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"एक घंटे का समय दिया था, फिर किसानों ने बदल दिया फैसला", जेवर एयरपोर्ट को लेकर सीएम योगी ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

 


लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जेवर क्षेत्र के किसानों से संवाद करते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) परियोजना से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि जब राज्य सरकार ने जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने का फैसला किया था, तब जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया था। शुरुआती दौर में किसानों ने अपनी जमीन देने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन संवाद और विश्वास के जरिए स्थिति बदली और आज वही परियोजना उत्तर प्रदेश के विकास का नया प्रतीक बन चुकी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी बड़े विकास कार्य के लिए जनसहयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां किसानों के सहयोग और विश्वास के कारण एक ऐतिहासिक परियोजना को धरातल पर उतारा जा सका।

कैबिनेट से मंजूरी के बाद शुरू हुई चुनौती

मुख्यमंत्री ने बताया कि जब राज्य सरकार की कैबिनेट ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रस्ताव को मंजूरी दी, तब प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि 100 दिनों के भीतर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। सरकार चाहती थी कि परियोजना में किसी प्रकार की देरी न हो और विकास कार्य जल्द से जल्द शुरू हो जाए।

हालांकि प्रारंभिक चरण में प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने अधिकारियों से समीक्षा की तो पता चला कि जमीन अधिग्रहण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई थी। इसके बाद उन्होंने स्वयं स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया।

उन्होंने बताया कि वह नोएडा पहुंचे और वहां अधिकारियों के साथ बैठक की। समीक्षा के दौरान स्पष्ट हो गया कि किसानों के विरोध और संवाद की कमी के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

किसानों ने कहा- जमीन नहीं देंगे

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उस दिन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में करीब 100 किसानों के साथ बैठक की थी। बैठक का उद्देश्य किसानों को परियोजना के महत्व और उसके संभावित लाभों के बारे में जानकारी देना था।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब उन्होंने किसानों से एयरपोर्ट निर्माण के लिए जमीन देने का अनुरोध किया, तब उन्हें स्पष्ट शब्दों में जवाब मिला कि किसान अपनी जमीन नहीं देंगे।

उन्होंने कहा कि किसानों की चिंताएं स्वाभाविक थीं। जमीन किसी भी किसान की सबसे बड़ी पूंजी होती है और उसके साथ भावनात्मक जुड़ाव भी होता है। इसलिए किसानों को विश्वास में लेना आवश्यक था।

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने किसानों से कहा कि वह उन्हें एक घंटे का समय दे रहे हैं। इस दौरान उन्होंने विस्तार से समझाया कि एयरपोर्ट केवल एक परियोजना नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाला कदम साबित होगा।

"समय सबका आता है"

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने किसानों से कहा था कि समय सबका आता है। कुछ लोग अवसरों का लाभ उठाकर आगे बढ़ जाते हैं जबकि कुछ लोग अवसर खोकर पीछे रह जाते हैं।

उन्होंने किसानों को समझाया कि यदि एयरपोर्ट बनता है तो केवल सरकार को नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र को फायदा होगा। रोजगार बढ़ेंगे, उद्योग आएंगे, व्यापार बढ़ेगा और जमीनों का मूल्य कई गुना बढ़ जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार किसानों ने उनकी बातों पर विश्वास किया और धीरे-धीरे परियोजना के समर्थन में आ गए। इसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ी और प्रशासन ने युद्ध स्तर पर काम शुरू किया।

13 हजार एकड़ से अधिक जमीन पर हुआ काम

मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों के सहयोग के बाद यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) और नागरिक उड्डयन विभाग ने तेजी से कार्य किया।

परिणामस्वरूप 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि पर पहले चरण का विकास कार्य शुरू हुआ और आज परियोजना एक नई पहचान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि यह केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह परियोजना दर्शाती है कि यदि सरकार और जनता मिलकर काम करें तो बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

चार चरणों में विकसित होगा एयरपोर्ट

मुख्यमंत्री ने किसानों को बताया कि जेवर एयरपोर्ट का विकास चार चरणों में किया जा रहा है। पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है और आने वाले वर्षों में परियोजना का विस्तार लगातार जारी रहेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार पूरा एयरपोर्ट विकसित होने के बाद यह देश के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल होगा। इसके माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्री तथा माल परिवहन को नई गति मिलेगी।

राज्य सरकार का मानना है कि एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग और व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।

किसानों के लिए नए अवसर

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से किसानों के भविष्य की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जेवर एयरपोर्ट केवल यात्रियों के लिए नहीं बल्कि किसानों के लिए भी एक बड़ा अवसर लेकर आ रहा है।

उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट के साथ कार्गो सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, जिससे कृषि उत्पादों को देश और दुनिया के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार अभी कई बार किसानों को अपनी उपज स्थानीय मंडियों में कम कीमत पर बेचनी पड़ती है। लेकिन बेहतर परिवहन और निर्यात सुविधाओं के माध्यम से उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिल सकेगी।

भारत का प्रमुख कार्गो और MRO हब बनने की तैयारी

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट भारत का एक प्रमुख कार्गो और MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) केंद्र बनने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अभी तक विमानों के रखरखाव और मरम्मत के लिए कई कंपनियों को सिंगापुर, दुबई और अन्य विदेशी केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन जेवर में विकसित होने वाली सुविधाएं इस स्थिति को बदल सकती हैं।

इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

आम किसानों की आय बढ़ाने का दावा

मुख्यमंत्री ने किसानों को उदाहरण देते हुए बताया कि आज एक किसान आम को स्थानीय बाजार में 50 रुपये प्रति किलो तक बेचता है। लेकिन यदि वही उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचे तो उसकी कीमत 800 से 1000 रुपये प्रति किलो तक मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि यदि कार्गो परिवहन की लागत लगभग 200 रुपये प्रति किलो भी मान ली जाए, तब भी किसान को 600 रुपये प्रति किलो तक का लाभ मिल सकता है।

मुख्यमंत्री का कहना था कि यही वह बदलाव है जो आधुनिक आधारभूत संरचना किसानों के जीवन में ला सकती है।

विकास और विश्वास का मॉडल

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर एयरपोर्ट परियोजना विकास और विश्वास का मॉडल है। उन्होंने किसानों के सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया और कहा कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश के सबसे बड़े आर्थिक केंद्रों में शामिल होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल सड़क, एयरपोर्ट या उद्योग बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे अवसर तैयार करना है जिससे किसानों, युवाओं और आम नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

जेवर एयरपोर्ट परियोजना आज उत्तर प्रदेश के विकास एजेंडे की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में गिनी जा रही है और सरकार को उम्मीद है कि इसके पूरा होने के बाद यह क्षेत्र रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र बनकर उभरेगा।

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