यह बीमारी चुपचाप शरीर को अंदर से खत्म करती रहती है, पता तब चलता है जब बहुत देर हो चुकी होती है!
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत पर पहले जितना ध्यान नहीं दे पाते। लंबे समय तक बैठकर काम करना, अनियमित खानपान, जंक फूड, तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी कई गंभीर बीमारियों को जन्म दे रही है। इनमें से एक ऐसी बीमारी है फैटी लिवर (Fatty Liver Disease), जिसे डॉक्टर अक्सर "साइलेंट किलर" भी कहते हैं। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। जब तक मरीज को परेशानी महसूस होती है, तब तक कई मामलों में लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है।
आखिर क्या है फैटी लिवर?
फैटी लिवर वह स्थिति है, जब लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक वसा (फैट) जमा होने लगती है। यदि यह फैट लगातार बढ़ता रहता है, तो लिवर में सूजन आ सकती है और धीरे-धीरे उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस और कुछ मामलों में लिवर कैंसर तक का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि लिवर में 5 से 10 प्रतिशत से अधिक फैट जमा हो जाए, तो उसे फैटी लिवर माना जाता है।
क्यों कहा जाता है इसे 'साइलेंट किलर'?
फैटी लिवर की सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती वर्षों तक मरीज को कोई खास तकलीफ महसूस नहीं होती। अधिकांश लोगों को इस बीमारी का पता तब चलता है, जब किसी अन्य कारण से अल्ट्रासाउंड या ब्लड टेस्ट कराया जाता है।
कई बार मरीज सामान्य जीवन जीता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर लिवर लगातार कमजोर होता रहता है। यही कारण है कि डॉक्टर नियमित स्वास्थ्य जांच की सलाह देते हैं।
किन लोगों में अधिक होता है खतरा?
हाल के वर्षों में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले इसे केवल अधिक शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब बिना शराब पीने वाले लोगों में भी यह तेजी से फैल रही है।
इन लोगों में खतरा अधिक रहता है—
मोटापे से ग्रस्त लोग।
डायबिटीज के मरीज।
हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग।
हाई ब्लड प्रेशर के मरीज।
लंबे समय तक बैठे रहने वाले लोग।
फास्ट फूड और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने वाले।
नियमित व्यायाम न करने वाले।
आनुवंशिक कारणों वाले लोग।
शरीर कब देता है संकेत?
हालांकि शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं।
लगातार थकान महसूस होना।
पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में भारीपन।
भूख कम लगना।
वजन तेजी से बढ़ना या घटना।
कमजोरी महसूस होना।
त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (गंभीर स्थिति में)।
पैरों में सूजन आना।
पेट फूलना।
यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
क्यों खराब होने लगता है लिवर?
लिवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने, शरीर से विषैले पदार्थ निकालने और कई जरूरी प्रोटीन बनाने का काम करता है।
जब शरीर में अत्यधिक कैलोरी, चीनी और फैट जमा होने लगता है, तो उसका असर लिवर पर पड़ता है। धीरे-धीरे लिवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने लगता है। यदि इस स्थिति पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया जाए, तो सूजन और स्थायी क्षति हो सकती है।
क्या फैटी लिवर पूरी तरह ठीक हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में यदि जीवनशैली में बदलाव किया जाए, तो फैटी लिवर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कई मामलों में लिवर सामान्य स्थिति में भी लौट सकता है।
हालांकि यदि बीमारी सिरोसिस तक पहुंच जाए, तो नुकसान को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल हो सकता है।
कैसे होती है पहचान?
डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार विभिन्न जांच कराने की सलाह दे सकते हैं—
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
अल्ट्रासाउंड
फाइब्रोस्कैन
सीटी स्कैन या एमआरआई (कुछ मामलों में)
आवश्यकता पड़ने पर लिवर बायोप्सी
इन जांचों से यह पता लगाया जा सकता है कि लिवर में कितना फैट जमा है और उसकी कार्यक्षमता कितनी प्रभावित हुई है।
बचाव के आसान उपाय
फैटी लिवर से बचने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव बेहद प्रभावी माने जाते हैं।
रोजाना कम से कम 30–45 मिनट व्यायाम करें।
वजन नियंत्रित रखें।
मीठे पेय पदार्थ और अत्यधिक चीनी से बचें।
तली-भुनी चीजों का सेवन कम करें।
हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज को भोजन में शामिल करें।
पर्याप्त पानी पिएं।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा लंबे समय तक न लें।
क्या युवाओं में भी बढ़ रहा है खतरा?
पहले यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के युवाओं और किशोरों में भी फैटी लिवर के मामले बढ़ रहे हैं। इसका प्रमुख कारण मोटापा, स्क्रीन टाइम बढ़ना, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और असंतुलित खानपान माना जा रहा है।
किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
यदि लगातार थकान, पेट में भारीपन, अचानक वजन बढ़ना, डायबिटीज के साथ लिवर एंजाइम बढ़ना या अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर की पुष्टि हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना भविष्य की गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।
फैटी लिवर ऐसी बीमारी है जो अक्सर बिना किसी शोर-शराबे के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती है। यही वजह है कि इसे "साइलेंट" बीमारी कहा जाता है। अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच के जरिए इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यदि शरीर लंबे समय तक असामान्य संकेत दे रहा हो, तो स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

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