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मस्जिद का मौलवी निकला पाकिस्तानी आतंकियों का 'सीक्रेट हैंडलर'! 2 साल तक LeT कमांडर सैफुल्ला को देता रहा पनाह, गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

 


श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी सफलता मिली है। किश्तवाड़ जिले में पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो स्थानीय मस्जिद में मौलवी के रूप में कार्यरत था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्ला और उसके सहयोगियों को लंबे समय तक सुरक्षित ठिकाना, भोजन, जरूरी सामान और अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराता रहा। अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी जिले में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) के खिलाफ चल रही कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद रफीक नाइक के रूप में हुई है। वह किश्तवाड़ जिले के सिंहपोरा स्थित दवाथर गांव का निवासी है और कलासोई इलाके की एक मस्जिद में मौलवी के तौर पर कार्य कर रहा था। जांच में सामने आया है कि वह कथित तौर पर आतंकियों और उनके स्थानीय नेटवर्क के बीच संपर्क का प्रमुख माध्यम बना हुआ था।

कौन है मोहम्मद रफीक नाइक?

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रफीक नाइक सामान्य धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा दिखाई देता था, लेकिन जांच के दौरान उसके कथित आतंकी संपर्कों का खुलासा हुआ। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि वह लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्ला के नेतृत्व वाले आतंकी मॉड्यूल के लिए "ग्राउंड हैंडलर" के रूप में काम कर रहा था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसका मुख्य काम जंगलों में छिपे आतंकियों तक भोजन, दवाइयां, कपड़े और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाना था। इसके अलावा वह स्थानीय स्तर पर सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने और आतंकियों की गतिविधियों को गोपनीय बनाए रखने में भी कथित भूमिका निभा रहा था।

दो साल तक जंगलों में सक्रिय रहा आतंकी मॉड्यूल

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तानी आतंकी कमांडर सैफुल्ला और उसके साथी लगभग दो वर्षों तक किश्तवाड़ के छत्रू क्षेत्र के घने जंगलों में सक्रिय रहे। यह इलाका दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के कारण लंबे समय से आतंकियों के लिए छिपने का स्थान माना जाता रहा है।

जांच में आरोप है कि स्थानीय स्तर पर मिले समर्थन और लॉजिस्टिक नेटवर्क की वजह से यह आतंकी समूह लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचा रहा। अधिकारियों का मानना है कि यदि उन्हें स्थानीय सहायता नहीं मिलती, तो इतने लंबे समय तक जंगलों में टिके रहना संभव नहीं था।

इसी साल मारा गया था सैफुल्ला

सुरक्षा बलों ने इस वर्ष की शुरुआत में एक संयुक्त अभियान के दौरान पाकिस्तानी आतंकी कमांडर सैफुल्ला और उसके सहयोगियों को मार गिराया था। यह ऑपरेशन सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से चलाया गया था।

अब जांच एजेंसियों का कहना है कि सैफुल्ला के मारे जाने के बाद जब उसके नेटवर्क की गहन जांच की गई, तब कई स्थानीय संपर्कों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आईं। इन्हीं सुरागों के आधार पर मोहम्मद रफीक नाइक की कथित भूमिका का पता चला और उसे गिरफ्तार किया गया।

क्या होता है 'ग्राउंड हैंडलर'?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आतंकी संगठन के लिए केवल हथियारबंद आतंकवादी ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि उन्हें स्थानीय स्तर पर सहयोग देने वाले लोग भी नेटवर्क का अहम हिस्सा होते हैं।

ऐसे लोगों को आमतौर पर "ग्राउंड हैंडलर" या "ओवरग्राउंड वर्कर (OGW)" कहा जाता है। इनका काम आतंकियों को सुरक्षित रास्ते, भोजन, आश्रय, संचार सुविधाएं, स्थानीय सूचनाएं और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आतंकी संगठन की गतिविधियों को कमजोर करने के लिए उसके स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क को समाप्त करना सबसे प्रभावी रणनीति होती है।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां

पुलिस के अनुसार, इसी जांच के सिलसिले में पहले मुनीर अहमद और मशकूर अहमद को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

सूत्रों के अनुसार, मशकूर अहमद एक स्कूल शिक्षक था, जिस पर उसी आतंकी मॉड्यूल को कथित रूप से लॉजिस्टिक और संचार सहायता उपलब्ध कराने का आरोप है। इन गिरफ्तारियों के बाद जांच एजेंसियों ने नेटवर्क की अन्य कड़ियों की भी पहचान शुरू कर दी है।

जांच कई दिशाओं में जारी

अधिकारियों ने बताया कि जांच केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किन माध्यमों से आतंकियों तक संसाधन पहुंचाए जा रहे थे।

पुलिस का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों, पूछताछ और अन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

आतंकवाद के खिलाफ अभियान जारी

जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद के खिलाफ अभियान को और अधिक तेज किया है। सीमा पार से घुसपैठ रोकने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर सक्रिय ओवरग्राउंड नेटवर्क को समाप्त करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आतंकियों को मार गिराना पर्याप्त नहीं होता। उनके वित्तीय स्रोत, स्थानीय संपर्क, हथियारों की आपूर्ति और संचार नेटवर्क को भी खत्म करना आवश्यक होता है। इसी रणनीति के तहत पुलिस लगातार ऐसे लोगों की पहचान कर रही है जो कथित रूप से आतंकियों की सहायता करते हैं।

पुलिस का संदेश

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह गिरफ्तारी स्पष्ट संदेश देती है कि आतंकवादियों की किसी भी प्रकार से सहायता करने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, चाहे उसका सामाजिक, धार्मिक या पेशेवर पद कुछ भी क्यों न हो।

हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी और प्रत्येक आरोपी को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।

स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील

सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस या सुरक्षा बलों को दें। अधिकारियों का कहना है कि जनता का सहयोग आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

किश्तवाड़ में मौलवी के रूप में कार्यरत मोहम्मद रफीक नाइक की गिरफ्तारी को जम्मू-कश्मीर में सक्रिय कथित आतंकी सहायता नेटवर्क के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस का आरोप है कि उसने लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्ला और उसके साथियों को लंबे समय तक लॉजिस्टिक सहायता और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराए। मामले की जांच अभी जारी है और सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कथित ओवरग्राउंड वर्कर्स की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए उसके पूरे सपोर्ट सिस्टम को ध्वस्त करना आवश्यक है और इसी दिशा में अभियान लगातार जारी रहेगा।

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