चार देशों की बंद कमरे में हुई बैठक में आसिम मुनीर ने छेड़ा भारत का मुद्दा! इजरायल का नाम लेते ही सामने आई ऐसी बात, मच गई हलचल…
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख आसिम मुनीर एक बार फिर भारत को लेकर दिए गए कथित बयान के कारण चर्चा में हैं। इस बार मामला केवल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इजरायल का नाम भी जुड़ गया है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने दावा किया है कि 26 अक्टूबर 2026 को तेहरान में हुई चार देशों की बैठक के दौरान आसिम मुनीर ने भारत और इजरायल के बीच बढ़ते संबंधों पर चिंता जाहिर की थी। रेजाई के मुताबिक, मुनीर ने इन संबंधों को मुसलमानों और पाकिस्तान के खिलाफ बन रहे गठजोड़ के रूप में पेश किया।
इस दावे के सामने आने के बाद दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। सवाल उठ रहा है कि आखिर पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व को भारत और इजरायल की बढ़ती नजदीकियों से इतनी चिंता क्यों है? क्या भारत-इजरायल का रणनीतिक सहयोग पाकिस्तान की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा रहा है? और क्या इस मुद्दे को मुस्लिम देशों के सामने उठाकर पाकिस्तान क्षेत्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है?
हालांकि, इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। आसिम मुनीर की कथित टिप्पणी का विवरण मोहसेन रेजाई के इंटरव्यू और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सामने आया है। इस बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
26 अक्टूबर की बैठक में क्या हुआ था?
26 अक्टूबर 2026 को ईरान की राजधानी तेहरान में ईरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा, शांति और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था।
बैठक में पाकिस्तान की तरफ से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शामिल हुए। तुर्किये का प्रतिनिधित्व वहां की राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन ने किया। सऊदी अरब की ओर से रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान मौजूद थे, जबकि ईरान की तरफ से वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने बैठक में हिस्सा लिया। <Cite refs={["turn243352search3","turn243352search14","turn243352news27"]}/>
इस बैठक को ऐसे समय आयोजित किया गया, जब पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव बना हुआ था। क्षेत्रीय देशों के सामने सुरक्षा और सैन्य टकराव को रोकने की बड़ी चुनौती थी। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और बाहरी हस्तक्षेप के बिना क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
लेकिन बैठक के कुछ दिनों बाद मोहसेन रेजाई के एक इंटरव्यू ने इसे भारत-इजरायल संबंधों से जोड़कर नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया।
मोहसेन रेजाई ने आसिम मुनीर को लेकर क्या दावा किया?
लाहौर के समाचार आउटलेट 24 न्यूज एचडी ने ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB को दिए गए मोहसेन रेजाई के इंटरव्यू का हवाला देते हुए रिपोर्ट प्रकाशित की। इसमें दावा किया गया कि बैठक के दौरान आसिम मुनीर ने इजरायल के खतरे और हिंदुओं तथा यहूदियों के बीच बढ़ते संबंधों का मुद्दा उठाया था।
रेजाई के अनुसार, मुनीर ने इन संबंधों को मुसलमानों और पाकिस्तान के खिलाफ बन रही नजदीकी के तौर पर पेश किया। उनके बयान में भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक सहयोग को लेकर चिंता जाहिर किए जाने की बात कही गई।
इस दावे के सामने आने के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज हो गई। खास बात यह है कि भारत और इजरायल के रिश्ते केवल राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, कृषि और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग है।
हालांकि, यह भी स्पष्ट रहना चाहिए कि रेजाई ने जिस बातचीत का जिक्र किया, वह बंद कमरे में हुई बैठक से संबंधित है। इसलिए मुनीर के कथित शब्दों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित बयान की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। <Cite refs={["turn243352search0","turn243352search8","turn243352search12"]}/>
पाकिस्तान के पत्रकार नजम सेठी ने भी उठाया मुद्दा
इस मामले में पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार नजम सेठी की टिप्पणी भी चर्चा में आई है। उन्होंने अपने यूट्यूब कार्यक्रम में मोहसेन रेजाई के दावे पर बात करते हुए कहा कि हिंदुओं और यहूदियों के बीच बढ़ता गठजोड़ पाकिस्तान और मुस्लिम देशों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।
नजम सेठी ने रेजाई के बयान का हवाला देते हुए इस टिप्पणी को आसिम मुनीर से जोड़ा। उनके अनुसार, रेजाई जिस बातचीत का जिक्र कर रहे थे, उसमें मुनीर ने भारत और इजरायल के संबंधों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी।
इससे यह मुद्दा केवल ईरानी अधिकारी के दावे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान के मीडिया और राजनीतिक विश्लेषण के दायरे में भी पहुंच गया। हालांकि, नजम सेठी की टिप्पणी भी उसी कथित बातचीत के विवरण पर आधारित है। इसे अलग से किसी आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि नहीं माना जा सकता। <Cite refs={["turn243352search1","turn243352search0"]}/>
भारत और इजरायल के रिश्ते पाकिस्तान के लिए क्यों हैं अहम?
भारत और इजरायल के बीच पिछले कई वर्षों में रणनीतिक सहयोग बढ़ा है। दोनों देश रक्षा उपकरणों, मिसाइल प्रणालियों, ड्रोन, निगरानी तकनीक और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग करते हैं।
इसके अलावा कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच साझेदारी है। भारत के लिए इजरायल रक्षा तकनीक और सुरक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण साझेदार है, जबकि इजरायल के लिए भारत एक बड़ा बाजार और रणनीतिक भागीदार है।
भारत-इजरायल संबंधों को लेकर पाकिस्तान की चिंता का एक कारण यह भी हो सकता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित करता है। पाकिस्तान लंबे समय से भारत की सैन्य क्षमता और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक साझेदारियों पर नजर रखता आया है।
लेकिन भारत और इजरायल के बीच सहयोग को किसी धर्म विशेष के खिलाफ गठजोड़ बताना एक राजनीतिक व्याख्या है। दोनों देशों के संबंधों को मुख्य रूप से राष्ट्रीय हित, सुरक्षा, तकनीक और आर्थिक सहयोग के नजरिये से देखा जाना चाहिए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इजरायल ने किया था भारत का समर्थन
भारत और इजरायल की नजदीकी की चर्चा में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र भी महत्वपूर्ण है। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
इस दौरान इजरायल की तरफ से भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किए जाने की बात सामने आई थी। भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख का समर्थन किया था। उन्होंने आतंकवादियों के लिए सुरक्षित ठिकाने नहीं होने का संदेश भी दिया था।
इजरायल के इस रुख को भारत के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में देखा गया। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही होगी, क्योंकि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला समर्थन उसके लिए चिंता का विषय बन सकता है।
हालांकि, किसी एक देश का समर्थन किसी दूसरे देश के खिलाफ धार्मिक गठबंधन का प्रमाण नहीं होता। भारत और इजरायल के बीच संबंधों का आधार दोनों देशों के राष्ट्रीय हित और साझा रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं।
पहलगाम हमले से पहले भी हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर बयान दे चुके हैं मुनीर
आसिम मुनीर पहले भी हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच धार्मिक तथा सांस्कृतिक अंतर का जिक्र करते रहे हैं। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले से पहले पाकिस्तान में दिए गए एक संबोधन में उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के धर्म, रीति-रिवाज, परंपराओं और विचारों को अलग बताते हुए दो-राष्ट्र सिद्धांत का उल्लेख किया था।
उनके इस बयान को भारत-पाकिस्तान संबंधों और पाकिस्तान की राजनीतिक विचारधारा के संदर्भ में देखा गया था। भारत में इस तरह की बयानबाजी की आलोचना भी हुई थी।
अब रेजाई के दावे के बाद एक बार फिर मुनीर की राजनीतिक और वैचारिक टिप्पणियों पर चर्चा शुरू हो गई है। इस बार भारत के साथ इजरायल का नाम भी जोड़ दिया गया है, जिससे यह मुद्दा और व्यापक हो गया है।
क्या मुस्लिम देशों को एकजुट करने की कोशिश है?
इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी है। पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और ईरान जैसे देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत का अपना महत्व है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, इजरायल की सैन्य गतिविधियां, ईरान के साथ अमेरिका के संबंध और क्षेत्रीय संघर्ष इन देशों के लिए साझा चिंता के विषय हैं।
ऐसे माहौल में भारत-इजरायल संबंधों को मुस्लिम देशों की सुरक्षा से जोड़कर पेश करना पाकिस्तान की कूटनीतिक सोच का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि चार देशों की बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत के खिलाफ कोई रणनीति तैयार करना था।
बैठक से जुड़ी सार्वजनिक रिपोर्टों में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और सहयोग को प्रमुख मुद्दा बताया गया है। भारत के खिलाफ किसी साझा सैन्य या राजनीतिक कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। <Cite refs={["turn243352search3","turn243352search4","turn243352news27"]}/>
भारत-इजरायल संबंधों पर दुनिया की नजर
भारत और इजरायल के बीच बढ़ते संबंधों का असर केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। रक्षा तकनीक, आतंकवाद विरोधी सहयोग और पश्चिम एशिया की बदलती राजनीति के कारण दोनों देशों की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारत अपनी विदेश नीति में अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को राष्ट्रीय हितों के आधार पर आगे बढ़ाता है। इजरायल के साथ सहयोग के बावजूद भारत के अरब देशों और ईरान के साथ भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक तथा आर्थिक संबंध हैं। यही वजह है कि भारत की विदेश नीति को किसी एक धार्मिक या क्षेत्रीय खेमे से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
फिलहाल आसिम मुनीर की कथित टिप्पणी ने भारत-पाकिस्तान संबंधों के साथ-साथ भारत-इजरायल साझेदारी को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि पाकिस्तान की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं। साथ ही, मोहसेन रेजाई के दावे पर आगे क्या स्पष्टीकरण सामने आता है, इस पर भी नजर रहेगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत और इजरायल की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान की कूटनीतिक चिंता का नया मुद्दा बन गई है, या फिर इस बयान के जरिए क्षेत्रीय राजनीति में समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है?

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