन जगहों पर रखें विशेष नजर

डेंगू से बचाव के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना है। घर और आसपास नियमित रूप से जांच करनी चाहिए कि कहीं पानी जमा तो नहीं है।

कूलर, गमले, बाल्टी, टायर, छत, पानी की टंकी, टूटे हुए बर्तन और अन्य छोटे कंटेनर विशेष ध्यान देने वाली जगहें हैं। पानी की टंकियों को ढककर रखना और कूलर का पानी नियमित रूप से बदलना भी जरूरी है।

घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाना, मच्छररोधी उपाय अपनाना और शरीर को पर्याप्त रूप से ढकने वाले कपड़े पहनना भी मच्छरों के काटने से बचने में मदद कर सकता है।

बच्चों और बुजुर्गों पर रखें खास नजर

बारिश के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। अगर अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, पेट में दर्द, असामान्य रक्तस्राव या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

डेंगू के संदिग्ध मरीजों को पर्याप्त आराम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार देखभाल की आवश्यकता हो सकती है। बीमारी के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने देना भी महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह सर्वोपरि है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है निगरानी

मानसून अभी जारी है, इसलिए स्वास्थ्य विभागों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मच्छरों की संख्या को नियंत्रित करना और संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान करना है। पुणे में 749 संदिग्ध मामलों और जून-जुलाई में तेज बढ़ोतरी ने प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ा दी है।

डेंगू से निपटने में केवल सरकारी अभियान काफी नहीं हैं। लोगों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। यदि घर और आसपास पानी जमा नहीं होने दिया जाए तथा बुखार और अन्य लक्षणों को समय पर गंभीरता से लिया जाए, तो संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल बारिश के मौसम में सबसे बड़ा खतरा यही है कि मच्छरों के छोटे-छोटे प्रजनन स्थल नजरअंदाज न किए जाएं। क्योंकि कई बार बीमारी का खतरा किसी बड़े जलभराव से नहीं, बल्कि घर के आसपास जमा कुछ दिनों पुराने पानी से ही शुरू हो सकता है।

जरूरी सावधानी

डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेकर इलाज शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। लगातार तेज बुखार या गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह बीमारी की गंभीरता को समझने में मदद कर सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं