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चारू के बाद अब प्रीत... यूपी में खुले नाले फिर बने काल, 6 साल का दिव्यांग बच्चा देखते ही देखते बह गया



उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच खुले नाले एक बार फिर जानलेवा साबित हो रहे हैं। अभी बुलंदशहर में 10 वर्षीय चारू के नाले में बह जाने की घटना से प्रदेश उबर भी नहीं पाया था कि बरेली जिले से एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आ गई। यहां छह साल का दिव्यांग मासूम प्रीत खुले नाले में गिरकर तेज बहाव में लापता हो गया। घटना ने एक बार फिर नगर पालिका की लापरवाही और बरसात के मौसम में सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि मासूम प्रीत वॉकर के सहारे चलकर घर लौट रहा था। रास्ते में अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह करीब 10 फीट गहरे खुले नाले में जा गिरा। तेज पानी के बहाव के कारण वह देखते ही देखते आंखों से ओझल हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

घर लौटते वक्त हुआ दर्दनाक हादसा

यह दर्दनाक घटना बरेली जिले के आंवला कस्बे के खेड़ा मोहल्ले की है। यहां रहने वाले नंदराम का छह वर्षीय बेटा प्रीत दिव्यांग है और चलने के लिए वॉकर का सहारा लेता है।

जानकारी के अनुसार, प्रीत घर से कुछ दूरी पर स्थित दुकान पर खाने-पीने का सामान लेने गया था। सामान लेकर जब वह वापस घर लौट रहा था, तभी हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। बारिश तेज होने की आशंका से वह जल्दी-जल्दी घर पहुंचने की कोशिश कर रहा था।

इसी दौरान रास्ते में खुले पड़े नाले के पास उसका संतुलन बिगड़ गया। वॉकर फिसलने से वह सीधे गहरे नाले में जा गिरा। बताया जा रहा है कि जिस नाले में वह गिरा उसकी गहराई लगभग 10 फीट है और बारिश के कारण उसमें पानी का बहाव काफी तेज था।

बच्चों ने देखा हादसा, लेकिन बचाने का नहीं मिला मौका

घटना के समय आसपास से गुजर रहे कुछ बच्चों ने प्रीत को नाले में गिरते हुए देखा। बच्चों ने तुरंत शोर मचाया और आसपास मौजूद लोगों को बुलाया।

स्थानीय लोग मौके पर दौड़कर पहुंचे, लेकिन तब तक तेज बहाव मासूम को काफी दूर बहाकर ले जा चुका था। लोगों ने अपने स्तर पर काफी देर तक उसकी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

कुछ ही देर में सूचना परिवार तक पहुंची। परिजन घटनास्थल पर पहुंचे तो उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे मोहल्ले में मातम जैसा माहौल बन गया।

पुलिस और प्रशासन ने शुरू कराया सर्च ऑपरेशन

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस और प्रशासन ने आसपास के क्षेत्र में तलाश अभियान शुरू कराया, लेकिन देर शाम तक बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल सका।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीम को बुलाया। एसडीआरएफ के जवानों ने मौके पर पहुंचकर नाले और आसपास के क्षेत्रों में गहन खोज अभियान शुरू कर दिया।

टीम लगातार पानी के तेज बहाव वाले हिस्सों में तलाश कर रही है ताकि मासूम का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।

नगर पालिका की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बरसात से पहले नालों की सफाई के लिए नगर पालिका ने कई जगह नालों के ढक्कन और स्लैब हटाए थे।

सफाई का काम पूरा होने के बाद भी कई स्थानों पर नाले खुले छोड़ दिए गए। न तो वहां किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई और न ही लोगों को सावधान करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए।

इसी लापरवाही का खामियाजा आज छह साल के दिव्यांग मासूम को भुगतना पड़ा।

लोगों का कहना है कि यदि खुले नालों को समय रहते ढक दिया जाता या सुरक्षा के उचित इंतजाम किए जाते, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

बुलंदशहर की घटना के बाद भी नहीं चेता प्रशासन

गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले ही बुलंदशहर जिले से भी ऐसी ही दर्दनाक घटना सामने आई थी।

वहां 10 वर्षीय चारू बारिश के दौरान खुले नाले में गिरकर बह गई थी। कई घंटे बीत जाने के बाद भी चारू का कोई पता नहीं चल सका था।

अब बरेली में हुई यह दूसरी घटना प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। लगातार हो रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बरसात के मौसम में खुले नालों को लेकर पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती जा रही।

दिव्यांग बच्चों के लिए और भी बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि दिव्यांग बच्चों के लिए खुले नाले और गड्ढे सामान्य बच्चों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक होते हैं।

जो बच्चे वॉकर, बैसाखी या व्हीलचेयर के सहारे चलते हैं, उनके लिए रास्ते में मौजूद छोटे-छोटे अवरोध भी जानलेवा बन सकते हैं। ऐसे में स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि सार्वजनिक स्थान पूरी तरह सुरक्षित हों।

स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश

घटना के बाद स्थानीय लोगों में नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिली।

लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के दौरान नालों की सफाई तो कराई जाती है, लेकिन उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।

कई मोहल्लों में खुले नाले दिनों तक खुले रहते हैं और प्रशासन केवल हादसे होने के बाद सक्रिय दिखाई देता है।

स्थानीय नागरिकों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

क्या होगी जिम्मेदारी तय?

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि नगर पालिका ने सफाई के लिए नाले खोले थे, तो उनकी निगरानी कौन कर रहा था?

क्या वहां चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे?

क्या लोगों की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई थी?

क्या सफाई पूरी होने के बाद नालों को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए गए थे?

इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं।

परिवार की उम्मीद अब भी तलाश पर टिकी

मासूम प्रीत के परिजन अभी भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि एसडीआरएफ की टीम उसे जल्द खोज निकालेगी। हालांकि समय बीतने के साथ चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

घर में मातम पसरा हुआ है और हर किसी की नजरें तलाश अभियान पर टिकी हैं।

बुलंदशहर में चारू और अब बरेली में प्रीत के साथ हुई घटनाएं केवल दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल हैं। बरसात के मौसम में खुले नाले, टूटी सड़कें और बिना सुरक्षा के छोड़े गए निर्माण कार्य आम लोगों, खासकर बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं।

यदि स्थानीय निकाय समय रहते नालों को सुरक्षित ढंग से बंद करते, चेतावनी संकेत लगाते और निगरानी सुनिश्चित करते, तो शायद एक और परिवार अपने मासूम की तलाश में दर-दर भटकने को मजबूर न होता। अब सभी की निगाहें एसडीआरएफ के सर्च ऑपरेशन पर हैं और लोग यही दुआ कर रहे हैं कि मासूम प्रीत का जल्द से जल्द पता चल सके।

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