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300 फीट नीचे छिपा ईरान का सबसे बड़ा परमाणु राज! हजारों सेंट्रीफ्यूज शिफ्ट होने के दावे से दुनिया में हड़कंप



ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर पूरी दुनिया की निगाहें पश्चिम एशिया पर टिक गई हैं। अमेरिकी मीडिया की एक हालिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान ने अपने हजारों न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज को नतांज परमाणु केंद्र के पास स्थित अत्यंत सुरक्षित भूमिगत परिसर 'पिकऐक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) में स्थानांतरित कर दिया है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम माना जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार यह भूमिगत परिसर इतनी गहराई में स्थित है कि पारंपरिक हवाई हमलों के जरिए इसे नष्ट करना बेहद कठिन माना जा रहा है। यही वजह है कि अमेरिका, इजरायल और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच इस परिसर को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

क्या है 'पिकऐक्स माउंटेन' और क्यों बना चर्चा का केंद्र?

'पिकऐक्स माउंटेन' ईरान के नतांज क्षेत्र के पास स्थित एक अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत परिसर बताया जा रहा है। यह परिसर करीब 300 फीट से अधिक मोटी ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे बनाया गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी गहराई में बने किसी भी परमाणु परिसर को पारंपरिक बमों से नष्ट करना लगभग असंभव होता है।

बताया जा रहा है कि इसकी संरचना इतनी मजबूत है कि इसे विशेष प्रकार के 'बंकर बस्टर' हथियारों से ही नुकसान पहुंचाया जा सकता है। यही कारण है कि इसे ईरान की सबसे सुरक्षित परमाणु सुविधाओं में शामिल माना जा रहा है।

हजारों न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज शिफ्ट होने का दावा

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले वर्ष शरद ऋतु के दौरान ईरान ने हजारों न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज को इस परिसर में पहुंचाया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन सेंट्रीफ्यूज को किस परमाणु संयंत्र से हटाकर यहां लाया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर संवर्धन उपकरण वास्तव में इस परिसर में मौजूद हैं, तो ईरान भविष्य में अपने परमाणु कार्यक्रम को और अधिक सुरक्षित वातावरण में संचालित करने की तैयारी कर रहा है।

हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और ईरान ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

हवाई हमलों के बाद बदली रणनीति?

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इजरायल के अधिकारियों का मानना है कि यह स्थानांतरण उस समय किया गया जब जून 2025 में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए थे।

इन हमलों का उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया था। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि उस दौरान 'पिकऐक्स' परिसर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।

इसके बाद 28 फरवरी से शुरू हुए अधिक आक्रामक सैन्य अभियानों के दौरान भी यह परिसर सुरक्षित बना रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान ने पहले से ही इस स्थान को संभावित सैन्य हमलों से बचाने के लिए विकसित किया था।

सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाई हलचल

खुफिया एजेंसियों और सैटेलाइट इमेज के आधार पर पिछले करीब 15 महीनों से इस इलाके में लगातार निर्माण गतिविधियां देखी गई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार—

  • भारी ट्रकों की लगातार आवाजाही दर्ज की गई।

  • सुरंगों और भूमिगत ढांचों का विस्तार किया गया।

  • सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत की गई।

  • कई नए प्रवेश और निकास मार्ग विकसित किए गए।

इन गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है।

IAEA को अब तक नहीं मिली जांच की अनुमति

पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को अब तक इस परिसर का निरीक्षण करने की अनुमति नहीं मिली है।

IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने मार्च में बताया था कि ईरान ने वर्ष 2021 में एजेंसी को जानकारी दी थी कि वह इस क्षेत्र में परमाणु गतिविधियां शुरू करने की योजना बना रहा है।

लेकिन उसके बाद से एजेंसी के निरीक्षकों को परिसर के भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई।

इस कारण यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वहां वास्तव में क्या गतिविधियां चल रही हैं।

यही स्थिति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सबसे बड़ी चिंता बन चुकी है।

ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में कई सार्वजनिक बयानों में संकेत दिया है कि 'पिकऐक्स' भविष्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का प्रमुख लक्ष्य बन सकता है।

उन्होंने कहा कि—

"पिकऐक्स सामने के प्रवेश द्वार के पास बड़ा हमला झेलने वाला संभावित लक्ष्य है।"

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर इस परिसर के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने और अधिक सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जहां ईरान के सेंट्रीफ्यूज होने की आशंका है, वहां "बहुत जल्द और बेहद भारी हमला" किया जा सकता है।

हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की गई है।

पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने जताई चिंता

बाइडेन प्रशासन में ईरान मामलों से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व अधिकारी नेट स्वानसन ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताया है।

उनका कहना है कि यदि किसी अघोषित और निरीक्षण से बाहर परिसर में परमाणु गतिविधियां चल रही हैं, तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे चिंताजनक स्थितियों में से एक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि किसी स्वतंत्र एजेंसी के पास वहां जाकर वास्तविक स्थिति की पुष्टि करने का अवसर नहीं है।

ईरान का क्या है पक्ष?

ईरान लगातार यह दावा करता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

तेहरान का कहना है कि उसका लक्ष्य—

  • बिजली उत्पादन,

  • चिकित्सा अनुसंधान,

  • वैज्ञानिक विकास,

  • औद्योगिक उपयोग

के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करना है।

ईरानी सरकार बार-बार यह भी कह चुकी है कि उसका परमाणु हथियार बनाने का कोई इरादा नहीं है।

पश्चिमी देशों को क्यों है संदेह?

अमेरिका, इजरायल और कई पश्चिमी देशों का मानना है कि ईरान ने यूरेनियम को इतनी अधिक मात्रा में समृद्ध किया है कि वह हथियार-ग्रेड स्तर के काफी करीब पहुंच चुका है।

परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए इतनी उच्च स्तर की संवर्धन क्षमता की सामान्यतः आवश्यकता नहीं होती।

यही कारण है कि वर्षों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संदेह बना हुआ है।

हालांकि ईरान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है।

मध्य पूर्व में फिर बढ़ सकता है तनाव

यदि अमेरिकी रिपोर्ट में किए गए दावे सही साबित होते हैं तो मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • अमेरिका और इजरायल सैन्य विकल्पों पर विचार तेज कर सकते हैं।

  • ईरान अपनी सुरक्षा तैयारियां और मजबूत कर सकता है।

  • परमाणु वार्ता दोबारा प्रभावित हो सकती है।

  • क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं।

  • वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका असर पड़ सकता है।

हालांकि किसी भी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में पूरे क्षेत्र में व्यापक अस्थिरता पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।

दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं

फिलहाल यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हजारों सेंट्रीफ्यूज को 'पिकऐक्स माउंटेन' में स्थानांतरित किए जाने संबंधी दावे अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट और अधिकारियों के आकलन पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा नहीं की गई है और ईरान ने भी इन आरोपों को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।

ईरान के कथित भूमिगत परमाणु परिसर 'पिकऐक्स माउंटेन' को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को और अधिक सुरक्षित बनाकर आगे बढ़ा रहा है, वहीं ईरान लगातार अपने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या IAEA को इस परिसर का निरीक्षण करने की अनुमति मिलेगी, क्या कूटनीतिक बातचीत फिर शुरू होगी या फिर बढ़ते आरोप-प्रत्यारोप मध्य पूर्व को एक नए सैन्य टकराव की ओर धकेल देंगे।

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