शुगर बढ़ने से पहले शरीर देता है ये 7 खतरनाक संकेत, ज्यादातर लोग कर देते हैं नजरअंदाज!
डायबिटीज़ (मधुमेह) आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में से एक बन चुकी है। पहले इसे केवल बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब कम उम्र के युवाओं और बच्चों में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनके शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज़ अचानक नहीं होती। शरीर पहले ही कई ऐसे संकेत देने लगता है जिन्हें लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यदि इन शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और डॉक्टर से जांच कराई जाए, तो बीमारी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं के खतरे को कम किया जा सकता है।
डायबिटीज़ क्या है?
डायबिटीज़ एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इंसुलिन वह हार्मोन है जो रक्त में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाकर ऊर्जा में बदलने का काम करता है।
जब यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो ब्लड शुगर बढ़ने लगती है। लंबे समय तक शुगर का स्तर अधिक रहने पर आंखों, किडनी, नसों, हृदय और पैरों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
1. बार-बार प्यास लगना
यदि आपको सामान्य से ज्यादा प्यास लग रही है और बार-बार पानी पीने की जरूरत महसूस होती है, तो यह बढ़े हुए ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है।
जब शरीर में ग्लूकोज अधिक हो जाता है, तो किडनी अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करती है। इससे शरीर में पानी की कमी होने लगती है और बार-बार प्यास लगती है।
2. बार-बार पेशाब आना
दिन और रात दोनों समय बार-बार पेशाब आने की समस्या डायबिटीज़ का शुरुआती संकेत हो सकती है।
यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है और इसके साथ अत्यधिक प्यास भी लग रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड शुगर की जांच कराना उचित रहेगा।
3. बिना कारण वजन कम होना
अगर आपका खान-पान सामान्य है लेकिन फिर भी तेजी से वजन कम हो रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
जब शरीर ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाता, तो वह ऊर्जा के लिए वसा और मांसपेशियों को तोड़ना शुरू कर देता है। इससे वजन घट सकता है।
4. हर समय थकान महसूस होना
भरपूर नींद लेने के बावजूद कमजोरी और थकान बनी रहना भी डायबिटीज़ का संकेत हो सकता है।
क्योंकि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती, इसलिए व्यक्ति को हर समय थकावट महसूस हो सकती है।
5. धुंधला दिखाई देना
ब्लड शुगर बढ़ने का असर आंखों पर भी पड़ सकता है।
कुछ लोगों को अचानक धुंधला दिखाई देने लगता है या पढ़ने में परेशानी होने लगती है। यदि ऐसा बार-बार हो रहा है, तो आंखों की जांच के साथ ब्लड शुगर की जांच भी करानी चाहिए।
6. घाव देर से भरना
यदि छोटी चोट या कट भी कई दिनों तक ठीक नहीं हो रहा, तो यह शरीर में बढ़ी हुई शुगर का संकेत हो सकता है।
उच्च ब्लड शुगर रक्त संचार और शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
7. हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
डायबिटीज़ लंबे समय तक अनियंत्रित रहने पर नसों को नुकसान पहुंचा सकती है।
यदि पैरों या हाथों में बार-बार झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किन लोगों में अधिक होता है खतरा?
डायबिटीज़ का खतरा निम्न स्थितियों में बढ़ सकता है—
परिवार में किसी को डायबिटीज़ होना
अधिक वजन या मोटापा
शारीरिक गतिविधि की कमी
हाई ब्लड प्रेशर
असंतुलित खान-पान
धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन
बढ़ती उम्र
हालांकि, आजकल कम उम्र के लोगों में भी जीवनशैली से जुड़े कारणों की वजह से इसका जोखिम बढ़ रहा है।
डायबिटीज़ से बचाव के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्वस्थ आदतें अपनाकर जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नियमित व्यायाम या तेज चाल से पैदल चलना।
संतुलित और फाइबर युक्त आहार लेना।
मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करना।
पर्याप्त नींद लेना।
तनाव को नियंत्रित रखना।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराना, खासकर यदि परिवार में डायबिटीज़ का इतिहास हो।
कब करानी चाहिए जांच?
यदि ऊपर बताए गए एक या अधिक लक्षण लगातार दिखाई दें, या आपकी उम्र 35–40 वर्ष से अधिक है और जोखिम कारक मौजूद हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर ब्लड शुगर की जांच कराना उचित रहेगा। समय पर जांच से बीमारी का पता जल्दी चल सकता है और उचित उपचार तथा जीवनशैली में बदलाव के जरिए जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
डायबिटीज़ ऐसी बीमारी है जो शुरुआती चरण में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद हो सकती है। वहीं कई लोगों में शरीर छोटे-छोटे संकेत पहले से देने लगता है। इन संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि न केवल डायबिटीज़ के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है, बल्कि यदि बीमारी हो भी जाए तो उसे बेहतर ढंग से नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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