बारिश में आया तेज बुखार तो हो जाएं सावधान! मलेरिया, डेंगू या चिकनगुनिया... जानिए कैसे करें सही पहचान
बरसात का मौसम जहां भीषण गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं यह अपने साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। बारिश के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के मामले भी बढ़ने लगते हैं। हर साल मानसून के दौरान देश के कई राज्यों में इन बीमारियों के हजारों मामले सामने आते हैं।
सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इन तीनों बीमारियों की शुरुआत लगभग एक जैसी होती है। तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण होने पर आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर कौन-सी बीमारी हुई है। कई बार लोग इसे सामान्य वायरल बुखार समझकर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर डॉक्टर से जांच कराना इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। हालांकि इन तीनों बीमारियों में कुछ ऐसे विशेष लक्षण भी होते हैं, जिनकी मदद से इनके बीच अंतर समझा जा सकता है।
बारिश में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
मानसून के दौरान घरों, गलियों, पार्कों और खुले स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। यही जमा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है।
कुछ ही दिनों में यहां हजारों मच्छर पैदा हो जाते हैं, जो लोगों को काटकर संक्रमण फैलाते हैं। यदि समय रहते सफाई और बचाव के उपाय नहीं किए जाएं तो पूरे इलाके में संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
मलेरिया क्या है और कैसे फैलता है?
मलेरिया एक परजीवी (Parasite) से होने वाली बीमारी है। यह संक्रमित मादा एनोफिलीज (Anopheles) मच्छर के काटने से फैलती है।
जब संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है, तो परजीवी उसके शरीर में पहुंच जाता है और धीरे-धीरे रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करने लगता है।
समय पर इलाज न मिलने पर मलेरिया गंभीर रूप ले सकता है और कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकता है।
डेंगू कैसे होता है?
डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो एडीज (Aedes) मच्छर के काटने से फैलता है।
यह मच्छर विशेष रूप से दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है और साफ पानी में पनपता है।
अधिकांश मरीजों में डेंगू सामान्य रूप से ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर डेंगू (Severe Dengue) में बदल सकता है, जिससे प्लेटलेट्स कम होने, आंतरिक रक्तस्राव और अन्य जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।
चिकनगुनिया क्या है?
चिकनगुनिया भी वायरस से होने वाली बीमारी है और यह भी एडीज मच्छर के काटने से फैलती है।
इस बीमारी की सबसे बड़ी पहचान तेज जोड़ों का दर्द है।
कई मरीजों में बुखार उतर जाने के बाद भी कई सप्ताह या महीनों तक हाथ, पैर, घुटनों और कलाई के जोड़ों में दर्द बना रह सकता है।
मलेरिया के लक्षण कैसे पहचानें?
मलेरिया के मरीज में कुछ खास लक्षण दिखाई देते हैं—
तेज बुखार जो एक निश्चित अंतराल पर आता है।
ठंड लगना और कंपकंपी।
अत्यधिक पसीना आना।
सिरदर्द।
बदन दर्द।
मतली या उल्टी।
कमजोरी और थकान।
बुखार उतरने के बाद भी लंबे समय तक कमजोरी महसूस होना।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बुखार बार-बार लौटकर आए और उसके साथ ठंड व पसीना भी हो, तो मलेरिया की जांच जरूर करानी चाहिए।
डेंगू के लक्षण क्या हैं?
डेंगू की शुरुआत अचानक तेज बुखार से होती है।
इसके साथ निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
तेज सिरदर्द।
आंखों के पीछे दर्द।
मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द।
मतली और उल्टी।
त्वचा पर लाल चकत्ते।
अत्यधिक कमजोरी।
यदि डेंगू गंभीर रूप ले ले तो मरीज में—
पेट में तेज दर्द।
लगातार उल्टी।
नाक या मसूड़ों से खून आना।
सांस लेने में परेशानी।
प्लेटलेट्स तेजी से कम होना।
अत्यधिक कमजोरी।
जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
चिकनगुनिया की पहचान कैसे करें?
चिकनगुनिया में भी तेज बुखार आता है, लेकिन इसकी सबसे प्रमुख पहचान जोड़ों का असहनीय दर्द है।
मरीज में निम्न लक्षण देखे जा सकते हैं—
तेज बुखार।
हाथ और कलाई में दर्द।
घुटनों में दर्द।
टखनों और पैरों के जोड़ों में सूजन।
सिरदर्द।
शरीर दर्द।
त्वचा पर चकत्ते।
अत्यधिक थकान।
इस बीमारी में कई मरीजों को महीनों तक जोड़ों का दर्द बना रह सकता है।
तीनों बीमारियों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?
हालांकि शुरुआती लक्षण लगभग एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण अंतर इन्हें अलग पहचानने में मदद करते हैं।
मलेरिया
कारण: परजीवी।
फैलाने वाला मच्छर: एनोफिलीज।
मुख्य लक्षण: ठंड लगना, पसीना आना और बार-बार बुखार लौटना।
डेंगू
कारण: वायरस।
फैलाने वाला मच्छर: एडीज।
मुख्य लक्षण: आंखों के पीछे दर्द, प्लेटलेट्स कम होना और खून बहने का खतरा।
चिकनगुनिया
कारण: वायरस।
फैलाने वाला मच्छर: एडीज।
मुख्य लक्षण: लंबे समय तक रहने वाला जोड़ों का तेज दर्द।
क्या खुद से पहचान कर इलाज करना सही है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल लक्षण देखकर बीमारी तय करना सही नहीं है।
क्योंकि—
सामान्य वायरल बुखार में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं।
एक ही व्यक्ति में कई संक्रमण एक साथ भी हो सकते हैं।
गलत दवा लेने से स्थिति और खराब हो सकती है।
इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड टेस्ट कराना सबसे जरूरी होता है।
कौन-सी जांच कराई जाती है?
डॉक्टर जरूरत के अनुसार विभिन्न जांच कर सकते हैं—
मलेरिया पैरासाइट टेस्ट।
रैपिड मलेरिया टेस्ट।
डेंगू एनएस1 (NS1) एंटीजन टेस्ट।
डेंगू IgM/IgG टेस्ट।
चिकनगुनिया एंटीबॉडी टेस्ट।
सीबीसी (Complete Blood Count)।
प्लेटलेट्स की जांच।
इन जांचों के आधार पर सही बीमारी की पुष्टि की जाती है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
इन तीनों बीमारियों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है।
इसके लिए—
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
कूलर का पानी नियमित बदलें।
गमलों की प्लेट साफ रखें।
पुराने टायर और कबाड़ में पानी जमा न होने दें।
पानी की टंकियों को ढककर रखें।
पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
मच्छर भगाने वाली क्रीम या स्प्रे का उपयोग करें।
रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें।
घर की खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगवाएं।
कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
यदि मरीज में निम्न में से कोई भी लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें—
तेज बुखार दो दिन से अधिक बना रहे।
सांस लेने में परेशानी हो।
लगातार उल्टी हो रही हो।
नाक या मसूड़ों से खून आए।
शरीर या जोड़ों में असहनीय दर्द हो।
मरीज बेहोश होने लगे।
अत्यधिक कमजोरी महसूस हो।
भ्रम, दौरे या मानसिक स्थिति में बदलाव दिखाई दे।
समय पर जांच से बच सकती है जान
बरसात के मौसम में तेज बुखार को कभी भी सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया तीनों ही गंभीर बीमारियां हैं, लेकिन समय पर जांच और सही इलाज मिलने पर अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार के साथ ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का अनुभव हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने या घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना ही सुरक्षित विकल्प है।

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