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'मुसलमानों को सरकारी पदों से बैन करो'... ट्रंप की करीबी नेता के बयान से अमेरिका में मचा सियासी तूफान, मेयर पर लगाए गंभीर आरोप

 


अमेरिका में एक बार फिर धर्म और राजनीति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी मानी जाने वाली राजनीतिक कार्यकर्ता लॉरा लूमर के एक बयान ने पूरे देश में तीखी बहस छेड़ दी है। लूमर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए न केवल अमेरिका में मुसलमानों के सरकारी पदों पर नियुक्ति और चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, बल्कि न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनके इन बयानों के बाद अमेरिकी राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों और कई राजनीतिक विश्लेषकों ने लूमर की टिप्पणियों को भड़काऊ और भेदभावपूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की है। वहीं ट्रंप समर्थकों का एक वर्ग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।

मेयर के बयान के बाद शुरू हुआ पूरा विवाद

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तीखी आलोचना की।

वीडियो में ममदानी ने गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई का उल्लेख करते हुए नेतन्याहू को "युद्ध अपराधी" बताया और कहा कि यदि वे न्यूयॉर्क आते हैं तो अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के वारंट का सम्मान करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

ममदानी ने अपने बयान में गाजा में नागरिकों की मौत, अस्पतालों पर हमलों और मानवीय संकट का भी जिक्र किया। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

लॉरा लूमर ने सोशल मीडिया पर साधा निशाना

मेयर के बयान के जवाब में लॉरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई पोस्ट साझा किए।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की सुरक्षा तब तक पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकती जब तक देश में "मुस्लिम बैन" को व्यापक रूप से लागू नहीं किया जाता।

लूमर ने यह भी कहा कि यह प्रतिबंध केवल कुछ देशों से आने वाले लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि मुसलमानों के चुनाव लड़ने और सरकारी पदों पर नियुक्ति तक भी लागू किया जाना चाहिए।

उन्होंने लिखा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो भविष्य में जोहरान ममदानी जैसे और नेता सामने आएंगे, जो उनके अनुसार अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ विचार रखते हैं।

मेयर पर लगाए गंभीर आरोप

लॉरा लूमर ने अपने पोस्ट में जोहरान ममदानी को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने दावा किया कि ममदानी के संबंध ईरान और हमास जैसे संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

लूमर ने यह भी कहा कि उनके अनुसार ममदानी को कभी एफबीआई से सुरक्षा मंजूरी (Security Clearance) नहीं मिल सकती।

उन्होंने यह दावा भी किया कि एफबीआई के कुछ अधिकारियों को ममदानी के बारे में गंभीर सुरक्षा संबंधी आशंकाएं हैं। हालांकि एफबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

बढ़ा राजनीतिक विवाद

लूमर के बयानों के बाद अमेरिका में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।

रिपब्लिकन समर्थकों का एक वर्ग उनके बयान को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से सही ठहरा रहा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के विचारों और विदेशी संगठनों के प्रति उनके रुख की जांच होना आवश्यक है।

वहीं डेमोक्रेटिक नेताओं और कई स्वतंत्र विश्लेषकों ने इस बयान को धार्मिक आधार पर भेदभाव फैलाने वाला बताया है।

उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक समुदाय को सामूहिक रूप से निशाना बनाना अमेरिकी संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई आपत्ति

लूमर के बयान के बाद कई मानवाधिकार संगठनों और मुस्लिम संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी।

उनका कहना है कि किसी नागरिक को केवल उसके धर्म के आधार पर सरकारी पदों से दूर रखने की मांग संविधान में समान अधिकारों की भावना के खिलाफ है।

कई संगठनों ने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेद होना अलग बात है, लेकिन पूरे समुदाय को संदेह की नजर से देखना समाज में विभाजन पैदा कर सकता है।

क्या अमेरिका में ऐसा प्रतिबंध संभव है?

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करता है।

संविधान के अनुसार किसी व्यक्ति को केवल उसके धर्म के आधार पर सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता।

अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद VI (Article VI) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी सार्वजनिक पद के लिए धार्मिक परीक्षा (Religious Test) नहीं ली जा सकती।

इसी कारण विशेषज्ञ मानते हैं कि धर्म के आधार पर चुनाव लड़ने या सरकारी पद संभालने पर प्रतिबंध लगाने जैसी मांग को कानूनी रूप से लागू करना बेहद कठिन होगा।

पहले भी विवादों में रह चुकी हैं लॉरा लूमर

लॉरा लूमर पहले भी अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रह चुकी हैं।

उन्होंने कई बार आव्रजन, इस्लाम, राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी मुद्दों पर तीखी टिप्पणियां की हैं।

उनके कई सोशल मीडिया पोस्ट पहले भी व्यापक बहस का विषय बने हैं।

हालांकि ट्रंप समर्थकों के बीच उनका प्रभाव माना जाता है, लेकिन उनके कई बयान मुख्यधारा की राजनीति में भी विवाद पैदा करते रहे हैं।

इजरायल-गाजा युद्ध को लेकर बढ़ी राजनीतिक खाई

गाजा युद्ध के बाद अमेरिका की राजनीति में इजरायल और फिलिस्तीन को लेकर मतभेद लगातार गहरे हुए हैं।

एक ओर इजरायल के समर्थन में खड़े नेता हैं, जबकि दूसरी ओर गाजा में मानवीय संकट को लेकर चिंता जताने वाले नेता और सामाजिक संगठन हैं।

इसी पृष्ठभूमि में ममदानी का बयान सामने आया, जिसके बाद यह नया विवाद शुरू हुआ।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की राय बंटी हुई दिखाई दे रही है।

कुछ लोग लूमर के बयान का समर्थन करते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रहे हैं।

वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स का कहना है कि किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

लूमर द्वारा एफबीआई और ममदानी को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एफबीआई की ओर से भी इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।

इसी तरह ममदानी के कथित विदेशी संगठनों से संबंधों को लेकर भी कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है।

अमेरिकी राजनीति में फिर बढ़ा ध्रुवीकरण

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल दो नेताओं के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका में धर्म, राष्ट्रीय सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

आने वाले दिनों में यदि इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं, तो यह बहस और तेज हो सकती है। फिलहाल अमेरिका में इस मामले को लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के बीच तीखी चर्चा जारी है।

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