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मां के खिलाफ अदालत में खड़ी हुई 6 साल की मासूम, एक सवाल पर बोली ऐसी बात कि पूरे कोर्ट में छा गया सन्नाटा



बरला। पति की हत्या की साजिश रचने के मामले में आरोपी मां के खिलाफ उसकी ही छह साल की बेटी के मुंह से निकले शब्दों ने अदालत में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। जब न्यायाधीश ने बच्ची से पूछा कि वह क्या चाहती है, तो उसने रोते हुए कहा कि ऐसी मां को फांसी मिलनी चाहिए। मासूम के इस जवाब से अदालत का माहौल गमगीन हो गया।

इस सनसनीखेज मामले में मृतक के नाबालिग बेटे की गवाही भी अभियोजन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। बेटे ने अदालत में अपनी मां के खिलाफ गवाही देते हुए पिता की हत्या में उसकी कथित भूमिका के बारे में जानकारी दी। उपलब्ध मामले के विवरण के अनुसार, इन्हीं गवाहियों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी महिला और उसके प्रेमी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

10 जुलाई 2025 को हुई थी हत्या

मामला 10 जुलाई 2025 का है। बरला कस्बे के मोहल्ला कोठी में सुरेश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मृतक के भाई विजय सिंह ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

शिकायत में विजय सिंह ने आरोप लगाया था कि सुरेश की पत्नी बीना के मोहल्ले के ही रहने वाले मनोज के साथ प्रेम संबंध थे। आरोप के मुताबिक, इसी संबंध के चलते दोनों ने सुरेश को रास्ते से हटाने की साजिश रची।

घटना वाले दिन विजय अपने भाई सुरेश के साथ घर के बाहर बैठा हुआ था। बताया गया कि बीना भी घर के दरवाजे के पास मौजूद थी। इसी दौरान मनोज वहां पहुंचा।

पत्नी के इशारे पर प्रेमी ने चलाई गोली

अभियोजन के अनुसार, मनोज के वहां पहुंचने के बाद बीना ने कथित तौर पर उससे सुरेश को गोली मारने के लिए कहा। आरोप है कि इसके बाद मनोज ने तमंचे से सुरेश पर गोली चला दी।

गोली लगने के बाद सुरेश गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई। घटना के दौरान उसका भाई विजय उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा तो आरोपी ने उस पर भी गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि गोली विजय को न लगकर दीवार में जा लगी।

घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने बीना और मनोज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

जांच के बाद अदालत में दाखिल हुआ आरोप पत्र

पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और घटना से जुड़े साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए गए।

अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जेपी राजपूत के अनुसार, मुकदमे के दौरान मृतक के नाबालिग बेटे की गवाही को महत्वपूर्ण माना गया। बेटे ने अदालत में अपनी मां के खिलाफ बयान देते हुए पिता की हत्या कराने में उसकी भूमिका का आरोप लगाया।

मामले में पेश किए गए गवाहों और साक्ष्यों पर अदालत ने विस्तार से विचार किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

मां के खिलाफ बेटे की गवाही बनी अहम कड़ी

इस मुकदमे की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में मृतक के नाबालिग बेटे की गवाही रही। जिस महिला पर अपने पति की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप था, उसी के बेटे ने अदालत में उसके खिलाफ बयान दिया।

बच्चे की गवाही के अलावा अभियोजन ने अन्य गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों को भी अदालत के सामने रखा। अदालत ने पूरे मामले में प्रस्तुत सामग्री का अवलोकन करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी माना।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि हत्या के पीछे कथित रूप से पारिवारिक विवाद और प्रेम संबंध को वजह बताया गया था।

अदालत में रो पड़ी छह साल की बच्ची

फैसले के दौरान छह साल की बच्ची के शब्दों ने अदालत का माहौल बदल दिया। न्यायाधीश ने जब मासूम से पूछा कि वह क्या चाहती है, तो बच्ची भावुक हो गई।

बताया गया कि बच्ची ने रोते हुए कहा, “ऐसी मां को तो फांसी मिलनी चाहिए।”

मासूम के इस कथन के बाद अदालत में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। अपने पिता की हत्या के मामले में मां के आरोपी होने की स्थिति ने बच्ची पर कितना गहरा असर डाला, यह उसके शब्दों से साफ दिखाई दिया।

बच्ची की उम्र बेहद कम होने के बावजूद उसके मुंह से निकले ये शब्द पूरे मामले की सबसे भावुक तस्वीर बन गए।

दोनों दोषियों को उम्रकैद

गुरुवार को दोनों पक्षों को सुनने और मामले में पेश किए गए साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय तोष कुमार शर्मा ने बीना और मनोज को दोषी माना।

अदालत ने दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही प्रत्येक पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

अदालत के फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत दोनों दोषियों को जेल भेज दिया गया।

फैसले से ज्यादा बच्ची के शब्दों की चर्चा

अदालत में फैसला सुनाए जाने के बाद मामले की कानूनी कार्रवाई तो पूरी हो गई, लेकिन वहां मौजूद लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा छह साल की बच्ची के बयान की रही।

एक तरफ अदालत ने मां और उसके कथित प्रेमी को पति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई, वहीं दूसरी तरफ मासूम बेटी का अपनी मां के लिए फांसी की मांग करना हर किसी को झकझोर गया।

इस घटना ने यह भी दिखाया कि किसी आपराधिक वारदात का असर केवल पीड़ित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसके परिवार और खासकर बच्चों की जिंदगी पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

सुरेश की हत्या के मामले में अदालत ने उपलब्ध गवाहियों और साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया है। वहीं, छह साल की बच्ची और उसके नाबालिग भाई की स्थिति इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बनकर सामने आई है।

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