एनकाउंटर के बाद अचानक बढ़ने लगे भरत तिवारी के फॉलोअर्स! फेसबुक पर हजारों से पहुंची लाखों की संख्या, जांच के बीच नया पहलू चर्चा में
बिहार के आरा में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच अभी जारी है। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है और विभिन्न पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसी बीच इस मामले से जुड़ा एक नया पहलू सामने आया है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। दावा किया जा रहा है कि एनकाउंटर में मारे जाने के बाद भरत तिवारी के फेसबुक अकाउंट पर फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जहां पहले उनके फेसबुक अकाउंट पर कुछ हजार फॉलोअर्स थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 2.71 लाख तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर इस बदलाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने वास्तविक नए फॉलोअर्स हैं और कितने लोग केवल उनकी प्रोफाइल देखने के लिए पहुंचे।
न्यायिक जांच के बीच सोशल मीडिया बना चर्चा का विषय
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने पहले ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस छेड़ रखी है। घटना के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग गठित कर मामले की जांच शुरू कर दी। आयोग विभिन्न गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों का भी अध्ययन किया जा रहा है।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर भरत तिवारी के फेसबुक अकाउंट की गतिविधियां चर्चा का विषय बन गईं। कई लोग उनके पुराने वीडियो और फेसबुक लाइव देखने के लिए उनके अकाउंट पर पहुंच रहे हैं।
सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थे भरत तिवारी
स्थानीय लोगों के मुताबिक भरत तिवारी फेसबुक पर काफी सक्रिय रहते थे। वे अक्सर गांव, सामाजिक मुद्दों, प्रशासनिक समस्याओं और अपने दैनिक जीवन से जुड़े वीडियो पोस्ट करते थे।
बताया जाता है कि किसी भी घटना या मुद्दे पर वे अक्सर फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखते थे। गांव में होने वाले कार्यक्रमों से लेकर स्थानीय समस्याओं तक पर वे नियमित वीडियो साझा करते थे।
यही कारण है कि उनके निधन के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके पुराने वीडियो देखने के लिए उनके अकाउंट तक पहुंच रहे हैं।
अंतिम दिन भी किया था फेसबुक लाइव
ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी घटना वाले दिन भी फेसबुक लाइव आए थे। वायरल वीडियो में कथित तौर पर उनके सरेंडर से जुड़े कुछ दृश्य भी दिखाई देने का दावा किया जाता है।
हालांकि वायरल वीडियो की सामग्री और उसके संदर्भ की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही है। इसलिए किसी भी वायरल क्लिप को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।
कैसे बढ़ी फॉलोअर्स की संख्या?
सोशल मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि किसी चर्चित घटना के बाद संबंधित व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट पर लोगों की दिलचस्पी अचानक बढ़ जाना असामान्य नहीं है।
जब कोई मामला राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा में आता है, तो लोग उससे जुड़े व्यक्ति के पुराने पोस्ट, वीडियो और गतिविधियों को देखने लगते हैं। इससे फॉलोअर्स और प्रोफाइल विजिट्स दोनों में तेजी आ सकती है।
भरत तिवारी के मामले में भी स्थानीय स्तर पर यही कारण बताया जा रहा है।
ग्रामीणों ने क्या कहा?
गांव के कई युवाओं का कहना है कि भरत तिवारी की आदत थी कि वे लगभग हर महत्वपूर्ण घटना पर लाइव आकर अपनी बात रखते थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार—
वे प्रशासनिक मुद्दों पर भी वीडियो बनाते थे।
गांव की समस्याओं को सोशल मीडिया के माध्यम से उठाते थे।
यात्रा और सामाजिक कार्यक्रमों के वीडियो भी साझा करते थे।
मोबाइल फोन हमेशा उनके साथ रहता था।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मौत के बाद लोग उनके पुराने वीडियो देखने के लिए बड़ी संख्या में उनके फेसबुक पेज पर पहुंच रहे हैं।
जांच एजेंसियां भी देख रही हैं डिजिटल रिकॉर्ड
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं। इसमें सोशल मीडिया पोस्ट, लाइव वीडियो, मोबाइल डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।
हालांकि अधिकारियों की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
डिजिटल साक्ष्य किसी भी आपराधिक जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन उनकी प्रमाणिकता की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही होती है।
फर्जी पेज भी आने लगे सामने
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद भरत तिवारी के नाम से सोशल मीडिया पर कई नए पेज और प्रोफाइल भी दिखाई देने लगे हैं।
कुछ पेज उनके नाम पर बनाए गए हैं, जबकि कुछ स्वयं को उनके समर्थकों या प्रशंसकों का पेज बता रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में लोगों को केवल आधिकारिक या पहले से सत्यापित अकाउंट पर ही भरोसा करना चाहिए और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचना चाहिए।
सोशल मीडिया और चर्चित घटनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी चर्चित व्यक्ति या विवादित घटना के बाद सोशल मीडिया गतिविधि का बढ़ना एक सामान्य डिजिटल प्रवृत्ति है।
पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु या किसी बड़े विवाद के बाद—
पुराने वीडियो वायरल होने लगते हैं।
फॉलोअर्स तेजी से बढ़ जाते हैं।
पुराने पोस्ट दोबारा साझा किए जाते हैं।
नए फैन पेज बनने लगते हैं।
हालांकि इससे किसी व्यक्ति के बारे में कानूनी या तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते।
जांच पूरी होने का इंतजार
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की जांच फिलहाल न्यायिक आयोग और संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। मामले से जुड़े तथ्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी दावे या वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले के बीच उनके फेसबुक अकाउंट पर फॉलोअर्स की संख्या में अचानक हुई बढ़ोतरी चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी सोशल मीडिया पर सक्रियता और वायरल वीडियो के कारण बड़ी संख्या में लोग उनके पुराने पोस्ट देखने के लिए अकाउंट तक पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर, मामले की न्यायिक जांच जारी है और जांच एजेंसियां उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में इस मामले से जुड़े किसी भी दावे पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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