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B.Tech पास चपरासी ने बैंक में कैसे रचा करोड़ों का खेल? मैनेजरों के पासवर्ड याद कर FD की रकम उड़ाने का आरोप, PNB घोटाले में खुलेंगे कई राज!



ग्रेटर नोएडा के ऐच्छर गांव स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में खाताधारकों की रकम में कथित हेरफेर का मामला सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में अब एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने जांच को और दिलचस्प बना दिया है। बैंक में प्यून के पद पर तैनात बताई जा रही मुख्य आरोपी दीपांशी के पास बीटेक की डिग्री होने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि उसने बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की यूजर आईडी तथा पासवर्ड याद कर लिए थे और इसी का इस्तेमाल करके खाताधारकों की रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर की जाती रही।

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कथित तौर पर हेरफेर की गई रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए दीपांशी ने अपने गांव साकीपुर के कुछ लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में शामिल सात आरोपियों में से चार लोग दीपांशी के गांव के ही रहने वाले हैं। वहीं, कुछ अन्य आरोपी ऐच्छर गांव और आसपास के इलाकों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

बैंक प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच कराई और अपनी रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। दूसरी तरफ, पीड़ित खाताधारकों की शिकायत पर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने भी अज्ञात बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अब पुलिस बैंक प्रबंधन को नोटिस जारी कर घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मांगने की तैयारी कर रही है।

23 अक्टूबर को सामने आया था बैंक खातों में हेरफेर का मामला

यह पूरा मामला ग्रेटर नोएडा के बीटा-2 कोतवाली क्षेत्र के ऐच्छर गांव में संचालित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से जुड़ा है। 23 अक्टूबर को बड़ी संख्या में खाताधारकों के खातों से रकम में कथित हेरफेर की जानकारी सामने आने के बाद बैंक परिसर से लेकर बैंक प्रबंधन तक हड़कंप मच गया था।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, कई खाताधारकों की धनराशि को उनकी जानकारी या सहमति के बिना दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने का आरोप लगा। मामला सामने आने के बाद पीड़ित लोगों ने बैंक से शिकायत की और अपनी रकम के बारे में जानकारी मांगी। जब मामले की गंभीरता बढ़ी तो बैंक प्रबंधन ने भी आंतरिक स्तर पर जांच शुरू कर दी।

इस प्रकरण में तत्कालीन बैंक मैनेजर समेत छह बैंक कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने विभागीय जांच रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी। जांच में साकीपुर गांव निवासी दीपांशी को प्रमुख आरोपी के रूप में चिह्नित किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, मामले में सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

प्यून के पद पर तैनात थी दीपांशी, लेकिन बीटेक की डिग्री ने चौंकाया

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बैंक में प्यून के पद पर काम करने वाली कोई कर्मचारी खाताधारकों की रकम दूसरे खातों में कैसे ट्रांसफर कर सकती थी? बैंकिंग व्यवस्था में वित्तीय लेनदेन के लिए अलग-अलग स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की निर्धारित जिम्मेदारियां होती हैं। ऐसे में किसी कर्मचारी के पास दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड तक पहुंच कैसे बनी, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बैंक रिकॉर्ड में दीपांशी की नियुक्ति प्यून के पद पर दर्ज थी। लेकिन उसके पास बीटेक की डिग्री होने की बात सामने आई है। आरोप है कि वह तकनीकी रूप से काफी तेज थी और बैंक में काम करने के दौरान मैनेजर तथा अन्य कर्मचारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड पर नजर रखती थी।

बताया जा रहा है कि उसने अधिकारियों के लॉगिन से जुड़ी जानकारियां याद कर ली थीं। इसी आधार पर कथित तौर पर बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके खातों में लेनदेन किया गया। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि संबंधित लॉगिन का इस्तेमाल किसने किया, किन तारीखों पर किया गया और बैंक के कंप्यूटर सिस्टम में किस स्तर की पहुंच उपलब्ध थी।

यह भी जांच का विषय है कि क्या किसी अधिकारी ने अपनी लॉगिन जानकारी साझा की थी या फिर सुरक्षा व्यवस्था में किसी अन्य तरह की चूक हुई थी। बैंकिंग सिस्टम में यूजर आईडी और पासवर्ड की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी दूसरे व्यक्ति को इनका इस्तेमाल करने का अवसर मिला, तो यह केवल एक कर्मचारी की भूमिका का मामला नहीं रह जाता, बल्कि बैंक की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

जमीन अधिग्रहण का मुआवजा पाने वाले खाताधारक बने निशाना?

इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है। आरोप है कि दीपांशी ने ऐसे खाताधारकों को निशाना बनाया, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे की रकम मिली थी। इनमें कुछ लोग कम पढ़े-लिखे बताए जा रहे हैं, जिन्हें बैंकिंग प्रक्रिया और खाते से होने वाले डिजिटल लेनदेन की पूरी जानकारी नहीं थी।

ऐसे खाताधारकों के बैंक खातों में अपेक्षाकृत बड़ी धनराशि मौजूद थी। आरोपों के मुताबिक, इसी वजह से उनके खातों को कथित हेरफेर के लिए चुना गया। यदि किसी खाताधारक को नियमित रूप से अपना बैंक बैलेंस चेक करने या मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने की आदत नहीं थी, तो खाते से रकम निकलने की जानकारी तुरंत सामने नहीं आती थी।

बताया जा रहा है कि दीपांशी ने कुछ खाताधारकों को अपना निजी मोबाइल नंबर भी दे रखा था। जब वे बैंक आने की बात करते थे, तो आरोप है कि वह पहले ही उनसे संपर्क कर लेती थी। कई बार बैंक के बाहर आकर कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें वापस भेजने की बात भी सामने आई है।

जांच के दौरान यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि खाताधारकों को बैंक आने से रोकने के पीछे क्या उद्देश्य था और क्या ऐसा करके खाते से हुए लेनदेन की जानकारी छिपाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस और जांच एजेंसियां पीड़ित खाताधारकों के बयान लेकर इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ सकती हैं।

रकम ट्रांसफर करने के लिए गांव के लोगों के खातों का इस्तेमाल?

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि कथित रूप से हेरफेर की गई रकम को सीधे अपने खाते में रखने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके लिए दीपांशी ने कथित तौर पर अपने गांव साकीपुर के कुछ लोगों के खातों का इस्तेमाल किया।

सामने आई जानकारी के अनुसार, इस मामले में नामजद या जांच के दायरे में बताए जा रहे खाताधारकों में प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी और शांती देवी साकीपुर गांव के निवासी बताए गए हैं। दीपांशी भी इसी गांव की रहने वाली है।

इसके अलावा आशुतोष पाठक और सरोज देवी ऐच्छर गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, ये दोनों भी दीपांशी के पूर्व परिचित और करीबी रहे हैं। वहीं, एक अन्य आरोपी शालिनी मंडी श्याम नगर की रहने वाली बताई जा रही है।

हालांकि, किसी व्यक्ति के बैंक खाते में रकम ट्रांसफर होने मात्र से उसकी आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं होती। जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि संबंधित खाताधारकों को रकम के स्रोत की जानकारी थी या नहीं, उन्होंने जानबूझकर अपने खाते का इस्तेमाल होने दिया था या फिर वे भी इस कथित धोखाधड़ी से अनजान थे।

बैंक प्रबंधन को नोटिस देने की तैयारी, पुलिस भी करेगी जांच

बैंक प्रबंधन की ओर से विभागीय जांच रिपोर्ट सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अब केंद्रीय एजेंसी की जांच इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। वहीं, पीड़ित खाताधारकों की शिकायत पर बीटा-2 कोतवाली पुलिस ने भी अज्ञात बैंक कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

पुलिस अब बैंक प्रबंधन से घटनाक्रम से जुड़े तथ्य और दस्तावेज मांगने की तैयारी में है। इसके लिए बैंक को नोटिस जारी किया जा सकता है। पुलिस यह जानना चाहेगी कि बैंक में किस कर्मचारी की क्या जिम्मेदारी थी, संबंधित खातों से कब और कितनी रकम ट्रांसफर हुई और लेनदेन के दौरान किन यूजर आईडी का इस्तेमाल किया गया।

बीटा-2 कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही मामले के संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल पुलिस उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की जांच की तैयारी कर रही है।

जांच में इन सवालों के जवाब मिलना जरूरी

PNB की ऐच्छर शाखा का यह मामला केवल खातों से रकम ट्रांसफर होने तक सीमित नहीं है। इसमें बैंक के डिजिटल सुरक्षा तंत्र, कर्मचारियों की भूमिका और संदिग्ध खातों के इस्तेमाल जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू जुड़े हुए हैं।

जांच एजेंसियों के सामने कुछ अहम सवाल होंगे। क्या दीपांशी ने वास्तव में दूसरे अधिकारियों की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल किया था? क्या बैंक के किसी कर्मचारी ने उसे लॉगिन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई थी? जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई, उनके धारकों को इसकी जानकारी थी या नहीं? क्या कथित हेरफेर की पूरी रकम का पता लगाया जा चुका है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या पीड़ित खाताधारकों को उनकी रकम वापस मिल पाएगी?

इन सवालों के जवाब बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल लॉग, लेनदेन की तारीखों, खाताधारकों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच से सामने आ सकते हैं।

फिलहाल इस मामले में सीबीआई और पुलिस की जांच का इंतजार है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, लेकिन इस घटना ने बैंक खातों की सुरक्षा और कर्मचारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में कितनी रकम के हेरफेर की पुष्टि होती है और इस पूरे प्रकरण में किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

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