बार-बार पैरों में होती है झुनझुनी? कहीं शरीर दे तो नहीं रहा किसी बड़ी बीमारी का खतरनाक संकेत!
अक्सर लोग लंबे समय तक एक ही जगह बैठने, पैर मोड़कर रखने या सोते समय किसी एक करवट लेटे रहने के बाद पैरों में झुनझुनी महसूस करते हैं। आमतौर पर यह स्थिति कुछ मिनटों में अपने-आप ठीक हो जाती है और चिंता की बात नहीं होती। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस समय नसों पर अस्थायी दबाव पड़ता है और रक्त प्रवाह कुछ देर के लिए प्रभावित हो जाता है।
लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के पैरों में बार-बार झुनझुनी, सुन्नपन, जलन या चुभन महसूस होने लगे, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह शरीर में पोषण की कमी, नसों की बीमारी, मधुमेह या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है या इसके साथ दर्द, कमजोरी या चलने में कठिनाई भी हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
क्यों होती है पैरों में झुनझुनी?
झुनझुनी को मेडिकल भाषा में पैरेस्थीसिया (Paresthesia) कहा जाता है। यह तब होती है जब नसों पर दबाव पड़ता है या नसें किसी कारण से सही तरीके से काम नहीं कर पातीं। कई बार यह कुछ मिनटों के लिए होती है, लेकिन लगातार रहने वाली झुनझुनी किसी बीमारी की ओर इशारा कर सकती है।
आइए जानते हैं वे प्रमुख कारण, जिनकी वजह से पैरों में बार-बार झुनझुनी महसूस हो सकती है।
1. नसों पर दबाव (Pinched Nerve)
जब किसी नस पर लगातार दबाव पड़ता है, तो पैरों में झुनझुनी, सुन्नपन या हल्का दर्द महसूस हो सकता है। यह समस्या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने, रीढ़ की हड्डी में गड़बड़ी, स्लिप डिस्क या कमर की नस दबने के कारण भी हो सकती है।
यदि झुनझुनी के साथ कमर से पैर तक दर्द जाता है, तो यह साइटिका (Sciatica) का संकेत भी हो सकता है।
2. शरीर में जहरीले तत्वों का जमा होना
कुछ जहरीले रसायन और भारी धातुएं जैसे आर्सेनिक, मरकरी (Mercury), सीसा (Lead) या कुछ औद्योगिक रसायन नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके संपर्क में आने से पैरों में जलन, झुनझुनी, कमजोरी और संतुलन बिगड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
यदि किसी व्यक्ति का काम रसायनों के बीच होता है और उसे इस तरह के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
3. अत्यधिक शराब का सेवन
लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा शराब पीने से नसों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। इस स्थिति को अल्कोहॉलिक न्यूरोपैथी (Alcoholic Neuropathy) कहा जाता है।
इस बीमारी में पैरों में झुनझुनी, जलन, दर्द, सुन्नपन और मांसपेशियों की कमजोरी महसूस होने लगती है। समय रहते शराब छोड़ने और इलाज शुरू करने से स्थिति में सुधार संभव है।
4. एंजायटी और तनाव
मानसिक तनाव और एंजायटी केवल दिमाग को ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है। कई लोगों को घबराहट के दौरान हाथ-पैरों में झुनझुनी, तेज धड़कन, सांस फूलना, चक्कर आना और पसीना आने जैसी समस्याएं महसूस होती हैं।
यदि यह समस्या बार-बार हो रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है।
5. विटामिन B12 की कमी
विटामिन B12 नसों के स्वस्थ रहने के लिए बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी होने पर नसें धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती हैं।
इसके लक्षणों में शामिल हैं—
पैरों और हाथों में झुनझुनी
सुन्नपन
कमजोरी
लगातार थकान
चक्कर आना
याददाश्त कमजोर होना
चलने में संतुलन बिगड़ना
शाकाहारी लोगों और बुजुर्गों में इसकी कमी अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है।
6. डायबिटीज बन सकती है सबसे बड़ा कारण
मधुमेह (डायबिटीज) लंबे समय तक नियंत्रित न रहने पर नसों को नुकसान पहुंचाती है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।
इस स्थिति में सबसे पहले पैरों में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन और दर्द शुरू होता है। धीरे-धीरे पैरों की संवेदनशीलता कम हो सकती है, जिससे चोट लगने का पता भी नहीं चलता।
यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज है और पैरों में बार-बार झुनझुनी होती है, तो ब्लड शुगर की नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
7. खराब रक्त संचार
यदि पैरों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंचता, तो भी झुनझुनी महसूस हो सकती है।
धूम्रपान, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और हृदय संबंधी बीमारियां रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। इसके साथ पैरों में ठंडापन, दर्द और जल्दी थकान भी महसूस हो सकती है।
8. थायरॉयड की समस्या
हाइपोथायरॉयडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन की कमी भी नसों को प्रभावित कर सकती है।
इस स्थिति में वजन बढ़ना, थकान, ठंड ज्यादा लगना, त्वचा का रूखापन और पैरों में झुनझुनी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
9. किडनी की बीमारी
किडनी जब ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। ये पदार्थ नसों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे पैरों में झुनझुनी और जलन महसूस होने लगती है।
क्रोनिक किडनी डिजीज वाले मरीजों में यह समस्या अधिक देखी जाती है।
10. कुछ दवाओं का दुष्प्रभाव
कैंसर के इलाज में दी जाने वाली कुछ कीमोथेरेपी दवाएं, कुछ एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाएं भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं।
यदि किसी नई दवा के बाद झुनझुनी शुरू हुई है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद न करें, बल्कि तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
यदि पैरों की झुनझुनी के साथ निम्न लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें—
लगातार या बार-बार झुनझुनी होना
पैरों में तेज दर्द या जलन
चलने में परेशानी
मांसपेशियों में कमजोरी
पेशाब या मल पर नियंत्रण कम होना
अचानक शरीर के किसी हिस्से का सुन्न हो जाना
बोलने या देखने में दिक्कत
ये लक्षण किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या का संकेत हो सकते हैं।
बचाव के लिए क्या करें?
पैरों में झुनझुनी की समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं—
लंबे समय तक एक ही मुद्रा में न बैठें।
हर 30 से 40 मिनट में थोड़ा चलें-फिरें।
संतुलित और पौष्टिक आहार लें।
विटामिन B12 और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों की कमी न होने दें।
ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें।
शराब और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
नियमित व्यायाम करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
किसी भी लगातार रहने वाले लक्षण को नजरअंदाज न करें।
पैरों में कभी-कभार होने वाली झुनझुनी सामान्य हो सकती है, लेकिन यदि यह बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो यह शरीर का चेतावनी संकेत भी हो सकता है। विटामिन B12 की कमी, डायबिटीज, नसों पर दबाव, तनाव, खराब रक्त संचार, किडनी या थायरॉयड की बीमारी जैसी कई समस्याएं इसके पीछे हो सकती हैं।
समय रहते जांच और सही इलाज से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए यदि पैरों में झुनझुनी लगातार महसूस हो रही है, तो इसे हल्के में लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह जरूर लें। शुरुआती पहचान कई गंभीर जटिलताओं से बचा सकती है।

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