'मुसलमान न तो डरते हैं और न ही घबराते हैं', बाबा रामदेव के बयान पर मौलाना फिरंगी महली की दो टूक
नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव के 'हिंदू राष्ट्र' को लेकर दिए गए बयान ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस को हवा दे दी है। दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बाबा रामदेव ने कहा कि "हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से किसी को डरने की जरूरत नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों के पूर्वज एक ही थे और मुसलमानों या ईसाइयों के लिए हिंदुस्तान में किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
बाबा रामदेव के इस बयान के बाद लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी से डरते नहीं हैं और समाज में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए।
दोनों पक्षों के बयानों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है।
क्या बोले बाबा रामदेव?
दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर लोगों में अनावश्यक भ्रम फैलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह सवाल पूछते हैं कि यदि भारत हिंदू राष्ट्र बन गया तो मुसलमानों और ईसाइयों का क्या होगा। इस पर उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी समुदाय को डरने की आवश्यकता नहीं है।
बाबा रामदेव ने अपने संबोधन में कहा कि उनके अनुसार भारत के सभी लोगों के पूर्वज एक ही थे और इतिहास में सभी की जड़ें भारतीय सभ्यता और वैदिक परंपरा से जुड़ी रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपने पूर्वजों के चरित्र, संस्कार और जीवन मूल्यों को अपनाना चाहिए। उनके अनुसार पहनावा, दाढ़ी या अन्य बाहरी पहचान से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति का आचरण और चरित्र होता है।
देवबंद के अनुभव का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान बाबा रामदेव ने वर्ष 2009 का एक अनुभव भी साझा किया।
उन्होंने कहा कि उन्हें उस समय देवबंद में आयोजित एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। वहां उन्होंने कहा था कि अलग-अलग धर्मों के बावजूद सभी लोगों के पूर्वज एक ही रहे हैं।
उन्होंने दोहराया कि भारत में किसी भी धर्म के लोगों को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है और सभी को मिल-जुलकर रहना चाहिए।
मुसलमानों और ईसाइयों को लेकर क्या कहा?
बाबा रामदेव ने अपने भाषण में कहा कि भारत में मुसलमानों और ईसाइयों के लिए किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखना चाहता है तो उसे ऐसा करने की पूरी स्वतंत्रता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के पहनावे या व्यक्तिगत धार्मिक पहचान से अधिक महत्वपूर्ण उसके नैतिक मूल्य और चरित्र हैं।
इमाम खालिद रशीद फिरंगी महली की प्रतिक्रिया
बाबा रामदेव के बयान पर लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुसलमान किसी से डरते नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि मुसलमान अल्लाह पर विश्वास रखते हैं और उनका मानना है कि पूरी मानवता की मूल उत्पत्ति एक ही है।
मौलाना ने कहा कि उन्होंने हमेशा धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव का विरोध किया है।
उनका कहना था कि यदि देश को मजबूत बनाना है तो सभी लोगों को अपने-अपने धर्म का पालन करने के साथ-साथ दूसरे धर्मों का भी सम्मान करना चाहिए।
धार्मिक बयानों से बचने की अपील
मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि समाज में शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों से बचना चाहिए जो धार्मिक विवाद को जन्म दे सकते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव सबसे महत्वपूर्ण है और सभी समुदायों को मिलकर इसे मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने उत्तराखंड में मस्जिदों और मदरसों से जुड़े कुछ मुद्दों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों को लेकर मुस्लिम समुदाय में चिंता है।
'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा पर क्यों होती है बहस?
भारत में "हिंदू राष्ट्र" शब्द लंबे समय से राजनीतिक और वैचारिक बहस का विषय रहा है।
कुछ संगठन और विचारधाराएं इसे भारतीय सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानती हैं, जबकि अन्य पक्ष संविधान में वर्णित धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर जोर देता है।
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
इसी कारण जब भी "हिंदू राष्ट्र" का मुद्दा उठता है, तो उस पर अलग-अलग विचार सामने आते हैं।
संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान देश को एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करता है, जहां सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं।
संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है।
यानी प्रत्येक व्यक्ति—
अपनी पसंद का धर्म मान सकता है,
उसका पालन कर सकता है,
धार्मिक गतिविधियों में भाग ले सकता है,
और कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर उसका प्रचार भी कर सकता है।
इसी संवैधानिक व्यवस्था के कारण भारत में अनेक धर्मों और संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
बाबा रामदेव और मौलाना खालिद रशीद के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
कुछ लोगों ने बाबा रामदेव के बयान का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे विवादास्पद बताया।
दूसरी ओर कई लोगों ने मौलाना के बयान का स्वागत करते हुए धार्मिक सौहार्द बनाए रखने की अपील को सकारात्मक बताया।
हालांकि सोशल मीडिया पर सामने आ रही प्रतिक्रियाएं अलग-अलग विचारों को दर्शाती हैं और इनका कोई आधिकारिक महत्व नहीं होता।
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक और सामाजिक मामलों के जानकारों का कहना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर सार्वजनिक बयान अक्सर व्यापक बहस का कारण बनते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे संवेदनशील विषयों पर सभी पक्षों को संयमित भाषा का उपयोग करना चाहिए ताकि समाज में किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न न हो।
उनका कहना है कि भारत की विविधता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत विभिन्न समुदायों के बीच आपसी सम्मान और संवाद है।
दिल्ली विश्वविद्यालय में बाबा रामदेव द्वारा दिए गए "हिंदू राष्ट्र" संबंधी बयान और उस पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर इस विषय को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
एक ओर बाबा रामदेव का कहना है कि हिंदू राष्ट्र की अवधारणा से किसी समुदाय को डरने की आवश्यकता नहीं है और भारत में सभी सुरक्षित हैं। वहीं दूसरी ओर मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि मुसलमान डरते नहीं हैं और सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए ऐसे बयानों से बचना चाहिए जो समाज में विवाद पैदा करें।
फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से ही सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाया जा सकता है।
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