14 साल नौकरी करने के बाद एक झटके में सब खत्म! डिलीवरी करने पहुंचे शख्स की कहानी ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया
नोएडा: कभी एक प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट कंपनी के प्रशासन विभाग में वर्षों तक काम करने वाले 56 वर्षीय मनोज आज सड़कों पर डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम कर रहे हैं। उनकी कहानी केवल एक व्यक्ति के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि बदलते रोजगार बाजार, बढ़ती उम्र में नौकरी की चुनौतियों और कॉर्पोरेट सेक्टर में छंटनी (Layoff) के असर पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
यह कहानी तब सामने आई जब नोएडा में रहने वाले सोशल आंत्रप्रेन्योर किरण वर्मा ने एक जरूरी दस्तावेज भेजने के लिए डिलीवरी प्लेटफॉर्म पॉर्टर (Porter) के जरिए बुकिंग की। उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि यह एक सामान्य डिलीवरी नहीं, बल्कि जिंदगी के संघर्ष का ऐसा अध्याय होगा, जो लाखों लोगों को सोचने पर मजबूर कर देगा।
किरण वर्मा ने बाद में इस अनुभव को लिंक्डइन पर साझा किया। उनकी पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और हजारों लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने इसे कॉर्पोरेट दुनिया की कठोर वास्तविकता बताया, जबकि कई ने अनुभवी कर्मचारियों के लिए बेहतर रोजगार नीतियों की मांग की।
एक साधारण डिलीवरी से शुरू हुई असाधारण कहानी
किरण वर्मा ने अपने अनुभव में बताया कि उन्होंने एक जरूरी दस्तावेज भेजने के लिए पॉर्टर ऐप से डिलीवरी बुक की थी।
कुछ समय बाद डिलीवरी पार्टनर उनके घर पहुंचे। उन्होंने देखा कि डिलीवरी करने आए व्यक्ति को सीढ़ियां चढ़ने में थोड़ी कठिनाई हो रही थी। इसके बावजूद उनके चेहरे पर मुस्कान थी और वे पूरी विनम्रता के साथ अपना काम कर रहे थे।
बातचीत के दौरान उन्होंने सहज भाव से कहा कि उस दिन उन्हें ज्यादा काम नहीं मिल रहा था और वे नए ऑर्डर का इंतजार कर रहे थे।
यहीं से बातचीत आगे बढ़ी और उनकी जिंदगी का संघर्ष सामने आया।
14 वर्षों तक की कॉर्पोरेट नौकरी
बातचीत के दौरान मनोज ने बताया कि वे वर्ष 2023 तक टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस के प्रशासन विभाग में कार्यरत थे।
उनके अनुसार, उन्होंने लगभग 14 वर्षों तक कंपनी में अपनी सेवाएं दीं। लंबे समय तक जिम्मेदारी से काम करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वे अपने करियर को इसी तरह आगे बढ़ाएंगे।
लेकिन वर्ष 2023 में कंपनी में हुई छंटनी के दौरान उनकी नौकरी चली गई।
एक झटके में स्थायी रोजगार समाप्त हो गया और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गईं।
नौकरी गई तो शुरू हुआ संघर्ष
मनोज के अनुसार, नौकरी जाने के बाद उन्होंने कई कंपनियों में आवेदन किए।
उन्होंने अपने अनुभव और योग्यता के आधार पर दोबारा रोजगार पाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।
उन्होंने बताया कि बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण कई जगह उन्हें अवसर नहीं मिला।
कॉर्पोरेट क्षेत्र में आजकल युवा कर्मचारियों को प्राथमिकता मिलने और वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए सीमित अवसर होने की बात भी कई विशेषज्ञ समय-समय पर उठाते रहे हैं।
आखिरकार जब कोई स्थायी नौकरी नहीं मिली, तब उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के लिए डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम शुरू करने का फैसला किया।
"हम करी पत्ते की तरह हैं..."
बातचीत के दौरान मनोज ने एक ऐसी बात कही जिसने सोशल मीडिया पर हजारों लोगों को भावुक कर दिया।
उन्होंने कहा कि अनुभवी कर्मचारियों की स्थिति आज करी पत्ते जैसी हो गई है।
उनके शब्दों में—
"खाना बनाते समय करी पत्ते की जरूरत होती है, लेकिन खाना परोसते समय सबसे पहले उसी को निकालकर अलग कर दिया जाता है।"
उनके इस उदाहरण को लोगों ने कॉर्पोरेट सेक्टर में वरिष्ठ कर्मचारियों की स्थिति से जोड़कर देखा।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि वर्षों तक किसी संस्था को अपना अनुभव देने के बाद अचानक नौकरी खो देना केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद कठिन स्थिति होती है।
लिंक्डइन पोस्ट हुई वायरल
किरण वर्मा ने मनोज के साथ हुई बातचीत और उनके संघर्ष की कहानी लिंक्डइन पर साझा की।
कुछ ही समय में पोस्ट वायरल हो गई।
हजारों लोगों ने इसे पढ़ा और अपनी प्रतिक्रियाएं दीं।
कई पेशेवरों ने लिखा कि वे स्वयं भी ऐसी परिस्थितियों का सामना कर चुके हैं या अपने आसपास ऐसे लोगों को जानते हैं जिन्हें वर्षों की सेवा के बाद अचानक नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
कुछ लोगों ने कंपनियों से आग्रह किया कि वरिष्ठ कर्मचारियों के अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए और उनके लिए पुनर्नियोजन (Re-employment) या पुनः कौशल विकास (Reskilling) की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।
पॉर्टर ने भी दी प्रतिक्रिया
वायरल पोस्ट के बाद पॉर्टर की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई।
कंपनी ने अपने डिलीवरी पार्टनर की मेहनत और समर्पण की सराहना की।
हालांकि कंपनी ने मनोज के व्यक्तिगत रोजगार इतिहास पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन डिलीवरी पार्टनर्स के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्हें सम्मान देने की बात कही।
ले-ऑफ पर फिर शुरू हुई बहस
मनोज की कहानी ने एक बार फिर कॉर्पोरेट सेक्टर में होने वाली छंटनी को लेकर बहस तेज कर दी है।
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न उद्योगों, विशेषकर टेक और कॉर्पोरेट सेक्टर में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नौकरी चले जाने के बाद सबसे अधिक कठिनाई उन लोगों को होती है जो 50 वर्ष या उससे अधिक आयु के होते हैं।
ऐसे कर्मचारियों के पास अनुभव तो भरपूर होता है, लेकिन नई नौकरी पाने में उम्र, स्वास्थ्य या बदलती तकनीकी आवश्यकताएं बड़ी बाधा बन जाती हैं।
उम्र बढ़ने के साथ क्यों मुश्किल हो जाती है नौकरी?
मानव संसाधन (HR) विशेषज्ञों के अनुसार, वरिष्ठ कर्मचारियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
कई कंपनियां कम वेतन पर युवा कर्मचारियों को प्राथमिकता देती हैं।
दूसरी ओर तकनीक तेजी से बदल रही है, जिससे लगातार नए कौशल सीखने की आवश्यकता बढ़ गई है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अनुभव, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की योग्यता जैसी खूबियां वरिष्ठ कर्मचारियों की सबसे बड़ी ताकत होती हैं।
इसीलिए कई उद्योगों में अनुभवी कर्मचारियों के लिए विशेष पुनः कौशल प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रमों की मांग लगातार बढ़ रही है।
एक कहानी जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर किया
मनोज की कहानी केवल एक व्यक्ति की आर्थिक कठिनाई नहीं, बल्कि उन हजारों कर्मचारियों की स्थिति का प्रतीक बन गई है जो वर्षों तक किसी संस्था को अपना समय, अनुभव और मेहनत देने के बाद अचानक बेरोजगारी का सामना करते हैं।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि किसी भी काम में छोटा या बड़ा कुछ नहीं होता। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए ईमानदारी से किया गया हर काम सम्मान के योग्य है।
आज मनोज डिलीवरी पार्टनर के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन उनकी कहानी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या लंबे अनुभव वाले कर्मचारियों के लिए रोजगार व्यवस्था में और बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
उनकी संघर्षभरी यात्रा ने लाखों लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बदलते रोजगार बाजार में अनुभव और सम्मान के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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