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डॉक्टरों की नई चेतावनी! डेंगू के ये बदलते लक्षण पड़ सकते हैं भारी, तुरंत हो जाएं सतर्क


 

नई दिल्ली। मानसून का मौसम अपने साथ ठंडक और राहत तो लाता है, लेकिन इसी मौसम में कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। इनमें सबसे बड़ी चिंता डेंगू को लेकर है। देश के कई राज्यों में बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने से डेंगू के मामले सामने आने लगे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार कई मरीजों में डेंगू के लक्षण पहले की तुलना में अलग और हल्के दिखाई दे रहे हैं, जिसके कारण लोग समय पर जांच नहीं करवा रहे और बीमारी गंभीर रूप ले रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज किया गया तो मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। इसलिए मानसून के दौरान सतर्क रहना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।

क्या है डेंगू?

डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय काटता है और साफ पानी में पनपता है। घरों के आसपास रखी पानी की टंकियां, गमले, कूलर, पुराने टायर, प्लास्टिक के डिब्बे और अन्य बर्तनों में जमा पानी इसके प्रजनन का प्रमुख स्थान बनते हैं।

डेंगू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर वायरस को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाता है।

इस बार क्यों बढ़ रही है चिंता?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार कई मरीजों में डेंगू के पारंपरिक लक्षणों के साथ-साथ कुछ ऐसे संकेत भी देखने को मिल रहे हैं जिन्हें लोग सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

कई मरीजों में शुरुआत में तेज बुखार नहीं आता, बल्कि हल्का बुखार, अत्यधिक थकान, शरीर में कमजोरी और लगातार सिरदर्द जैसी शिकायतें होती हैं। ऐसे मामलों में लोग घरेलू इलाज करते रहते हैं और अस्पताल देर से पहुंचते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि बीमारी की गंभीरता केवल बुखार की तीव्रता से नहीं आंकी जा सकती। कई बार हल्के लक्षण भी गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकते हैं।

डेंगू के सामान्य लक्षण

डेंगू होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • तेज या लगातार बुखार

  • सिरदर्द

  • आंखों के पीछे दर्द

  • मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द

  • अत्यधिक कमजोरी

  • मतली या उल्टी

  • भूख कम लगना

  • त्वचा पर लाल चकत्ते

  • प्लेटलेट्स की संख्या में गिरावट

हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।

खतरनाक संकेत जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज न करें

विशेषज्ञों के अनुसार यदि मरीज में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए—

  • लगातार उल्टी होना

  • पेट में तेज दर्द

  • सांस लेने में कठिनाई

  • नाक या मसूड़ों से खून आना

  • पेशाब कम होना

  • अत्यधिक सुस्ती या बेहोशी

  • प्लेटलेट्स तेजी से कम होना

ये संकेत गंभीर डेंगू (Severe Dengue) की ओर इशारा कर सकते हैं।

क्या हर मरीज में प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं?

डेंगू का नाम आते ही लोग सबसे पहले प्लेटलेट्स की चिंता करने लगते हैं।

हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि हर मरीज में प्लेटलेट्स खतरनाक स्तर तक नहीं गिरते। केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।

यदि मरीज की प्लेटलेट्स कम हैं लेकिन ब्लीडिंग नहीं हो रही और डॉक्टर लगातार निगरानी कर रहे हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं होती।

डेंगू से बचाव कैसे करें?

डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है।

इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं—

  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें।

  • कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें।

  • पानी की टंकियों को ढककर रखें।

  • पुराने टायर, गमले और डिब्बों में पानी जमा न होने दें।

  • पूरी बाजू के कपड़े पहनें।

  • मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें।

  • सुबह और शाम के समय विशेष सावधानी बरतें।

क्या डेंगू में पपीते के पत्ते का रस जरूरी है?

डेंगू के दौरान पपीते के पत्ते का रस, गिलोय और अन्य घरेलू नुस्खों को लेकर कई दावे किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन उपायों के लाभ को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इन्हें डॉक्टर द्वारा बताए गए इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

सबसे जरूरी है—

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीना।

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेना।

  • समय-समय पर जांच कराना।

  • जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती होना।

डेंगू होने पर क्या खाएं?

डॉक्टर मरीजों को हल्का और पौष्टिक भोजन लेने की सलाह देते हैं।

इन चीजों का सेवन लाभदायक माना जाता है—

  • नारियल पानी

  • ओआरएस

  • सादा पानी

  • ताजे फल

  • दाल

  • खिचड़ी

  • हरी सब्जियां

  • प्रोटीन युक्त भोजन

शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना बेहद जरूरी है।

किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है?

कुछ लोगों में डेंगू गंभीर रूप ले सकता है—

  • छोटे बच्चे

  • बुजुर्ग

  • गर्भवती महिलाएं

  • डायबिटीज के मरीज

  • हृदय रोग से पीड़ित लोग

  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले मरीज

इन लोगों को शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

क्या एंटीबायोटिक से ठीक हो जाता है डेंगू?

डेंगू वायरस से होने वाली बीमारी है।

इसलिए एंटीबायोटिक दवाएं डेंगू का इलाज नहीं करतीं। यदि बैक्टीरिया का कोई अलग संक्रमण न हो तो एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती।

डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार करते हैं और शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने पर विशेष ध्यान देते हैं।

बारिश के मौसम में क्यों बढ़ जाता है संक्रमण?

मानसून के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से एडीज मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है।

यदि सप्ताह में केवल एक बार भी घर और आसपास जमा पानी की सफाई कर दी जाए तो मच्छरों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसलिए केवल सरकारी प्रयास ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है।

डेंगू एक ऐसी बीमारी है जिसे थोड़ी-सी सावधानी और समय पर इलाज से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हल्के बुखार, लगातार थकान, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे शुरुआती लक्षणों को सामान्य वायरल संक्रमण समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

बारिश के मौसम में साफ-सफाई बनाए रखें, घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों से बचाव करें और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और सही उपचार ही डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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