अहमदाबाद में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट! 8 लोगों की मौत, कई गंभीर घायल; अवैध संचालन की आशंका ने उठाए बड़े सवाल
गुजरात के अहमदाबाद में एक पटाखा निर्माण इकाई में भीषण आग और विस्फोट की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। हादसे में कम से कम 8 लोगों की मौत होने की पुष्टि अधिकारियों ने की है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव अभियान देर तक चलता रहा और मलबे की जांच के दौरान मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जिस फैक्ट्री में हादसा हुआ, उसका लाइसेंस पहले ही रद्द हो चुका था। इसके बावजूद वहां कथित तौर पर अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फैक्ट्री संचालकों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
रामोल क्षेत्र में हुआ दर्दनाक हादसा
जानकारी के अनुसार, यह हादसा अहमदाबाद के रामोल क्षेत्र में स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई में हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया।
पटाखों और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। विस्फोट की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी और आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी, जिसके बाद राहत दल मौके पर पहुंचा।
दमकल की कई गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की पांच से अधिक गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग इतनी भीषण थी कि उसे नियंत्रित करने में काफी समय लगा।
दमकल कर्मियों ने आग बुझाने के साथ-साथ अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का अभियान भी चलाया। पुलिस, नगर निगम और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत कार्य किया।
अधिकारियों के अनुसार, कई घायलों को गंभीर अवस्था में घटनास्थल से निकालकर एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया।
8 लोगों की मौत, कई गंभीर रूप से घायल
अधिकारियों के अनुसार, अब तक इस हादसे में 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
इसके अलावा कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज अहमदाबाद के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। कुछ घायलों की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है।
अस्पताल प्रशासन ने भी एक से अधिक मौतों की पुष्टि की है, जबकि अन्य घायलों का उपचार विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।
दो बच्चियां भी गंभीर रूप से झुलसीं
हादसे में दो बच्चियां भी गंभीर रूप से झुलस गईं।
उन्हें तत्काल अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।
चिकित्सकों के अनुसार, दोनों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उन्हें विशेष चिकित्सा निगरानी में रखा गया है।
लाइसेंस रद्द होने के बावजूद चल रही थी फैक्ट्री?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस पटाखा फैक्ट्री में हादसा हुआ, उसका लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था।
इसके बावजूद वहां कथित रूप से पटाखों का निर्माण जारी था।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फैक्ट्री किन परिस्थितियों में संचालित हो रही थी और संबंधित विभागों की निगरानी में कोई लापरवाही तो नहीं हुई।
यदि जांच में अवैध संचालन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फैक्ट्री संचालक की भूमिका जांच के दायरे में
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री का संचालन कथित तौर पर मेहुल डोडिया नामक व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था।
हालांकि पुलिस ने अभी आधिकारिक रूप से किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि फैक्ट्री का वास्तविक मालिक कौन है, संचालन की जिम्मेदारी किसके पास थी और क्या सभी कानूनी नियमों का पालन किया जा रहा था।
मेयर ने कहा— अवैध रूप से चल रही थी इकाई
अहमदाबाद के मेयर हितेश बारोट ने घटनास्थल का दौरा किया और राहत कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने बताया कि प्राथमिक जानकारी के अनुसार यह इकाई कथित रूप से अवैध रूप से संचालित की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि आग अत्यंत भीषण थी और इसके कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है।
मेयर ने घायलों के समुचित इलाज का आश्वासन देते हुए कहा कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
RAF ने साझा किया घटनाक्रम
RAF 100 के कमांडेंट अधिकारी रितुल दाह ने बताया कि दोपहर करीब 3 बजकर 24 मिनट पर तेज विस्फोट की आवाज सुनाई दी।
उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही त्वरित प्रतिक्रिया दल, एंबुलेंस और फायर टेंडर को मौके पर रवाना किया गया।
करीब 3 बजकर 45 मिनट पर टीम घटनास्थल पहुंची और राहत अभियान शुरू किया गया।
उन्होंने बताया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कई घायल लोग घटनास्थल से लगभग 50 मीटर दूर तक बिखरे हुए मिले।
उन्होंने कहा कि राहत और खोज अभियान जारी रहा तथा मृतकों और घायलों की संख्या की लगातार समीक्षा की जा रही है।
पुलिस ने शुरू की जांच
संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) जयपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि घटना रामोल पुलिस थाना क्षेत्र में हुई है।
उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार वहां 12 से 15 लोग काम कर रहे थे।
घटना के तुरंत बाद पुलिस, नगर निगम और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं ने संयुक्त रूप से बचाव अभियान चलाया।
उन्होंने बताया कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था या नहीं।
यदि जांच में किसी प्रकार का नियम उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फोरेंसिक जांच भी शुरू
हादसे के बाद फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है।
विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि आग किस कारण से लगी और विस्फोट कैसे हुआ।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था अथवा विस्फोटक सामग्री के भंडारण में गंभीर लापरवाही बरती गई।
सुरक्षा नियमों पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर पटाखा निर्माण इकाइयों में सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विस्फोटक सामग्री से जुड़े उद्योगों में निर्धारित सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन किया जाना आवश्यक है। यदि किसी इकाई का लाइसेंस निरस्त हो चुका हो और उसके बावजूद संचालन जारी रहे, तो यह गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय बन जाता है।
जांच पूरी होने तक अंतिम निष्कर्ष नहीं
फिलहाल पुलिस, दमकल विभाग और अन्य जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। मृतकों की पहचान, विस्फोट के वास्तविक कारण और फैक्ट्री के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच जारी है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि हादसा लापरवाही का परिणाम था, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन से हुआ या इसके पीछे कोई अन्य कारण था। तब तक किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा।

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