40 की उम्र के बाद तेजी से बढ़ रही फैटी लिवर की बीमारी! बिना शराब पीने वालों में भी बढ़ा खतरा, डॉक्टरों ने बताए शुरुआती संकेत
नई दिल्ली। फैटी लिवर (Fatty Liver) को कभी केवल शराब का अधिक सेवन करने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी फैटी लिवर की चपेट में आ रहे हैं, जिन्होंने कभी शराब का सेवन नहीं किया। डॉक्टरों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे चिंताजनक बात यह है कि शुरुआती चरण में इस बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को तब पता चलता है जब सामान्य हेल्थ चेकअप या अल्ट्रासाउंड में लिवर में चर्बी जमा होने की जानकारी मिलती है।
क्या है फैटी लिवर?
फैटी लिवर ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक मात्रा में वसा (Fat) जमा होने लगती है। यदि समय रहते इसका इलाज और नियंत्रण नहीं किया जाए तो यह धीरे-धीरे लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और गंभीर मामलों में लिवर फेल होने का कारण भी बन सकती है।
डॉक्टर फैटी लिवर को मुख्य रूप से दो भागों में बांटते हैं—
अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD) – शराब के अधिक सेवन से होने वाली समस्या।
नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) – बिना शराब पीने वालों में विकसित होने वाली बीमारी।
आज भारत में तेजी से बढ़ने वाले मामलों में NAFLD प्रमुख रूप से सामने आ रही है।
भारत में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में तेजी से बदलती जीवनशैली इस बीमारी के पीछे सबसे बड़ी वजह बन रही है।
मुख्य कारणों में शामिल हैं—
फास्ट फूड और जंक फूड का बढ़ता सेवन।
मीठे पेय पदार्थों का अधिक उपयोग।
लंबे समय तक बैठे रहना।
नियमित व्यायाम की कमी।
मोटापा।
टाइप-2 डायबिटीज।
हाई कोलेस्ट्रॉल।
उच्च रक्तचाप।
इन सभी कारणों से शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लगती है, जिसका असर लिवर पर भी पड़ता है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा है?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न लोगों में फैटी लिवर होने की संभावना अधिक रहती है—
40 वर्ष से अधिक आयु के लोग।
मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति।
डायबिटीज के मरीज।
हाई ट्राइग्लिसराइड वाले लोग।
हाई ब्लड प्रेशर के मरीज।
कम शारीरिक गतिविधि करने वाले लोग।
लगातार जंक फूड खाने वाले व्यक्ति।
हालांकि अब यह बीमारी सामान्य वजन वाले लोगों में भी देखने को मिल रही है।
शुरुआती लक्षण जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता है
फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआत में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं।
कुछ सामान्य संकेत इस प्रकार हैं—
लगातार थकान रहना।
पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन।
कमजोरी महसूस होना।
भूख कम लगना।
वजन बढ़ना।
पेट के आसपास चर्बी बढ़ना।
काम करने की क्षमता कम होना।
इन लक्षणों को अक्सर लोग सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
अगर इलाज न कराया जाए तो क्या हो सकता है?
डॉक्टरों के अनुसार यदि फैटी लिवर लंबे समय तक अनियंत्रित रहे तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
संभावित जटिलताएं—
लिवर में सूजन।
लिवर फाइब्रोसिस।
सिरोसिस।
लिवर फेलियर।
कुछ मामलों में लिवर कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
हालांकि हर मरीज में ऐसा नहीं होता, लेकिन समय पर इलाज बेहद जरूरी है।
कैसे होती है जांच?
यदि डॉक्टर को फैटी लिवर की आशंका होती है तो वे कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं—
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
अल्ट्रासाउंड
फाइब्रोस्कैन
ब्लड टेस्ट
आवश्यकता पड़ने पर अन्य विशेष जांच
इन जांचों से बीमारी की गंभीरता का पता लगाया जाता है।
क्या फैटी लिवर ठीक हो सकता है?
अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
यदि मरीज समय रहते अपनी जीवनशैली में सुधार कर ले तो लिवर में जमा अतिरिक्त वसा धीरे-धीरे कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी का सबसे प्रभावी इलाज दवा से ज्यादा स्वस्थ जीवनशैली है।
क्या खाना चाहिए?
डॉक्टर संतुलित आहार लेने की सलाह देते हैं।
इन चीजों को भोजन में शामिल किया जा सकता है—
हरी पत्तेदार सब्जियां।
मौसमी फल।
साबुत अनाज।
दालें।
ओट्स।
लो-फैट डेयरी उत्पाद।
प्रोटीन युक्त भोजन।
पर्याप्त मात्रा में पानी।
वहीं इन चीजों से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है—
तला हुआ भोजन।
अत्यधिक मिठाइयां।
कोल्ड ड्रिंक।
पैकेज्ड स्नैक्स।
अत्यधिक मैदा।
प्रोसेस्ड फूड।
व्यायाम कितना जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि लाभदायक हो सकती है।
इसमें शामिल हैं—
तेज चलना।
साइकिल चलाना।
तैराकी।
योग।
हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग।
नियमित व्यायाम वजन नियंत्रित रखने और लिवर की सेहत सुधारने में मदद करता है।
क्या केवल पतले लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं?
यह एक बड़ी गलतफहमी है।
अब कई ऐसे लोग भी फैटी लिवर से प्रभावित हो रहे हैं जिनका वजन सामान्य है। इसे Lean Fatty Liver भी कहा जाता है।
इसलिए केवल वजन देखकर बीमारी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि आपको—
लगातार थकान रहती है।
पेट में भारीपन महसूस होता है।
डायबिटीज या मोटापा है।
नियमित हेल्थ चेकअप में लिवर एंजाइम बढ़े हुए मिले हैं।
तो डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच जरूर करानी चाहिए।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज
फैटी लिवर से बचने के लिए कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं—
संतुलित भोजन करें।
रोजाना व्यायाम करें।
वजन नियंत्रित रखें।
मीठे पेय पदार्थ कम लें।
पर्याप्त नींद लें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
फैटी लिवर अब केवल शराब पीने वालों की बीमारी नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली और खान-पान के कारण यह समस्या तेजी से युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में भी बढ़ रही है। अच्छी बात यह है कि यदि शुरुआती चरण में इसकी पहचान हो जाए और समय रहते जीवनशैली में बदलाव कर लिया जाए तो इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इसलिए यदि लगातार थकान, पेट में भारीपन या डायबिटीज और मोटापे जैसी समस्याएं हैं, तो इन्हें हल्के में न लें। नियमित जांच, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली ही स्वस्थ लिवर की सबसे मजबूत कुंजी है।

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