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फेफड़ों में चुपचाप पल रहा हो सकता है खतरा! शुरुआत में दिखते हैं ये मामूली संकेत, बाद में बदल सकती है पूरी जिंदगी



नई दिल्ली: फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर बीमारी है और इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण कई बार बहुत हल्के होते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते। कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है, जब वह काफी आगे बढ़ चुकी होती है। लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या वजन कम होना जैसे लक्षणों को लोग कई बार सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

यही वजह है कि शरीर में लंबे समय से बने रहने वाले या सामान्य से अलग लक्षणों को गंभीरता से लेना जरूरी है। हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि इन लक्षणों का मतलब सीधे तौर पर फेफड़ों का कैंसर नहीं होता। कई अन्य बीमारियों में भी यही समस्याएं हो सकती हैं। सही कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है।

शुरुआत में क्यों पता नहीं चलता फेफड़ों का कैंसर?

फेफड़ों के कैंसर की शुरुआत में ट्यूमर बहुत छोटा हो सकता है। ऐसे में वह फेफड़ों के सामान्य कामकाज को ज्यादा प्रभावित नहीं करता और व्यक्ति को किसी बड़ी समस्या का एहसास नहीं होता।

अगर ट्यूमर ऐसी जगह विकसित हुआ है जहां वह सांस की नली या आसपास के महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित नहीं कर रहा है, तो बीमारी कुछ समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के आगे बढ़ सकती है।

यही कारण है कि कुछ मामलों में फेफड़ों का कैंसर किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की जांच के दौरान संयोग से सामने आता है।

बीमारी का जल्दी पता चलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुरुआती अवस्था में इलाज के विकल्प अधिक हो सकते हैं।

लगातार खांसी को सामान्य समझने की गलती न करें

खांसी कई सामान्य बीमारियों में होती है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी, संक्रमण या धूम्रपान की वजह से भी खांसी हो सकती है।

लेकिन अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे, लगातार बढ़ती जाए या उसकी प्रकृति पहले से अलग हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

खासकर लंबे समय से धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को लगातार बनी खांसी के मामले में डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

यह जरूरी नहीं कि लंबे समय की खांसी कैंसर ही हो, लेकिन इसका कारण पता करना जरूरी है।

सांस फूलना भी हो सकता है चेतावनी संकेत

अगर पहले आसानी से किए जाने वाले काम करने पर अब जल्दी सांस फूलने लगी है, तो इसका कारण जानना जरूरी है।

सीढ़ियां चढ़ने, तेज चलने या सामान्य घरेलू काम के दौरान सांस लेने में परेशानी होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें अस्थमा, संक्रमण, हृदय संबंधी समस्या और फेफड़ों की अन्य बीमारियां शामिल हैं।

लेकिन अगर सांस फूलने की समस्या लगातार बनी हुई है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर होगा।

खांसी के साथ खून आए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं

खांसी के दौरान बलगम में खून दिखाई देना ऐसा लक्षण है जिसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इसके कई कारण हो सकते हैं और हर मामले में कैंसर होना जरूरी नहीं है। लेकिन खून आने की वजह का पता लगाने के लिए डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है।

अगर खून अधिक मात्रा में आ रहा हो या साथ में सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही हो तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना चाहिए।

सीने में लगातार दर्द भी हो सकता है संकेत

फेफड़ों से जुड़ी कुछ गंभीर समस्याओं में सीने में दर्द या असहजता हो सकती है।

अगर खांसने या गहरी सांस लेने पर दर्द बढ़ता है या सीने में लगातार बेचैनी बनी रहती है, तो जांच कराना जरूरी है।

हालांकि सीने में दर्द का मतलब केवल फेफड़ों का कैंसर नहीं है। हृदय, मांसपेशियों, गैस और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी सीने में दर्द हो सकता है।

इसीलिए खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना सही तरीका है।

बिना वजह वजन कम होना

अगर आपने अपनी डाइट या व्यायाम में कोई बदलाव नहीं किया है, फिर भी वजन लगातार कम हो रहा है तो इसे सामान्य नहीं माना जाना चाहिए।

बिना वजह वजन कम होना कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है।

फेफड़ों के कैंसर में भी भूख कम होने और बिना कोशिश वजन कम होने जैसी समस्या दिखाई दे सकती है।

अगर वजन लगातार कम हो रहा है तो डॉक्टर से जांच कराकर वास्तविक कारण पता करना जरूरी है।

बार-बार निमोनिया या ब्रोंकाइटिस

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार फेफड़ों का संक्रमण हो रहा है या निमोनिया बार-बार लौट रहा है तो इसके कारण की जांच जरूरी हो सकती है।

इसका मतलब यह नहीं कि हर बार कैंसर है। संक्रमण कई कारणों से हो सकता है।

लेकिन अगर समस्या बार-बार हो रही है, इलाज के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हो रही या इसके साथ दूसरे असामान्य लक्षण भी हैं तो डॉक्टर अतिरिक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।

आवाज में बदलाव को भी न करें नजरअंदाज

कुछ मामलों में फेफड़ों के कैंसर से आवाज में भारीपन या लगातार आवाज बैठने की समस्या हो सकती है।

अगर आवाज में बदलाव कई दिनों या हफ्तों तक बना रहता है और इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

यह भी याद रखना चाहिए कि आवाज बैठने के कई सामान्य कारण हो सकते हैं, इसलिए इसे देखकर तुरंत कैंसर का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

लगातार थकान और कमजोरी

हर व्यक्ति को कभी-कभी थकान महसूस होती है। कम नींद, अधिक काम, तनाव या दूसरी सामान्य वजहों से भी शरीर थका हुआ महसूस कर सकता है।

लेकिन अगर लगातार कमजोरी बनी हुई है और इसके साथ खांसी, वजन कम होना या सांस फूलने जैसी समस्याएं भी मौजूद हैं तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है।

फेफड़ों के कैंसर का पता कैसे चलता है?

डॉक्टर सबसे पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों को समझते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार कुछ जांच कराई जा सकती हैं।

छाती का एक्स-रे या CT स्कैन फेफड़ों में मौजूद असामान्य बदलावों का पता लगाने में मदद कर सकता है।

अगर इमेजिंग जांच में कोई संदिग्ध हिस्सा दिखाई देता है तो डॉक्टर आगे की जांच की सलाह दे सकते हैं।

कैंसर की पुष्टि के लिए कुछ मामलों में बायोप्सी की आवश्यकता पड़ सकती है। इसमें संदिग्ध ऊतक का नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है।

इसके बाद डॉक्टर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि बीमारी किस प्रकार की है और कितनी आगे बढ़ चुकी है।

हर व्यक्ति को CT स्कैन कराने की जरूरत नहीं

यह समझना भी जरूरी है कि हर व्यक्ति को अपनी तरफ से CT स्कैन कराने की आवश्यकता नहीं होती।

कैंसर स्क्रीनिंग और बीमारी के लक्षण होने पर जांच दो अलग-अलग चीजें हैं।

उच्च जोखिम वाले कुछ लोगों के लिए डॉक्टर लो-डोज CT स्क्रीनिंग की सलाह दे सकते हैं। खासकर लंबे समय तक भारी मात्रा में धूम्रपान करने वाले लोगों में डॉक्टर जोखिम का आकलन करके स्क्रीनिंग के बारे में फैसला कर सकते हैं।

इसलिए स्क्रीनिंग को लेकर खुद निर्णय लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

धूम्रपान सबसे बड़ा जोखिम कारक

फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में धूम्रपान सबसे महत्वपूर्ण है।

सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू के अन्य उत्पाद स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।

जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनके लिए इसे छोड़ना फेफड़ों और हृदय सहित पूरे शरीर की सेहत के लिए महत्वपूर्ण कदम है।

सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने वाले लोगों के लिए भी सावधानी जरूरी है।

इसके अलावा कुछ लोगों में काम की जगह पर मौजूद धूल, धुआं या कुछ हानिकारक पदार्थों के लंबे समय तक संपर्क से भी जोखिम बढ़ सकता है।

इलाज बीमारी की अवस्था पर निर्भर करता है

फेफड़ों के कैंसर का इलाज हर मरीज में एक जैसा नहीं होता।

डॉक्टर इलाज का फैसला कैंसर के प्रकार, स्टेज, ट्यूमर की स्थिति और मरीज की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति को देखकर करते हैं।

कुछ मरीजों में सर्जरी की जा सकती है। इसके अलावा रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसे उपचार भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कई बार एक से अधिक उपचारों को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।

अगर बीमारी शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाए तो कुछ मरीजों में उपचार के विकल्प अधिक हो सकते हैं।

समय पर जांच क्यों जरूरी है?

किसी भी गंभीर बीमारी की तरह फेफड़ों के कैंसर में भी समय महत्वपूर्ण होता है।

अगर लक्षण लंबे समय तक बने हुए हैं और व्यक्ति लगातार उन्हें नजरअंदाज करता रहता है तो बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है।

इसके विपरीत समय पर डॉक्टर से मिलने से समस्या का वास्तविक कारण पता लगाने में मदद मिल सकती है।

अगर कैंसर की पुष्टि होती है तो बीमारी की अवस्था के अनुसार इलाज जल्द शुरू किया जा सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोगों को फेफड़ों की सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में कुछ प्रकार के कैंसर का इतिहास रहा है या जो लंबे समय तक धूल, धुएं अथवा कुछ औद्योगिक पदार्थों के संपर्क में रहे हैं, उन्हें भी अपने स्वास्थ्य को लेकर डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए।

हालांकि जोखिम कारक मौजूद होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर जरूर होगा।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर लगातार कई हफ्तों से खांसी बनी हुई है, सांस लेने में परेशानी बढ़ रही है, सीने में लगातार दर्द है, खांसी के साथ खून आ रहा है या बिना किसी कारण वजन कम हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

अगर सांस लेने में अचानक गंभीर परेशानी हो या बड़ी मात्रा में खून आए तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

फेफड़ों का कैंसर शुरुआती चरण में कई बार चुपचाप बढ़ सकता है। यही वजह है कि लगातार खांसी, सांस फूलना, सीने में दर्द, खांसी में खून, बिना वजह वजन कम होना, बार-बार फेफड़ों में संक्रमण, आवाज में बदलाव और लगातार कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हालांकि इन लक्षणों का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है। कई सामान्य बीमारियों में भी ये समस्याएं हो सकती हैं। सही कारण का पता लगाने के लिए डॉक्टर की सलाह और आवश्यक जांच जरूरी है।

धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए तंबाकू छोड़ना सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। वहीं लंबे समय से बने रहने वाले या लगातार बढ़ते लक्षणों में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बीमारी की पहचान में मदद कर सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी गंभीर लक्षण को महीनों तक टालने के बजाय समय पर जांच कराएं। बीमारी अगर गंभीर भी निकले, तो जल्दी पता चलने से डॉक्टर के पास उपचार की योजना बनाने के लिए अधिक विकल्प हो सकते हैं।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। यह किसी व्यक्ति के लिए बीमारी का निदान या उपचार नहीं है। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लें।

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