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27 साल तक ‘मुर्दा’ बनकर पुलिस को देता रहा चकमा! दो पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी आखिर भोपाल से दबोचा गया

 


उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में वर्ष 1999 में हुए दो पुलिसकर्मियों की हत्या और लूट के बहुचर्चित मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने लगभग 27 साल से फरार चल रहे मुख्य आरोपी को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न केवल अपनी पहचान बदल ली थी, बल्कि खुद को मृत घोषित कर दिया था, ताकि किसी को उसके जीवित होने का संदेह न हो।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी वर्षों तक अलग-अलग राज्यों में छिपकर रहा और अंततः भोपाल में नई पहचान के साथ सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

1999 में हुई थी दो पुलिसकर्मियों की हत्या

पुलिस के अनुसार, मामला वर्ष 1999 का है, जब आगरा के खेरागढ़ थाना क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मियों पर बदमाशों ने हमला किया था।

आरोप है कि बदमाशों ने पहले लूटपाट की और फिर दोनों पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। इस घटना ने उस समय पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा।

जांच के दौरान उस पर इनाम भी घोषित किया गया और उसकी तलाश लगातार जारी रही।

मुख्य आरोपी पर घोषित था इनाम

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, फरार आरोपी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उस समय यह बड़ी इनामी राशि मानी जाती थी।

लगातार दबिश देने और विभिन्न राज्यों में तलाश के बावजूद आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। समय बीतने के साथ मामला पुरानी फाइलों में दर्ज तो रहा, लेकिन पुलिस की तलाश कभी पूरी तरह बंद नहीं हुई।

गिरफ्तारी से बचने के लिए रची मौत की कहानी

पुलिस के मुताबिक, आरोपी को यह एहसास था कि यदि वह अपनी वास्तविक पहचान के साथ रहेगा तो कभी न कभी पुलिस तक पहुंच जाएगा।

इसी वजह से उसने कथित तौर पर एक ऐसी योजना बनाई, जिसने वर्षों तक जांच एजेंसियों को भ्रम में रखा।

पुलिस का दावा है कि आरोपी ने अपने परिवार और रिश्तेदारों से संपर्क पूरी तरह समाप्त कर दिया और यह अफवाह फैला दी कि उसकी मृत्यु हो चुकी है।

इस रणनीति का उद्देश्य यह था कि लोग उसे तलाशना बंद कर दें और पुलिस को भी उसके बारे में कोई नई जानकारी न मिल सके।

नई पहचान बनाकर शुरू की नई जिंदगी

जांच अधिकारियों के अनुसार, पुरानी पहचान छोड़ने के बाद आरोपी ने अपना नाम बदलकर "जमील" रख लिया।

बताया जा रहा है कि वह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचा और वहीं रहने लगा। वहां उसने सामान्य नागरिक की तरह जीवन शुरू किया।

पुलिस के अनुसार, उसने विवाह किया, परिवार बसाया और बच्चों के साथ वर्षों तक ऐसा जीवन बिताया, जिससे किसी को भी उसके आपराधिक अतीत का संदेह न हो।

स्थानीय लोगों के लिए वह एक साधारण व्यक्ति था, जबकि उत्तर प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड में वह वर्षों से फरार आरोपी के रूप में दर्ज था।

गुप्त सूचना ने बदल दी पूरी कहानी

हाल के दिनों में आगरा पुलिस को खुफिया माध्यमों से सूचना मिली कि जिस आरोपी को लंबे समय से मृत माना जा रहा था, वह वास्तव में जीवित है और भोपाल में नाम बदलकर रह रहा है।

सूचना की पुष्टि के लिए पुलिस ने कई स्तरों पर जांच की।

बताया जा रहा है कि पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड, तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी का मिलान किया। पर्याप्त पुष्टि मिलने के बाद विशेष टीम को भोपाल भेजा गया।

भोपाल में बिछाया गया जाल

पुलिस टीम ने भोपाल पहुंचकर कई दिनों तक आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी।

पूरी तरह पहचान सुनिश्चित होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के समय आरोपी कथित तौर पर अपनी नई पहचान के साथ सामान्य जीवन जी रहा था। प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस ने उससे कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का दावा किया है।

अब पुराने मुकदमे की होगी आगे की सुनवाई

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पुलिस का कहना है कि वर्ष 1999 के मामले में अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी।

जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि फरारी के दौरान आरोपी किन-किन राज्यों में रहा और किस प्रकार अपनी पहचान छिपाने में सफल रहा।

क्या किसी ने की थी मदद?

जांच एजेंसियों के सामने अब एक बड़ा सवाल यह भी है कि आरोपी इतने लंबे समय तक कानून से बचने में कैसे सफल रहा।

पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या उसे किसी व्यक्ति या गिरोह से सहायता मिलती रही या उसने पूरी तरह अकेले अपनी पहचान छिपाकर जीवन बिताया।

यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

तकनीकी जांच से खुल सकती हैं कई परतें

पुलिस अब आरोपी के मोबाइल रिकॉर्ड, पहचान संबंधी दस्तावेज, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि उसने नई पहचान किस आधार पर बनाई और किन दस्तावेजों का उपयोग किया।

यदि किसी सरकारी दस्तावेज में फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो संबंधित धाराओं के तहत अलग से कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस के लिए बड़ी सफलता

करीब तीन दशक पुराने चर्चित मामले में मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी को पुलिस अपनी बड़ी उपलब्धि मान रही है।

अधिकारियों का कहना है कि फरार अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और पुराने मामलों में भी जांच समय-समय पर आगे बढ़ाई जाती है।

फिलहाल आरोप साबित होना बाकी

हालांकि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अदालत द्वारा दोषी सिद्ध किए जाने तक आरोपी माना जाता है।

अब इस मामले में आगे की सुनवाई न्यायालय में होगी, जहां पुलिस अपने साक्ष्य प्रस्तुत करेगी और अदालत उपलब्ध सबूतों के आधार पर अंतिम निर्णय देगी।

करीब 27 वर्षों तक फरारी, पहचान बदलकर नई जिंदगी और खुद को मृत साबित करने की कथित रणनीति के बाद हुई इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि लंबे समय तक कानून से बच निकलना संभव भले लगे, लेकिन पुराने मामलों की जांच और तकनीकी संसाधनों के दम पर वर्षों बाद भी आरोपी कानून के शिकंजे तक पहुंच सकते हैं।

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