सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए आई सबसे चौंकाने वाली खबर! कीमतें धड़ाम, फिर भी बाजार से गायब हुए खरीदार, आखिर क्या है वजह?
देश में सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने निवेशकों से लेकर आम ग्राहकों तक सभी को हैरान कर दिया है। कुछ समय पहले तक सोने-चांदी की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही थीं। निवेशक गोल्ड और सिल्वर में पैसा लगाकर शानदार मुनाफे की उम्मीद कर रहे थे। वहीं, जिन लोगों को शादी-ब्याह या दूसरे शुभ अवसरों के लिए सोने के आभूषण खरीदने थे, वे लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान थे। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदलती दिखाई दे रही है। सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट के बावजूद बाजार में खरीदारों की भीड़ नहीं उमड़ रही है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि भारत में सोने की मांग पिछले छह साल के निचले स्तर पर पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान आमतौर पर सोने की खरीदारी में जबरदस्त उछाल आता है, लेकिन इस बार बाजार का माहौल कुछ अलग दिखाई दे रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट ने भी भारतीय बाजार को लेकर कई चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं।
सोने की कीमतों में हजारों रुपये और चांदी में लाखों रुपये की गिरावट के बाद भी लोग खरीदारी से दूरी क्यों बना रहे हैं? क्या आने वाले दिनों में सोना और सस्ता हो सकता है? आइए समझते हैं इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की वजह।
छह साल के निचले स्तर पर पहुंच सकती है भारत में सोने की मांग
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सोने की मांग में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, साल 2026 में भारत की कुल सोने की मांग लगभग 650 मीट्रिक टन के आसपास रह सकती है। यह पिछले कई वर्षों की तुलना में काफी कम स्तर है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर तिमाही में भारत में सोने की मांग लगभग 29 फीसदी गिरकर 162.5 मीट्रिक टन रह गई। इस दौरान सोने के आभूषणों की मांग में लगभग 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि गोल्ड निवेश में करीब 40 फीसदी की कमी आई।
ये आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां सोना सिर्फ निवेश का माध्यम नहीं है, बल्कि शादी-ब्याह, त्योहारों और पारिवारिक परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक परिस्थितियों ने ग्राहकों की खरीदारी की योजना को प्रभावित किया है।
सस्ता होने के बावजूद सोना क्यों नहीं खरीद रहे लोग?
आमतौर पर जब किसी वस्तु की कीमत गिरती है तो उसकी मांग बढ़ जाती है। लेकिन सोने के मामले में इस बार स्थिति कुछ अलग नजर आ रही है। सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद लोग जल्दबाजी में खरीदारी नहीं करना चाहते।
इसके पीछे सबसे बड़ी वजह आर्थिक अनिश्चितता और भविष्य में कीमतों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति है। बहुत से ग्राहक मानकर चल रहे हैं कि सोने की कीमतों में अभी और गिरावट आ सकती है। ऐसे में वे फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं।
दूसरी तरफ, महंगाई ने आम परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। खाद्य पदार्थों, ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ने से लोगों के पास बचत के लिए कम पैसा बच रहा है। ऐसे में सोने के आभूषण खरीदना कई परिवारों के लिए प्राथमिकता नहीं रह गया है।
इसके अलावा, जिन निवेशकों ने ऊंचे भाव पर सोना खरीदा था, वे मौजूदा गिरावट से परेशान हैं। कुछ निवेशक नुकसान कम करने के लिए बिकवाली कर रहे हैं, जबकि नए निवेशक बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं।
सोने के आभूषणों की मांग में 20 फीसदी की गिरावट
भारत में सोने की मांग घटने का एक बड़ा कारण ज्वेलरी बाजार में आई सुस्ती भी है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, सोने के आभूषणों की मांग में लगभग 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
इसका असर छोटे शहरों से लेकर बड़े महानगरों तक के ज्वेलरी कारोबार पर पड़ सकता है। त्योहारों और शादी के सीजन में आभूषणों की खरीदारी भारतीय बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन जब कीमतें बहुत अधिक उतार-चढ़ाव करती हैं, तो ग्राहक खरीदारी का फैसला लेने में समय लगाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोने की मांग प्रभावित होने की आशंका है। खेती-किसानी से होने वाली आमदनी, मानसून की स्थिति और कृषि खर्च का सीधा असर ग्रामीण परिवारों की खरीदारी क्षमता पर पड़ता है। यदि किसानों की आमदनी प्रभावित होती है, तो सोने के आभूषणों की खरीदारी भी कम हो सकती है।
प्रधानमंत्री की अपील और सोने की खरीदारी पर असर
सोने की मांग में गिरावट के बीच सोने के आयात को लेकर सरकारी स्तर पर की गई अपील भी चर्चा में है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसके लिए देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।
सोने का आयात बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ती है और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव पड़ सकता है। यही वजह है कि सोने की खरीदारी और आयात को लेकर समय-समय पर चिंता जताई जाती रही है।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने की अपील का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, मांग में गिरावट के पीछे केवल इस अपील को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। अंतरराष्ट्रीय बाजार, घरेलू महंगाई, सोने की ऊंची कीमतें और निवेशकों की बदलती रणनीति भी इसके महत्वपूर्ण कारण हैं।
जनवरी से अब तक सोने और चांदी में कितनी आई गिरावट?
सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों को सबसे ज्यादा चौंकाया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 में सोने की कीमत लगभग 1.79 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई थी। अब इसकी कीमत घटकर लगभग 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बताई जा रही है।
इस तरह सोने की कीमत में लगभग 41 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट देखने को मिली है।
चांदी की स्थिति इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली है। 29 जनवरी को चांदी की कीमत लगभग 3.89 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। अब यह गिरकर लगभग 1,77,300 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।
इसका मतलब है कि चांदी में प्रति किलोग्राम दो लाख रुपये से भी ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। जिन निवेशकों ने रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास चांदी खरीदी थी, उन्हें इस गिरावट से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
एक दिन में सोना 2,296 रुपये और चांदी 3,000 रुपये से ज्यादा टूटी
सोने और चांदी के बाजार में एक दिन की गिरावट ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड की कीमत लगभग 50 डॉलर गिरकर 3,897 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई।
वहीं, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने में लगभग 2,296 रुपये की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 1,37,920 रुपये तक पहुंच गया।
चांदी में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। एक दिन पहले जहां एक किलोग्राम चांदी का भाव 1,80,080 रुपये था, वहीं गिरावट के बाद यह लगभग 1,77,300 रुपये पर पहुंच गया।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की उपलब्ध रेटलिस्ट के अनुसार, सोने और चांदी के भाव इस प्रकार बताए गए हैं:
24 कैरेट सोना: 1,38,118 रुपये प्रति 10 ग्राम
22 कैरेट सोना: 1,26,516 रुपये प्रति 10 ग्राम
18 कैरेट सोना: 1,03,589 रुपये प्रति 10 ग्राम
चांदी: 1,77,300 रुपये प्रति किलोग्राम
ध्यान रखें कि ये दिए गए बाजार आंकड़े हैं। सोने-चांदी के वास्तविक खुदरा भाव शहर, टैक्स, जीएसटी और ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज के अनुसार अलग हो सकते हैं।
भारत में सोने का आयात भी तेजी से घटा
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता बाजारों में से एक है। देश अपनी जरूरत का लगभग 85 से 88 फीसदी सोना आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाला बदलाव भारतीय बाजार को सीधे प्रभावित करता है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 71.98 अरब डॉलर यानी करीब छह लाख करोड़ रुपये का सोना आयात किया था। इस दौरान लगभग 721 टन सोने का आयात हुआ।
लेकिन 2026 में तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है। सोने की ऊंची कीमतों और आयात शुल्क में बदलाव के कारण आयात पर असर पड़ा है।
सितंबर 2026 में भारत का आधिकारिक सोना आयात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 81 फीसदी गिरकर 1.8 अरब डॉलर रह जाने की बात कही गई है।
वहीं, अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान सोने का आयात 27 फीसदी गिरकर 19.27 अरब डॉलर बताया गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 26.51 अरब डॉलर था।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में भारत का कुल सोना आयात लगभग 625 से 675 टन के बीच रह सकता है।
क्या आने वाले दिनों में और सस्ता होगा सोना?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला अभी जारी रहेगा या बाजार दोबारा तेजी की ओर लौटेगा?
बाजार विशेषज्ञों की राय में सोने की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का बड़ा असर पड़ता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से सोने की दिशा प्रभावित हो सकती है।
आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या डॉलर मजबूत होता है, तो सोने पर दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं, वैश्विक अनिश्चितता और आर्थिक संकट के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं।
यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ लंबी अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं, लेकिन निकट अवधि में कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
निवेशकों और खरीदारों को क्या करना चाहिए?
सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट के बाद निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। केवल इस उम्मीद में निवेश करना कि कीमतें तुरंत वापस बढ़ जाएंगी, जोखिम भरा हो सकता है।
जो लोग शादी या किसी पारिवारिक जरूरत के लिए सोना खरीदना चाहते हैं, उन्हें अलग-अलग ज्वेलर्स के भाव और मेकिंग चार्ज की तुलना करनी चाहिए। वहीं, निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।
फिलहाल सोने और चांदी का बाजार एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां कीमतों में गिरावट के बावजूद खरीदारों का भरोसा पूरी तरह वापस नहीं लौटा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम होने, ब्याज दरों में बदलाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति के बाद कीमती धातुओं का बाजार किस दिशा में जाता है।

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