दिल्ली-NCR की हवा ने राजस्थान तक मचाई खलबली! 5 जिलों में GRAP की सख्ती, आखिर अब किन चीजों पर लगने वाली है रोक?
दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण ने अब राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल जिलों की भी चिंता बढ़ा दी है। दीपावली के आसपास बदलते मौसम, हवा की धीमी गति और प्रदूषण के दूसरे स्रोतों के बीच वायु गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP के तहत सख्ती बढ़ा दी है। इसका असर राजस्थान के उन जिलों में भी दिखाई देगा, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल हैं।
राजस्थान के अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिले GRAP के दायरे में आते हैं। कोटपूतली-बहरोड़ में यह व्यवस्था निर्धारित क्षेत्र के अनुसार लागू होगी। संबंधित विभागों को प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की निगरानी करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली में 21 अक्टूबर को AQI 244 दर्ज होने पर GRAP का पहला चरण लागू किया गया था। इसके बाद 2 नवंबर को AQI 324 तक पहुंचने पर CAQM ने पूरे दिल्ली-NCR में दूसरा चरण भी लागू कर दिया। यानी अब पहले और दूसरे चरण के लागू उपायों को साथ-साथ जारी रखना है।
दिल्ली की हवा बिगड़ी तो राजस्थान तक पहुंची सख्ती
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद CAQM ने 21 अक्टूबर को GRAP Stage-I लागू किया था। उस समय दिल्ली का AQI 244 दर्ज किया गया था, जो खराब श्रेणी में आता है। इसके बाद मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और हवा की गुणवत्ता में गिरावट के चलते 2 नवंबर को दिल्ली का AQI 324 तक पहुंच गया।
AQI के 301 से 400 के बीच पहुंचने पर हवा को बहुत खराब श्रेणी में रखा जाता है। इसी स्थिति को देखते हुए CAQM ने GRAP Stage-II लागू करने का आदेश दिया। आयोग ने सभी संबंधित एजेंसियों को पहले और दूसरे चरण के उपायों को सख्ती से लागू करने और लगातार निगरानी करने को कहा है।
इसका मतलब है कि प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। NCR में शामिल राजस्थान के जिलों को भी लागू निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करनी होगी।
राजस्थान के इन पांच जिलों पर रहेगा विशेष ध्यान
राजस्थान के जिन क्षेत्रों में GRAP के तहत प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू किए जाएंगे, उनमें प्रमुख रूप से ये जिले शामिल हैं:
अलवर
भरतपुर
डीग
खैरथल-तिजारा
कोटपूतली-बहरोड़
कोटपूतली-बहरोड़ जिले में निर्धारित तहसील क्षेत्र के अनुसार निर्देश लागू होंगे। इन इलाकों में सड़कों से उड़ने वाली धूल, निर्माण कार्यों से निकलने वाले कण, वाहनों का धुआं और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी।
प्रशासन और संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर भी उनका पालन हो।
सड़कों की सफाई से लेकर पानी के छिड़काव तक बढ़ेगी निगरानी
GRAP के पहले चरण में धूल को नियंत्रित करना एक प्रमुख प्राथमिकता है। इसके तहत सड़कों की नियमित मशीनीकृत सफाई कराने और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए जाते हैं।
सड़कों के किनारे जमा धूल और निर्माण सामग्री हवा के साथ उड़कर प्रदूषण बढ़ा सकती है। इसलिए स्थानीय निकायों को सफाई व्यवस्था मजबूत करनी होगी। अधिक धूल वाले इलाकों में पानी का छिड़काव और अन्य धूल नियंत्रण उपाय किए जाएंगे।
निर्माण स्थलों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। वहां निर्माण सामग्री को ढककर रखना, धूल को बाहर फैलने से रोकना और निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन करना जरूरी होगा। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।
खुले में कचरा जलाने वालों पर होगी कार्रवाई
प्रदूषण बढ़ने की एक वजह खुले में कचरा और अन्य अपशिष्ट जलाना भी है। GRAP के तहत खुले में कचरा जलाने पर रोक है। नगर निकायों और संबंधित विभागों को ऐसे मामलों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कई स्थानों पर कूड़ा, पत्तियां और अन्य अपशिष्ट खुले में जला दिए जाते हैं। इससे निकलने वाला धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को नियमित निरीक्षण करना होगा।
नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे कचरा जलाने के बजाय निर्धारित स्थानों पर उसका निस्तारण करें। आसपास कहीं खुले में कचरा जलता दिखाई दे तो संबंधित विभाग को इसकी सूचना दें।
वाहनों की जांच होगी तेज, PUC प्रमाणपत्र पर भी नजर
वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली-NCR के प्रदूषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में GRAP के तहत वाहनों की जांच तेज करने पर जोर दिया गया है।
परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी रखनी होगी। जिन वाहनों से अत्यधिक धुआं निकलता है, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
वाहन चालकों को अपने वाहनों का वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) प्रमाणपत्र रखना होगा। जांच के दौरान प्रमाणपत्र नहीं मिलने या प्रदूषण मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।
लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने वाहनों की समय-समय पर सर्विसिंग कराएं और अनावश्यक रूप से इंजन चालू रखकर खड़े न रहें। छोटी दूरी के लिए संभव हो तो सार्वजनिक परिवहन या साझा वाहन का इस्तेमाल करें।
होटल और ढाबों के तंदूर पर भी लागू हैं नियम
प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में होटल, ढाबे और रेस्तरां भी शामिल हैं। GRAP के तहत निर्धारित परिस्थितियों में तंदूर और अन्य खाना पकाने वाले उपकरणों में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू होता है। संबंधित प्रतिष्ठानों को नियमों के अनुसार स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करना होगा।
इसका उद्देश्य व्यावसायिक गतिविधियों से निकलने वाले धुएं को कम करना है। संबंधित एजेंसियों को होटल, रेस्तरां और ढाबों में नियमों की जांच करनी होगी।
डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी नियंत्रण
बिजली कटौती के दौरान इस्तेमाल होने वाले डीजल जनरेटर से भी प्रदूषण फैलता है। संशोधित GRAP व्यवस्था में DG सेट से जुड़े नियंत्रण उपायों को पहले चरण में शामिल किया गया है। निर्धारित मानकों और छूट के अनुसार ही इनका संचालन किया जा सकता है।
CAQM ने सितंबर 2026 में GRAP के कार्यक्रम में बदलाव को मंजूरी दी थी। इसके तहत DG सेट और कुछ बसों से जुड़े उपायों को दूसरे चरण से पहले चरण में स्थानांतरित किया गया। इसलिए अब इन नियमों का पालन पहले चरण के उपायों के साथ ही सुनिश्चित करना होगा।
निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर विशेष नजर
निर्माण और विध्वंस यानी C&D गतिविधियों से बड़ी मात्रा में धूल निकल सकती है। ऐसे में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों का पालन जरूरी है।
निर्माण सामग्री को खुले में रखने, मलबा सड़कों पर फैलाने और बिना उचित इंतजाम के तोड़फोड़ करने जैसी गतिविधियों पर निगरानी रखी जाएगी। संबंधित एजेंसियों को निर्माण स्थलों का निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई करने के निर्देश हैं।
इसके अलावा CAQM ने नवंबर के दौरान NCR में निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों को लेकर अलग से भी निर्देश जारी किए हैं। संबंधित विभागों को निर्धारित अवधि और छूट के प्रावधानों के अनुसार उनका पालन कराना होगा।
दीपावली और पटाखों से बढ़ सकती है चिंता
त्योहारों के दौरान पटाखों का इस्तेमाल भी वायु प्रदूषण को बढ़ा सकता है। पहले से खराब हवा की स्थिति में पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं।
बदलते मौसम में हवा की गति कम होने पर प्रदूषक तत्व वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इससे सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, खांसी और गले में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
नागरिक भी इन बातों का रखें ध्यान
प्रदूषण नियंत्रण केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है। आम नागरिक भी कुछ सावधानियां अपनाकर इसमें सहयोग कर सकते हैं।
निजी वाहन के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
वाहन का PUC प्रमाणपत्र वैध रखें।
कचरा और पत्तियां खुले में न जलाएं।
निर्माण सामग्री और मलबे को खुले में न छोड़ें।
अनावश्यक रूप से डीजल जनरेटर न चलाएं।
ट्रैफिक सिग्नल पर वाहन का इंजन बंद रखें।
प्रदूषण अधिक होने पर बाहर लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें।
अब संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय
GRAP का उद्देश्य हवा की गुणवत्ता और खराब होने से रोकना है। इसके तहत CAQM, राज्य सरकारों, नगर निकायों, परिवहन विभागों और अन्य संबंधित एजेंसियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होती है।
राजस्थान के NCR क्षेत्रों में भी सफाई, धूल नियंत्रण, वाहनों की जांच और निर्माण स्थलों की निगरानी जैसे उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करना होगा। अधिकारियों को नियमित समीक्षा करनी होगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर 2 नवंबर को बहुत खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद अब सभी की नजर हवा की गुणवत्ता में होने वाले बदलाव पर है। आने वाले दिनों में मौसम, हवा की गति और प्रदूषण के स्रोत तय करेंगे कि स्थिति में कितना सुधार होता है। फिलहाल राजस्थान के NCR जिलों में भी प्रदूषण नियंत्रण को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

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