डायबिटीज़ होने से पहले शरीर देता है ये 7 खामोश संकेत... आखिरी वाला जानकर तुरंत कराएंगे टेस्ट!
डायबिटीज़ (मधुमेह) आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक बन चुकी है। भारत में करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें यह तक पता नहीं होता कि उनका ब्लड शुगर सामान्य से अधिक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज़ अचानक नहीं होती, बल्कि शरीर पहले ही कई छोटे-छोटे संकेत देना शुरू कर देता है। समस्या यह है कि अधिकांश लोग इन संकेतों को सामान्य थकान, मौसम का असर या बढ़ती उम्र की परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए और ब्लड शुगर की जांच करा ली जाए, तो बीमारी का जल्द पता लग सकता है और जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डायबिटीज़ क्यों है "साइलेंट" बीमारी?
डॉक्टर डायबिटीज़ को कई बार "साइलेंट डिजीज" कहते हैं क्योंकि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं। कई मरीज वर्षों तक बिना किसी स्पष्ट परेशानी के इस बीमारी के साथ जीते रहते हैं। इस दौरान बढ़ा हुआ ब्लड शुगर शरीर के विभिन्न अंगों जैसे आंखों, किडनी, नसों और हृदय को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है।
इसी वजह से विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम वाले लोगों में समय-समय पर ब्लड शुगर टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
1. बार-बार प्यास लगना
यदि बिना किसी विशेष कारण के आपको बार-बार प्यास लग रही है और सामान्य से अधिक पानी पीने की इच्छा हो रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
जब रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाता है, तो शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। इससे शरीर में पानी की कमी होने लगती है और बार-बार प्यास महसूस होती है।
2. बार-बार पेशाब आना
रात में कई बार उठकर पेशाब जाना या दिनभर सामान्य से अधिक बार पेशाब आना भी डायबिटीज़ का शुरुआती संकेत हो सकता है।
हालांकि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल इसी लक्षण के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा।
3. बिना वजह थकान महसूस होना
पर्याप्त आराम करने के बावजूद यदि लगातार कमजोरी या थकान महसूस हो रही है, तो इसकी जांच करानी चाहिए।
डायबिटीज़ में शरीर ग्लूकोज का सही ढंग से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे कोशिकाओं को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती और व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस कर सकता है।
4. धुंधला दिखाई देना
यदि अचानक नजर धुंधली होने लगे या पढ़ने-लिखने में कठिनाई महसूस होने लगे, तो इसे केवल आंखों की कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ब्लड शुगर बढ़ने पर आंखों के लेंस में अस्थायी बदलाव आ सकते हैं, जिससे देखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज़ आंखों की गंभीर समस्याओं का कारण भी बन सकती है।
5. घाव का देर से भरना
यदि शरीर पर लगी छोटी चोट या घाव सामान्य से अधिक समय तक ठीक नहीं हो रहा, तो यह भी डायबिटीज़ का संकेत हो सकता है।
उच्च ब्लड शुगर शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता और घाव भरने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
6. हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
हाथों या पैरों में बार-बार झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होना नसों पर बढ़े हुए ब्लड शुगर के प्रभाव का संकेत हो सकता है।
यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए।
7. अचानक वजन घटना
यदि खानपान सामान्य होने के बावजूद तेजी से वजन कम होने लगे, तो यह भी एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
जब शरीर ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाता, तो वह ऊर्जा के लिए वसा और मांसपेशियों का उपयोग करने लगता है, जिससे वजन घट सकता है।
किन लोगों को अधिक खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित लोगों में डायबिटीज़ का खतरा अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है—
परिवार में किसी को डायबिटीज़ होना।
मोटापा या अधिक वजन।
शारीरिक गतिविधि की कमी।
उच्च रक्तचाप।
असंतुलित भोजन।
बढ़ती उम्र।
गर्भावस्था के दौरान गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) का इतिहास।
ऐसे लोगों को नियमित जांच कराने की सलाह दी जाती है।
बचाव कैसे करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि जीवनशैली में कुछ बदलाव अपनाकर डायबिटीज़ के जोखिम को कम किया जा सकता है।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
नियमित व्यायाम या तेज चाल से कम से कम 30 मिनट पैदल चलें।
मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करें।
पर्याप्त नींद लें।
तनाव को नियंत्रित रखने का प्रयास करें।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
कब कराएं ब्लड शुगर टेस्ट?
यदि ऊपर बताए गए लक्षण लगातार दिखाई दें या आप जोखिम वाले समूह में आते हों, तो डॉक्टर की सलाह लेकर फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्टप्रांडियल ब्लड शुगर या HbA1c जैसी जांच कराई जा सकती है।
जांच की आवश्यकता व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जोखिम कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
डायबिटीज़ अक्सर धीरे-धीरे विकसित होने वाली बीमारी है, लेकिन शरीर इसके संकेत पहले ही देना शुरू कर सकता है। बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, लगातार थकान, धुंधला दिखाई देना, घाव का देर से भरना, हाथ-पैरों में झुनझुनी और बिना वजह वजन कम होना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि, ये लक्षण केवल डायबिटीज़ में ही नहीं, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी हो सकते हैं। इसलिए यदि ऐसी परेशानी लगातार बनी रहे, तो जल्द से जल्द योग्य चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा।

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