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15 हजार साल पुरानी हड्डियों ने खोला खौफनाक राज! रेगिस्तान में जिंदा रहने के लिए इंसान खाते थे सांप-छिपकली



नई दिल्ली: आज के दौर में रेगिस्तान में कुछ समय बिताना भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। तेज गर्मी, पानी की कमी, सीमित भोजन और कठोर वातावरण इंसान के सामने बड़ी मुश्किलें खड़ी कर देते हैं। आधुनिक समय में भले ही हमारे पास नेविगेशन सिस्टम, विशेष कपड़े, पानी स्टोर करने की तकनीक और कई तरह के सर्वाइवल गैजेट मौजूद हों, लेकिन हजारों साल पहले इंसानों के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं थी।

करीब 15 हजार साल पहले दक्षिण लेवांत क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच जीवन बिताना रोजमर्रा की चुनौती थी। लेकिन पुरातात्विक शोध से पता चला है कि उस समय के इंसानों ने अपने आसपास मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करके जीवित रहने के बेहद दिलचस्प तरीके विकसित कर लिए थे।

हाल ही में सामने आई एक रिसर्च ने नटुफियन समुदाय की डाइट से जुड़ा ऐसा रहस्य उजागर किया है, जिसने प्राचीन इंसानों के जीवन को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है। शोधकर्ताओं को प्राचीन अवशेषों से संकेत मिले हैं कि उस समय के लोग सांपों और छिपकलियों का शिकार करके उन्हें भोजन के रूप में इस्तेमाल करते थे।

15 हजार साल पुरानी बस्ती से मिला अहम सुराग

इस शोध का केंद्र इजरायल के माउंट कार्मेल क्षेत्र में स्थित अल-वाद टेरेस नाम की पुरातात्विक साइट रही। यह स्थान प्राचीन मानव गतिविधियों के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां कई अलग-अलग समय की मानव बस्तियों के प्रमाण मिले हैं।

रिसर्चर्स के मुताबिक, इस साइट पर करीब 20 पुरातात्विक परतें मौजूद हैं। इनमें सबसे पुरानी परतों में लगभग 15 हजार वर्ष पुराने मानव निवास के प्रमाण मिले हैं।

इन अवशेषों के अध्ययन ने शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद की कि उस समय वहां रहने वाले लोग अपने आसपास के वातावरण से किस तरह भोजन जुटाते थे।

हजारों सांप और छिपकलियों के अवशेष मिले

जर्मनी की कील यूनिवर्सिटी से जुड़ी पुरातत्वविद मायान लेव और उनकी टीम ने इस क्षेत्र से मिले जीव-जंतुओं के अवशेषों का अध्ययन किया। रिसर्चर्स ने बड़ी संख्या में सांपों और छिपकलियों की हड्डियों की पहचान की।

लेकिन सिर्फ हड्डियों का मिलना यह साबित नहीं करता कि इन जानवरों को इंसानों ने खाया था। ये जानवर प्राकृतिक कारणों से भी मर सकते थे। इसलिए वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की कि इन अवशेषों पर मानव गतिविधि के कोई निशान मौजूद हैं या नहीं।

यहीं से शोध और दिलचस्प हो गया।

हड्डियों पर मिले कट और खरोंच के निशान

शोधकर्ताओं ने सांपों और छिपकलियों की हड्डियों को माइक्रोस्कोप के जरिए बारीकी से जांचा। उन्हें कुछ हड्डियों पर ऐसे कट और खरोंच के निशान मिले, जो मानव द्वारा किए गए माने गए।

इन निशानों की प्रकृति से संकेत मिलता है कि प्राचीन इंसानों ने इन सरीसृपों को काटने और उनके शरीर से मांस निकालने के लिए पत्थर के औजारों का इस्तेमाल किया था।

इससे यह संभावना मजबूत हुई कि सांप और छिपकलियां केवल उस इलाके में रहने वाले जीव नहीं थे, बल्कि कुछ प्राचीन समुदायों के भोजन का हिस्सा भी थे।

हर सांप उनके खाने की पसंद नहीं था

रिसर्च से सामने आई सबसे दिलचस्प बात यह है कि नटुफियन लोग कथित तौर पर किसी भी सांप को पकड़कर नहीं खा रहे थे। उनकी पसंद में कुछ खास प्रजातियां ज्यादा दिखाई देती हैं।

शोध में बड़े चाबुक सांप और ईस्टर्न मोंटपेलियर सांप जैसी प्रजातियों के अवशेष मिले हैं। इसके अलावा यूरोपियन ग्लास लिजर्ड यानी ऐसी छिपकली के अवशेष भी मिले, जिसका शरीर सामान्य छिपकलियों की तुलना में काफी अलग होता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इन जीवों को चुनने के पीछे उनके आकार और अपेक्षाकृत कम खतरे जैसे कारण हो सकते हैं।

जहरीले सांपों से दूरी बनाकर रखते थे?

प्राचीन इंसानों के लिए सांपों का शिकार करना जोखिम भरा काम रहा होगा। खासकर जहरीले सांपों को पकड़ना जानलेवा भी साबित हो सकता था।

इसीलिए शोधकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण परिकल्पना है कि नटुफियन समुदाय ऐसे सरीसृपों को प्राथमिकता देता था जिन्हें पकड़ना अपेक्षाकृत आसान और कम जोखिम वाला था।

रिसर्च में वाइपर जैसे जहरीले सांपों के अवशेष अपेक्षाकृत कम मिलने की बात सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि उस समय के लोग अपने शिकार का चुनाव सोच-समझकर करते होंगे।

यानी भोजन की तलाश में वे सिर्फ उपलब्धता नहीं देखते थे, बल्कि संभावित खतरे को भी ध्यान में रखते थे।

ग्लास लिजर्ड क्यों थी खास?

यूरोपियन ग्लास लिजर्ड इस शोध में खास महत्व रखती है। नाम में लिजर्ड होने के बावजूद यह सामान्य छिपकलियों से अलग दिखाई देती है और इसके शरीर पर मजबूत स्केल्स होते हैं।

रिसर्चर्स ने पाया कि इन अवशेषों पर काटने के अलग तरह के निशान मौजूद थे। इससे यह संभावना सामने आई कि नटुफियन लोगों ने इन जीवों को काटने के लिए विशेष तकनीक अपनाई होगी।

यह बात उस समय के इंसानों की व्यवहारिक समझ को दिखाती है। लगभग 15 हजार साल पहले, जब आधुनिक औजार और तकनीक मौजूद नहीं थे, तब भी इंसान अपने भोजन को हासिल करने के लिए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार तरीके विकसित कर रहे थे।

नटुफियन समुदाय कौन था?

नटुफियन संस्कृति दक्षिण लेवांत क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण प्राचीन संस्कृति मानी जाती है। इस क्षेत्र में आज के इजरायल, जॉर्डन और आसपास के इलाके शामिल हैं।

नटुफियन समुदाय को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इनके जीवन में स्थायी या अर्ध-स्थायी बस्तियों के संकेत मिले हैं। यह वह समय था जब कृषि के व्यापक विकास से पहले इंसान भोजन जुटाने के लिए शिकार, संग्रह और स्थानीय संसाधनों पर काफी निर्भर थे।

इन लोगों का जीवन पूरी तरह आसान नहीं था। उन्हें बदलते मौसम, भोजन की उपलब्धता और जंगली जानवरों जैसे कई खतरों के बीच अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ती थीं।

सर्वाइवल की कहानी बताती हैं ये हड्डियां

आज किसी पुरानी हड्डी को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा सके कि वह हजारों साल पहले किसी इंसान की जिंदगी के बारे में कितनी बड़ी कहानी बता सकती है। लेकिन पुरातत्व विज्ञान में ऐसे ही छोटे-छोटे संकेत इतिहास की बड़ी तस्वीर तैयार करते हैं।

हड्डियों पर मौजूद कट के निशान, जानवरों की प्रजातियां और उनके मिलने की जगह वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करती है कि प्राचीन इंसान क्या खाते थे और कैसे शिकार करते थे।

माउंट कार्मेल क्षेत्र से मिले साक्ष्य भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

इंसान ने हमेशा बदले माहौल के साथ खुद को ढाला

इस शोध का सबसे बड़ा संदेश सिर्फ यह नहीं है कि हजारों साल पहले इंसान सांप और छिपकली खाते थे। इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इंसान ने कठिन वातावरण में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करना बहुत पहले सीख लिया था।

जब भोजन के विकल्प सीमित होते हैं, तब किसी समुदाय का अस्तित्व इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने आसपास मौजूद चीजों का कितना प्रभावी इस्तेमाल कर सकता है।

नटुफियन लोगों के मामले में भी ऐसा ही दिखाई देता है। उन्होंने अपने इलाके में मौजूद कुछ सरीसृपों को भोजन के रूप में इस्तेमाल किया और खतरनाक प्रजातियों से संभवतः दूरी बनाए रखी।

15 हजार साल पुराना राज आज भी दे रहा है जवाब

अल-वाद टेरेस से मिले अवशेष इस बात की एक और झलक देते हैं कि आधुनिक सभ्यता से हजारों साल पहले इंसानी समुदाय कितने जटिल तरीके से अपने पर्यावरण के साथ तालमेल बैठा रहे थे।

आज हम सर्वाइवल के लिए आधुनिक तकनीक पर निर्भर हैं, लेकिन लगभग 15 हजार साल पहले इंसान के पास सिर्फ उसके अनुभव, स्थानीय ज्ञान और सीमित औजार थे। उसी ज्ञान के सहारे उसने भोजन जुटाया, खतरों से बचने की रणनीति बनाई और कठिन परिस्थितियों में अपनी बस्तियां कायम रखीं।

सांप और छिपकलियों की ये पुरानी हड्डियां इसलिए खास हैं, क्योंकि इनमें सिर्फ एक प्राचीन भोजन की कहानी नहीं छिपी है। इनके जरिए इंसानी इतिहास के उस दौर की तस्वीर सामने आती है, जब जीवित रहना ही सबसे बड़ी चुनौती था और प्रकृति को समझना ही इंसान का सबसे बड़ा हथियार।

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