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चुपचाप लिवर को खत्म कर रही है यह खतरनाक बीमारी! जब तक पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है...



हाइलाइट्स

  • हेपेटाइटिस (Hepatitis) एक गंभीर लिवर रोग है जो लंबे समय तक बिना लक्षण के रह सकता है।

  • हेपेटाइटिस B और C संक्रमण से लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

  • समय पर जांच और टीकाकरण से इस बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है।

  • दूषित रक्त, असुरक्षित सुई और असुरक्षित यौन संबंध संक्रमण के प्रमुख कारण हैं।

  • डॉक्टरों के अनुसार शुरुआती जांच और सही इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

हेपेटाइटिस क्या है?

हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें लिवर (यकृत) में सूजन आ जाती है। यह सूजन वायरस, शराब का अत्यधिक सेवन, कुछ दवाइयों के दुष्प्रभाव या ऑटोइम्यून रोगों के कारण हो सकती है। सबसे अधिक चिंता हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C को लेकर होती है क्योंकि ये लंबे समय तक शरीर में रहकर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लाखों लोग इस बीमारी से संक्रमित हैं, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं।

हेपेटाइटिस के प्रकार

हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है।

1. हेपेटाइटिस A

यह दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। अधिकांश मामलों में यह कुछ समय बाद ठीक हो जाता है।

2. हेपेटाइटिस B

यह संक्रमित रक्त, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई तथा गर्भवती मां से बच्चे में फैल सकता है। इसके लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध है।

3. हेपेटाइटिस C

यह मुख्य रूप से संक्रमित रक्त के संपर्क से फैलता है। कई मामलों में यह वर्षों तक बिना लक्षण के रहता है और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाता है।

4. हेपेटाइटिस D

यह केवल उन्हीं लोगों में होता है जो पहले से हेपेटाइटिस B से संक्रमित होते हैं।

5. हेपेटाइटिस E

यह भी दूषित पानी से फैलता है और गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक खतरनाक माना जाता है।

हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षण

शुरुआत में कई मरीजों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। जब बीमारी बढ़ने लगती है, तब निम्न समस्याएं हो सकती हैं—

  • लगातार थकान

  • भूख कम लगना

  • उल्टी या मतली

  • बुखार

  • पेट के दाहिने हिस्से में दर्द

  • आंखों और त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)

  • गहरे रंग का पेशाब

  • शरीर में कमजोरी

  • वजन कम होना

यदि इनमें से कोई लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

बीमारी कैसे फैलती है?

हेपेटाइटिस B और C के फैलने के प्रमुख कारण हैं—

  • संक्रमित रक्त चढ़ाना

  • संक्रमित सुई या सिरिंज का उपयोग

  • असुरक्षित यौन संबंध

  • संक्रमित उपकरणों से टैटू या पियर्सिंग करवाना

  • संक्रमित मां से नवजात शिशु में संक्रमण

  • संक्रमित व्यक्ति के रक्त के सीधे संपर्क में आना

ध्यान रहे कि हेपेटाइटिस B और C सामान्य रूप से साथ बैठने, हाथ मिलाने या खाना साझा करने से नहीं फैलते।

किन लोगों को अधिक खतरा है?

इन लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है—

  • स्वास्थ्यकर्मी

  • डायलिसिस कराने वाले मरीज

  • इंजेक्शन द्वारा नशीले पदार्थ लेने वाले लोग

  • बार-बार रक्त चढ़वाने वाले मरीज

  • असुरक्षित यौन संबंध रखने वाले लोग

  • संक्रमित व्यक्ति के परिवार के सदस्य

हेपेटाइटिस की जांच कैसे होती है?

डॉक्टर निम्न जांच कराने की सलाह दे सकते हैं—

  • लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)

  • HBsAg टेस्ट

  • Anti-HCV टेस्ट

  • HBV DNA या HCV RNA टेस्ट

  • अल्ट्रासाउंड

  • फाइब्रोस्कैन

  • आवश्यकता पड़ने पर लिवर बायोप्सी

समय पर जांच से बीमारी का पता शुरुआती अवस्था में चल सकता है और इलाज अधिक प्रभावी हो जाता है।

इलाज क्या है?

हेपेटाइटिस का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है।

  • हेपेटाइटिस A और E में अधिकतर आराम, पौष्टिक भोजन और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जाती है।

  • हेपेटाइटिस B के लिए एंटीवायरल दवाइयां दी जा सकती हैं।

  • हेपेटाइटिस C का आधुनिक दवाओं से कई मामलों में सफल उपचार संभव है।

  • गंभीर मामलों में यदि लिवर पूरी तरह खराब हो जाए, तो लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है।

इलाज हमेशा विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह से ही लेना चाहिए।

बचाव कैसे करें?

हेपेटाइटिस से बचने के लिए ये उपाय अपनाएं—

  • हेपेटाइटिस B का टीका अवश्य लगवाएं।

  • केवल सुरक्षित और जांचा हुआ रक्त ही चढ़वाएं।

  • हमेशा नई और स्टरलाइज्ड सुई का उपयोग करें।

  • असुरक्षित यौन संबंध से बचें।

  • साफ और उबला हुआ पानी पिएं।

  • हाथों की नियमित सफाई करें।

  • टैटू या पियर्सिंग केवल लाइसेंस प्राप्त केंद्र से ही करवाएं।

  • शराब का अत्यधिक सेवन न करें।

  • संतुलित आहार और नियमित व्यायाम अपनाएं।

समय पर पहचान क्यों जरूरी है?

हेपेटाइटिस B और C कई वर्षों तक बिना किसी लक्षण के शरीर में रह सकते हैं। इस दौरान लिवर धीरे-धीरे खराब होता रहता है। जब मरीज को बीमारी का पता चलता है, तब तक कई बार सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति बन चुकी होती है।

इसी कारण डॉक्टर जोखिम वाले लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह देते हैं।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को बार-बार कमजोरी, पीलिया, भूख की कमी या लिवर से संबंधित समस्या महसूस हो रही है, तो बिना देरी किए जांच करानी चाहिए। साथ ही हेपेटाइटिस B का टीकाकरण प्रत्येक नवजात और जोखिम वाले वयस्कों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जो लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में रहकर लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि समय पर जांच, टीकाकरण, सुरक्षित जीवनशैली और सही इलाज से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य जोखिम वाले समूह में आता है, तो नियमित जांच अवश्य कराएं। जागरूकता ही इस गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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