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दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में बड़ा हादसा! इलाज के दौरान मरीज पर गिरा छत का पंखा, कुछ घंटों बाद हुई मौत, अस्पताल की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

 


देश की राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान छत पर लगा एक भारी पंखा अचानक अपनी जगह से टूटकर नीचे गिर गया और सीधे बेड पर भर्ती मरीज पर आ गिरा। हादसे में मरीज के साथ इलाज कर रहा नर्सिंग कर्मचारी भी घायल हो गया। घटना के कुछ घंटों बाद मरीज की मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

हालांकि अस्पताल के आधिकारिक दस्तावेजों में मरीज की मौत का कारण उसकी गंभीर बीमारी बताया गया है, लेकिन हादसे ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि यदि अस्पतालों में बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं रहेगा तो मरीज और स्वास्थ्यकर्मी खुद को कितना सुरक्षित महसूस कर पाएंगे।

शनिवार रात इमरजेंसी वार्ड में हुआ हादसा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह घटना शनिवार, 18 जुलाई की रात करीब 9:30 बजे हुई। 42 वर्षीय मोहम्मद अकबर को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण गुरु तेग बहादुर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराया गया था।

बताया गया कि वह हाइपरटेंशन, मेनिंगोएन्सेफलाइटिस और एस्पिरेशन निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड-27 में उनका इलाज चल रहा था। इसी दौरान अचानक छत पर लगा एक भारी पंखा अपनी फिटिंग से निकलकर सीधे उनके बेड पर गिर पड़ा।

घटना इतनी अचानक हुई कि वार्ड में मौजूद डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य मरीजों में अफरा-तफरी मच गई। इलाज कर रहा नर्सिंग कर्मचारी भी पंखे की चपेट में आ गया और उसे भी चोटें आईं।

इलाज कर रहे नर्सिंग कर्मचारी को भी लगी चोट

अस्पताल से जुड़े एक कर्मचारी के अनुसार जब नर्सिंग स्टाफ मरीज का उपचार कर रहा था, उसी समय पंखा टूटकर गिर गया। पंखा सीधे मरीज के शरीर पर गिरा जबकि उसके पास मौजूद नर्सिंग कर्मचारी भी इसकी चपेट में आ गया।

घटना के तुरंत बाद दोनों को प्राथमिक उपचार दिया गया और अस्पताल के अन्य कर्मचारियों ने स्थिति संभाली। हालांकि इस हादसे के बाद वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बीच भय और चिंता का माहौल बन गया।

हादसे के कुछ घंटे बाद मरीज की मौत

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज डेथ सर्टिफिकेट के अनुसार मोहम्मद अकबर की मौत रात 12 बजकर 16 मिनट पर हुई। यानी पंखा गिरने की घटना के लगभग तीन घंटे के भीतर उनकी मृत्यु हो गई।

यही तथ्य अब चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि अस्पताल के दस्तावेजों में मृत्यु का कारण गंभीर बीमारियों को बताया गया है, लेकिन हादसे की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

डेथ सर्टिफिकेट में क्या दर्ज है?

अस्पताल द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र में मोहम्मद अकबर की मौत का कारण हाइपरटेंशन, मेनिंगोएन्सेफलाइटिस और एस्पिरेशन निमोनिया बताया गया है।

अस्पताल की ओर से अब तक यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है कि पंखा गिरने की घटना का मरीज की मौत से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं। यही कारण है कि इस मामले में कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं।

यदि घटना और मृत्यु के बीच किसी प्रकार का संबंध है या नहीं, इसका निष्कर्ष केवल विस्तृत जांच और चिकित्सकीय विश्लेषण के बाद ही सामने आ सकेगा।

परिजनों ने जताई चिंता

मृतक के परिजनों ने अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था और इलाज की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अस्पतालों में मरीज इलाज कराने और स्वस्थ होने की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन यदि अस्पताल का बुनियादी ढांचा ही सुरक्षित न हो तो ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं।

परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसे के पीछे किसी प्रकार की लापरवाही थी या नहीं।

अस्पताल प्रशासन की ओर से नहीं आया विस्तृत बयान

घटना सामने आने के बाद भी गुरु तेग बहादुर अस्पताल प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि पंखा किस कारण से अपनी जगह से उखड़ गया।

फिलहाल यह जानकारी भी सार्वजनिक नहीं हुई है कि संबंधित वार्ड के रखरखाव का अंतिम निरीक्षण कब किया गया था या अस्पताल में पंखों एवं अन्य उपकरणों की नियमित तकनीकी जांच होती है या नहीं।

सरकारी अस्पतालों के रखरखाव पर फिर उठे सवाल

यह घटना केवल एक अस्पताल तक सीमित नहीं है बल्कि देशभर के कई सरकारी अस्पतालों की रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में केवल आधुनिक चिकित्सा उपकरण होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भवन, छत, पंखे, बिजली व्यवस्था, ऑक्सीजन लाइन, अग्नि सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का नियमित निरीक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

यदि रखरखाव समय पर न हो तो इस प्रकार की घटनाएं मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों के लिए खतरा बन सकती हैं।

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण

इस घटना में केवल मरीज ही नहीं बल्कि इलाज कर रहा नर्सिंग कर्मचारी भी घायल हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि अस्पताल की खराब संरचनात्मक स्थिति का खतरा केवल मरीजों तक सीमित नहीं है।

देशभर के सरकारी अस्पतालों में हजारों डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी चौबीसों घंटे सेवाएं देते हैं। ऐसे में कार्यस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

क्या हो सकती है आगे की कार्रवाई?

मामले के सामने आने के बाद संभावना है कि संबंधित विभाग घटना की जांच कराए। यदि जांच में रखरखाव में लापरवाही या तकनीकी खामी सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

साथ ही अस्पताल परिसर के अन्य वार्डों में लगे पंखों और अन्य संरचनात्मक उपकरणों की भी जांच कराए जाने की मांग उठ रही है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

विशेषज्ञों का सुझाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। समय-समय पर छत, पंखे, विद्युत उपकरण, ऑक्सीजन पाइपलाइन और अन्य संरचनाओं का निरीक्षण किया जाना चाहिए।

इसके अलावा पुराने भवनों के नवीनीकरण और रखरखाव के लिए अलग बजट तथा समयबद्ध निरीक्षण व्यवस्था भी जरूरी मानी जा रही है।

दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज पर छत का पंखा गिरने की घटना ने सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि अस्पताल के रिकॉर्ड में मरीज की मौत का कारण उसकी गंभीर चिकित्सकीय स्थिति बताया गया है, लेकिन हादसे के कुछ ही घंटों बाद हुई मृत्यु ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पंखा गिरने की घटना का मृत्यु से प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं। इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष केवल आधिकारिक जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने अस्पतालों के बुनियादी ढांचे, नियमित रखरखाव और मरीजों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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