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80 की उम्र, 16 घंटे की ड्यूटी और बीमार पत्नी... इस बुजुर्ग टैक्सी ड्राइवर की कहानी पढ़कर शायद आपकी आंखें भी नम हो जाएं

 


कोलकाता: बुढ़ापा आमतौर पर जीवन का वह पड़ाव माना जाता है, जब इंसान अपने परिवार के साथ सुकून के कुछ पल बिताना चाहता है। लेकिन हर किसी की किस्मत एक जैसी नहीं होती। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों को भावुक कर दिया है।

करीब 80 वर्षीय रवींद्रनाथ सरकार आज भी रोज सुबह अपनी टैक्सी लेकर सड़कों पर निकलते हैं। उम्र के इस पड़ाव पर जहां अधिकांश लोग आराम की उम्मीद करते हैं, वहीं रवींद्रनाथ सरकार लगभग 16 घंटे तक टैक्सी चलाकर अपने परिवार का खर्च उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका सबसे बड़ा उद्देश्य है—अपनी 67 वर्षीय बीमार पत्नी की दवाइयों और घर का खर्च किसी तरह पूरा करना।

उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग न केवल उनकी मेहनत को सलाम कर रहे हैं, बल्कि सरकार से बुजुर्गों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा और पेंशन व्यवस्था की भी मांग कर रहे हैं।

एक वीडियो जिसने लाखों लोगों को भावुक कर दिया

रवींद्रनाथ सरकार की कहानी सोशल मीडिया पर तब सामने आई, जब इंस्टाग्राम पर चैताली बोस नाम की एक यूजर ने उनका वीडियो साझा किया।

वीडियो में दिखाई गई उनकी जीवन यात्रा ने हजारों लोगों का दिल छू लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग लगातार इसे साझा करने लगे।

वीडियो में बताया गया कि रवींद्रनाथ सरकार पिछले कई दशकों से कोलकाता की पहचान बन चुकी पीली टैक्सी चलाते आ रहे हैं।

52 वर्षों से थाम रखा है टैक्सी का स्टीयरिंग

बताया गया है कि रवींद्रनाथ सरकार पिछले लगभग 52 वर्षों से टैक्सी चालक के रूप में काम कर रहे हैं।

समय बदला, शहर बदला, सड़कों पर गाड़ियों की संख्या बढ़ी, लेकिन उनका संघर्ष नहीं बदला।

आज भी वे हर सुबह लगभग 6 बजे घर से निकलते हैं और रात करीब 11 बजे तक टैक्सी चलाते हैं।

यानी उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका कार्यदिवस लगभग 16 घंटे लंबा होता है।

टैक्सी भी अपनी नहीं, किराए पर चलाते हैं

इस कहानी का सबसे भावुक पहलू यह है कि जिस टैक्सी को चलाकर वे अपना जीवन यापन करते हैं, वह भी उनकी अपनी नहीं है।

बताया गया है कि वे किराए की टैक्सी चलाते हैं।

इसका मतलब यह है कि यदि किसी दिन उन्हें पर्याप्त सवारी नहीं मिलती या कमाई बहुत कम होती है, तब भी उन्हें टैक्सी का तय दैनिक किराया मालिक को देना पड़ता है।

यानी कमाई हो या न हो, खर्च तय रहता है।

ऐसी स्थिति में रोज की कमाई से ही घर का राशन, दवाइयां और अन्य आवश्यक खर्च पूरे करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

बीमार पत्नी की दवाइयों के लिए जारी है संघर्ष

रवींद्रनाथ सरकार की पत्नी की उम्र करीब 67 वर्ष बताई गई है।

जानकारी के अनुसार वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही हैं।

ऐसे में उनकी नियमित दवाइयों और इलाज का खर्च भी परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता है।

बताया गया है कि दंपति की कोई संतान नहीं है, जो इस उम्र में उनका सहारा बन सके।

इसी कारण दोनों अपने संघर्ष का सामना स्वयं कर रहे हैं।

बारिश में टपकती है घर की छत

उनकी आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वे कोलकाता के दम दम इलाके में रेलवे ट्रैक के पास स्थित एक छोटे से टीन की छत वाले घर में रहते हैं।

मानसून के दौरान भारी बारिश होने पर घर की छत से पानी टपकने लगता है।

बताया गया है कि कई बार बारिश का पानी घर के अंदर तक भर जाता है।

लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे अपने घर की मरम्मत भी नहीं करवा पा रहे हैं।

ईमानदारी आज भी नहीं छोड़ी

वीडियो साझा करने वाली चैताली बोस ने एक और बात का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद रवींद्रनाथ सरकार कभी भी यात्रियों से अतिरिक्त किराया नहीं मांगते।

वे मीटर के अनुसार या जितना उचित किराया बनता है, उतना ही लेते हैं।

यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग उनकी ईमानदारी की भी जमकर सराहना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की मदद की अपील

वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने भावुक प्रतिक्रियाएं दीं।

कई लोगों ने कहा कि जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी मेहनत और ईमानदारी से काम किया, उसे बुढ़ापे में इतनी कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करना चाहिए।

कुछ लोगों ने लिखा कि ऐसे लोगों की मदद करना दान नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है।

कई यूजर्स ने स्थानीय लोगों से अपील की कि यदि संभव हो तो उनकी टैक्सी में यात्रा करें या किसी अन्य तरीके से उनकी सहायता करें।

पेंशन व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस वायरल कहानी के बाद कई लोगों ने बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी सवाल उठाए।

कुछ लोगों का कहना था कि सरकार को ऐसे बुजुर्ग नागरिकों के लिए वृद्धावस्था पेंशन को और प्रभावी बनाना चाहिए।

हालांकि सोशल मीडिया पर व्यक्त किए गए ये विचार संबंधित यूजर्स की व्यक्तिगत राय हैं।

सरकारी नीतियों में बदलाव से जुड़ा कोई आधिकारिक निर्णय इस मामले से संबंधित नहीं है।

सम्मानजनक जीवन की जरूरत

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में ऐसे वरिष्ठ नागरिक हैं जो बढ़ती उम्र के बावजूद आर्थिक मजबूरी के कारण काम करने के लिए विवश हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जितनी मजबूत होंगी, उतना ही उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी।

वायरल वीडियो के बाद बढ़ी उम्मीद

रवींद्रनाथ सरकार की कहानी ने लोगों को यह एहसास कराया है कि संघर्ष केवल युवावस्था तक सीमित नहीं होता।

कई बार जीवन के सबसे कठिन दिन उसी उम्र में आते हैं, जब शरीर भी साथ देना कम कर देता है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर लोग उनके लिए मदद की अपील कर रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें कितनी आर्थिक सहायता मिली है।

फिर भी उनकी कहानी ने लाखों लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मेहनत, ईमानदारी और आत्मसम्मान की कोई उम्र नहीं होती।

आज जब अधिकांश लोग सुविधा और आराम की तलाश में रहते हैं, तब 80 वर्षीय रवींद्रनाथ सरकार अपनी बीमार पत्नी के इलाज और घर का खर्च चलाने के लिए हर दिन स्टीयरिंग थामते हैं। उनका संघर्ष केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उन हजारों बुजुर्गों की आवाज भी है जो उम्र के अंतिम पड़ाव में भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।

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