सिरदर्द समझकर न करें नजरअंदाज! दिमाग की इस खतरनाक बीमारी के 6 संकेत, समय रहते पहचानना बचा सकता है जान
अक्सर लोग सिरदर्द, आंखों में दर्द या धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यही मामूली लगने वाले लक्षण दिमाग की एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकते हैं। इस बीमारी का नाम ब्रेन एन्यूरिज्म (Brain Aneurysm) है। विशेषज्ञों के अनुसार यह ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका (ब्लड वेसल) की दीवार कमजोर होकर गुब्बारे की तरह फूल जाती है। कई बार यह वर्षों तक बिना किसी लक्षण के शरीर में मौजूद रहती है, लेकिन यदि यह फट जाए तो दिमाग में अचानक रक्तस्राव (ब्रेन ब्लीड) शुरू हो सकता है, जो स्ट्रोक का गंभीर रूप माना जाता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन एन्यूरिज्म को अक्सर "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरण में अधिकांश लोगों को इसके बारे में पता ही नहीं चलता। यही वजह है कि इसके लक्षणों और जोखिम कारकों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
क्या होता है ब्रेन एन्यूरिज्म?
ब्रेन एन्यूरिज्म तब होता है जब मस्तिष्क की किसी धमनी की दीवार कमजोर होकर बाहर की ओर फूलने लगती है। यह उभरा हुआ हिस्सा धीरे-धीरे बड़ा हो सकता है। यदि यह फट जाता है तो मस्तिष्क में रक्तस्राव होने लगता है, जिससे मरीज की स्थिति कुछ ही मिनटों में गंभीर हो सकती है।
हर ब्रेन एन्यूरिज्म फटता नहीं है, लेकिन यदि समय रहते इसका पता चल जाए तो कई मामलों में इलाज के जरिए गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है।
शुरुआती चरण में क्यों नहीं पता चलता?
विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश छोटे ब्रेन एन्यूरिज्म किसी प्रकार का लक्षण नहीं देते। कई लोगों में यह बीमारी किसी अन्य कारण से कराए गए सीटी स्कैन या एमआरआई के दौरान संयोगवश पता चलती है।
हालांकि, जब एन्यूरिज्म का आकार बढ़ने लगता है और वह आसपास की नसों या मस्तिष्क के हिस्सों पर दबाव डालता है, तब कुछ संकेत दिखाई देने लगते हैं।
ब्रेन एन्यूरिज्म के शुरुआती लक्षण
यदि एन्यूरिज्म अभी फटा नहीं है, तो मरीज में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
सिर के एक तरफ लगातार दर्द रहना।
आंख के पीछे या आंख के ऊपर दर्द महसूस होना।
धुंधला दिखाई देना या एक वस्तु दो-दो दिखाई देना।
एक पलक का नीचे की ओर झुक जाना।
चेहरे के किसी हिस्से में सुन्नपन या कमजोरी।
आंख की पुतली का सामान्य से अधिक बड़ी दिखाई देना।
ये लक्षण हर मरीज में एक जैसे नहीं होते, लेकिन यदि इनमें से कोई समस्या लगातार बनी रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।
यदि एन्यूरिज्म फट जाए तो क्या होता है?
ब्रेन एन्यूरिज्म का फटना एक मेडिकल इमरजेंसी है। इस स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि इलाज में देरी होती है तो मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है या मरीज की जान भी जा सकती है।
फटे हुए ब्रेन एन्यूरिज्म के प्रमुख लक्षण
अचानक जीवन का सबसे तेज सिरदर्द महसूस होना।
जी मिचलाना या बार-बार उल्टी होना।
गर्दन में अकड़न।
तेज रोशनी से परेशानी होना।
भ्रम (कन्फ्यूजन) या बेहोशी।
दौरे पड़ना।
शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवा जैसे लक्षण।
बोलने में कठिनाई होना।
इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर बिना देर किए आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
किन लोगों में अधिक होता है खतरा?
कुछ लोगों में ब्रेन एन्यूरिज्म होने या उसके फटने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है।
जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं—
लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर।
धूम्रपान करना।
अत्यधिक शराब का सेवन।
परिवार में पहले किसी सदस्य को ब्रेन एन्यूरिज्म होना।
पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज जैसी कुछ आनुवंशिक बीमारियां।
कुछ जन्मजात रक्त वाहिका संबंधी विकार।
40 वर्ष से अधिक उम्र, विशेषकर महिलाओं में।
हालांकि यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन इन जोखिम कारकों वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
जांच कैसे की जाती है?
यदि डॉक्टर को ब्रेन एन्यूरिज्म की आशंका होती है, तो मरीज की स्थिति के अनुसार विभिन्न जांचें कराई जा सकती हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
सीटी स्कैन (CT Scan)
सीटी एंजियोग्राफी (CTA)
एमआर एंजियोग्राफी (MRA)
डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA)
इन जांचों की मदद से यह पता लगाया जाता है कि एन्यूरिज्म कहां है, उसका आकार कितना है और उसके फटने का जोखिम कितना है।
इलाज के आधुनिक तरीके
आज चिकित्सा विज्ञान में ब्रेन एन्यूरिज्म के उपचार के लिए कई आधुनिक तकनीकें उपलब्ध हैं।
मरीज की स्थिति के अनुसार डॉक्टर निम्नलिखित उपचारों में से किसी का चयन कर सकते हैं—
माइक्रोसर्जिकल क्लिपिंग – इसमें सर्जरी के जरिए एन्यूरिज्म को क्लिप लगाकर बंद किया जाता है।
एंडोवैस्कुलर कॉइलिंग – कैथेटर के माध्यम से एन्यूरिज्म के भीतर विशेष कॉइल डाली जाती है ताकि रक्त प्रवाह नियंत्रित हो सके।
फ्लो-डाइवर्टर तकनीक – विशेष स्टेंट लगाकर रक्त के प्रवाह को दूसरी दिशा में मोड़ा जाता है।
उपयुक्त उपचार का निर्णय मरीज की उम्र, स्वास्थ्य, एन्यूरिज्म के आकार और स्थान के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सक लेते हैं।
क्या इससे बचाव संभव है?
हर ब्रेन एन्यूरिज्म को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके फटने के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसके लिए विशेषज्ञ निम्नलिखित सलाह देते हैं—
ब्लड प्रेशर हमेशा नियंत्रित रखें।
धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें।
शराब का सेवन सीमित करें।
संतुलित आहार लें।
नियमित व्यायाम करें।
वजन नियंत्रित रखें।
यदि परिवार में किसी को ब्रेन एन्यूरिज्म रहा है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराएं।
सिरदर्द को हमेशा सामान्य न समझें
विशेषज्ञों का कहना है कि हर सिरदर्द ब्रेन एन्यूरिज्म का संकेत नहीं होता। माइग्रेन, तनाव, साइनस या अन्य कारणों से भी सिरदर्द हो सकता है।
लेकिन यदि अचानक अत्यधिक तेज सिरदर्द हो, पहले कभी ऐसा दर्द महसूस न हुआ हो, या इसके साथ उल्टी, बेहोशी, कमजोरी या बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य सिरदर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ब्रेन एन्यूरिज्म एक गंभीर लेकिन कई मामलों में समय रहते पहचानी जा सकने वाली बीमारी है। शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं, इसलिए इसे "साइलेंट किलर" भी कहा जाता है। यदि सिर के एक तरफ लगातार दर्द, आंखों में असामान्य परेशानी, धुंधला दिखाई देना या अचानक बेहद तेज सिरदर्द जैसे संकेत दिखाई दें, तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना, धूम्रपान से दूरी, स्वस्थ जीवनशैली अपनाना और जोखिम वाले लोगों में समय-समय पर जांच कराना इस गंभीर बीमारी से होने वाले खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

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