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16 साल की बेटी के साथ हैवानियत का राज खुला तो कांप उठा रायपुर! पिता समेत 8 गिरफ्तार, नवजात को बेचने तक पहुंचा खौफनाक खेल



रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ उसके ही पिता ने कथित तौर पर लंबे समय तक दुष्कर्म किया। आरोप है कि इस दौरान पीड़िता दो बार गर्भवती हुई। पहली बार कथित तौर पर उसे जबरन गर्भपात की दवा खिलाई गई, जबकि दूसरी बार गर्भावस्था को छिपाने के लिए उसकी उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए। इसके बाद एक निजी अस्पताल में उसका प्रसव कराया गया और उसके नवजात बेटे को कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया। मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।

2023 में शुरू हुआ कथित अत्याचार

पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई। उस समय नाबालिग की मां अपने पति से अलग हो गई थी और तीनों बेटियों को पिता के पास छोड़ दिया था। पीड़िता तीन बहनों में सबसे बड़ी है।

शिकायत के मुताबिक, 38 वर्षीय पिता ने न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक रिश्तेदार के घर पर अपनी नाबालिग बेटी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया। आरोप है कि उसने बेटी को घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। डर और दबाव के कारण पीड़िता लंबे समय तक चुप रही।

पुलिस का कहना है कि इसके बाद भी कथित यौन शोषण जारी रहा और नाबालिग गर्भवती हो गई। जब उसने अपनी बुआ को गर्भावस्था के बारे में बताया तो बुआ ने कथित तौर पर यह बात उसके पिता को बता दी।

पहली गर्भावस्था में जबरन गर्भपात का आरोप

पुलिस के मुताबिक, गर्भावस्था की जानकारी मिलने के बाद आरोपी पिता ने कथित तौर पर बेटी के साथ मारपीट की। इसके बाद बुआ की मदद से गर्भपात की दवाएं मंगाई गईं और नाबालिग को कथित तौर पर जबरन दवा खिलाई गई।

पुलिस के अनुसार, इसके बाद उसका गर्भपात हो गया। आरोप है कि इस घटना के बावजूद पिता ने नाबालिग का कथित यौन शोषण बंद नहीं किया।

यह पूरा मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पीड़िता उस समय नाबालिग थी और आरोप उसके संरक्षक पिता पर ही लगा है। मामले में पुलिस ने दुष्कर्म और बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की है।

दूसरी बार गर्भवती होने पर रची गई कथित साजिश

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में पीड़िता दोबारा गर्भवती हो गई। इसके बाद उसकी गर्भावस्था और उम्र को छिपाने के लिए कथित तौर पर एक पूरी साजिश रची गई।

पुलिस जांच में सामने आया कि पिता पीड़िता को वर्षा मंडल नाम की एक नर्स के घर ले गया। इसके बाद वह गीता राय के घर पहुंची, जहां वह लगभग दो महीने तक रही।

पुलिस का आरोप है कि गीता राय ने नाबालिग की वास्तविक उम्र छिपाने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। उसे बालिग और विवाहित दिखाया गया और कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड के जरिए उसकी पहचान बदलने की कोशिश की गई।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे अस्पताल में कराया गया प्रसव

जांच के मुताबिक, नाबालिग को रायपुर के डंगनिया इलाके स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस का कहना है कि अस्पताल में उसे बालिग और शादीशुदा महिला के रूप में पेश किया गया था।

इसके बाद ऑपरेशन के जरिए उसने एक बेटे को जन्म दिया।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि अस्पताल में भर्ती और प्रसव की प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों पर भी मामले में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

नवजात को दूसरे व्यक्ति को बेचने का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू नवजात बच्चे से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, प्रसव के बाद बच्चा कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति को बेच दिया गया। जांच में अस्पताल से जुड़े लोगों, पीड़िता के पिता और अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।

कुछ रिपोर्टों में नवजात की कथित बिक्री की रकम ₹1.5 लाख बताई गई है, हालांकि इस संबंध में अंतिम तथ्य पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

बच्चे की बरामदगी को लेकर बाद की पुलिस कार्रवाई में यह जानकारी सामने आई कि नवजात को सकुशल बरामद कर लिया गया और उसकी सुरक्षा के लिए उसे रायपुर की मातृछाया संस्था में रखा गया।

करीब 15 दिन तक आरोपी महिला के घर रही पीड़िता

पुलिस के अनुसार, प्रसव के बाद नाबालिग लगभग 15 दिनों तक गीता राय के घर पर रही। इसके बाद उसका पिता उसे वापस अपने घर ले आया।

पीड़िता कथित तौर पर काफी डरी हुई थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि उससे कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे। मामले की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उन दस्तावेजों में क्या दर्ज था और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

सोशल मीडिया के जरिए मां तक पहुंची पीड़िता

कई वर्षों तक कथित अत्याचार सहने के बाद आखिरकार पीड़िता ने किसी तरह अपनी मां से सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क किया। उसने अपनी मां को कथित तौर पर पूरी घटना की जानकारी दी।

बेटी से जानकारी मिलने के बाद मां उसे लेकर पुलिस के पास पहुंची और 17 अगस्त 2026 को शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद न्यू राजेंद्र नगर थाने की पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

यहीं से मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं और पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कथित फर्जी दस्तावेजों, अस्पताल में भर्ती और नवजात बच्चे को दूसरे व्यक्ति को सौंपे जाने से जुड़े तथ्यों की जांच तेज कर दी।

आठ आरोपियों की गिरफ्तारी

पुलिस ने इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें पीड़िता का पिता, उसकी बुआ, अस्पताल से जुड़े साहेब मंडल, उनकी पत्नी वर्षा मंडल, रोहित कुमार राय, योगिता राय उर्फ गीता राय, एक अन्य महिला और नवजात को कथित तौर पर खरीदने वाला व्यक्ति शामिल हैं।

पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद गिरफ्तारियों का दायरा बढ़ा। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है।

POCSO और JJ Act के तहत कार्रवाई

न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के साथ-साथ POCSO Act और Juvenile Justice Act की संबंधित धाराएं भी लगाई हैं।

पुलिस के सामने अब कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—नाबालिग की उम्र से जुड़े फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, अस्पताल में उसकी पहचान की पुष्टि कैसे हुई, प्रसव की प्रक्रिया में किस-किस व्यक्ति की भूमिका थी और नवजात को कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति तक कैसे पहुंचाया गया।

इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।

रिश्तों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

यह मामला केवल एक परिवार के भीतर कथित अपराध तक सीमित नहीं है। इसमें एक नाबालिग की सुरक्षा, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, चिकित्सा व्यवस्था में पहचान सत्यापन और नवजात बच्चे को कथित तौर पर अवैध तरीके से दूसरे व्यक्ति को सौंपे जाने जैसे गंभीर मुद्दे जुड़े हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़िता ने लंबे समय तक भय के कारण अपनी आवाज नहीं उठा पाई। आखिरकार मां से संपर्क होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।

फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। चूंकि आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगी, इसलिए सभी आरोपियों को फिलहाल कानून की नजर में आरोपी ही माना जाएगा।

रायपुर की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि परिवार, समाज और संस्थागत व्यवस्था के बीच सबसे कमजोर स्थिति में मौजूद बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। मामले की आगे की जांच में यदि और तथ्य सामने आते हैं तो इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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