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आंत में छिपा था कैंसर का बड़ा राज! 15 साल बाद वैज्ञानिकों ने खोज निकाली वो कड़ी, जिसने सबको चौंका दिया



नई दिल्ली। हमारे शरीर की आंत में अरबों-खरबों सूक्ष्मजीव मौजूद रहते हैं। इनमें से अधिकांश बैक्टीरिया शरीर के लिए उपयोगी या कम से कम सामान्य रूप से हानिरहित माने जाते हैं, लेकिन कुछ विशेष बैक्टीरिया और उनके द्वारा बनाए जाने वाले विषैले पदार्थ बीमारी की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं। अब वैज्ञानिकों ने ऐसे ही एक बैक्टीरिया से जुड़े कैंसर के रहस्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी खोज निकाली है।

जॉन्स हॉपकिंस किमेल कैंसर सेंटर, ब्लूमबर्ग-किमेल इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर इम्यूनोथेरेपी और जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन से जुड़े वैज्ञानिकों के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने पता लगाया है कि Bacteroides fragilis का एक विषैला स्ट्रेन जिस तरह बड़ी आंत की कोशिकाओं पर हमला शुरू करता है, उसमें claudin-4 नाम का प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह खोज उस सवाल का जवाब देती है जो लंबे समय से वैज्ञानिकों के सामने था—आखिर B. fragilis toxin यानी BFT आंत की कोशिकाओं तक पहुंचकर अपना नुकसान कैसे शुरू करता है?

शोध के निष्कर्ष 22 अप्रैल 2026 को प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature में प्रकाशित हुए। वैज्ञानिकों ने पाया कि BFT पहले claudin-4 से जुड़ता है। इसके बाद यह E-cadherin नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन को काटने में सक्षम होता है। E-cadherin आंत की कोशिकाओं के बीच मजबूती बनाए रखने और सुरक्षात्मक epithelial barrier को कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रक्रिया में बाधा आने से आंत की सुरक्षा कमजोर हो सकती है और सूजन तथा अन्य जैविक प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिल सकता है।

करीब 15 साल पुराना रहस्य आखिर कैसे सुलझा?

इस कहानी की शुरुआत आज से काफी पहले हुई थी। वर्ष 2009 में किए गए महत्वपूर्ण शोध में जॉन्स हॉपकिंस की वैज्ञानिक सिंथिया सियर्स और उनके सहयोगियों ने दिखाया था कि enterotoxigenic Bacteroides fragilis (ETBF) द्वारा बनाया जाने वाला BFT कोलन में सूजन और ट्यूमर बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकता है।

इसके बाद वैज्ञानिकों को यह तो पता था कि BFT आंत की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और E-cadherin को काट देता है, लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल अनसुलझा था। BFT सीधे E-cadherin से जुड़ता हुआ दिखाई नहीं देता था। ऐसे में सवाल था कि विष आखिर कोशिका की सतह तक पहुंचता कैसे है और E-cadherin को अपना निशाना कैसे बनाता है?

अब नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया की एक अहम कड़ी खोज ली है। उनके मुताबिक BFT को E-cadherin तक प्रभावी ढंग से पहुंचने के लिए पहले claudin-4 से जुड़ना पड़ता है।

Bacteroides fragilis कितना सामान्य है?

Bacteroides fragilis आंत में पाया जाने वाला कोई बेहद दुर्लभ जीवाणु नहीं है। Johns Hopkins के मुताबिक B. fragilis को लगभग 20 प्रतिशत स्वस्थ लोगों में भी पाया जा सकता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जिन लोगों की आंत में यह बैक्टीरिया मौजूद है, उन्हें कैंसर हो जाएगा।

असल चिंता इसके कुछ विशेष विष-उत्पादक स्ट्रेन से जुड़ी है। इन्हें enterotoxigenic B. fragilis या ETBF कहा जाता है। इन स्ट्रेन में BFT बनाने की क्षमता होती है। शोध में इसी विष के कारण होने वाले आंत के नुकसान और उसके संभावित कैंसर-संबंधी प्रभावों पर ध्यान दिया गया है।

इसलिए यह समझना जरूरी है कि सामान्य B. fragilis की मौजूदगी को सीधे कैंसर का कारण नहीं माना जा सकता। वैज्ञानिकों का अध्ययन विशेष रूप से विष पैदा करने वाले स्ट्रेन और उनके BFT विष पर केंद्रित है।

BFT शरीर के अंदर क्या करता है?

BFT एक प्रकार का metalloprotease है। सरल भाषा में कहें तो यह ऐसा एंजाइम है जो विशेष प्रोटीनों को काट सकता है।

जब BFT कोलन की कोशिकाओं तक पहुंचता है, तो वह E-cadherin को नुकसान पहुंचा सकता है। E-cadherin कोशिकाओं के बीच संपर्क बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। इसे आंत की संरचनात्मक सुरक्षा व्यवस्था के एक हिस्से के रूप में समझा जा सकता है।

यदि E-cadherin टूटता है तो कोशिकाओं के बीच सामान्य व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप epithelial barrier कमजोर हो सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार BFT की गतिविधि epithelial barrier disruption, inflammation और cellular proliferation से जुड़ी है। प्रयोगात्मक मॉडल में यही प्रक्रिया ट्यूमर बनने की दिशा में योगदान कर सकती है।

CRISPR तकनीक ने खोला बड़ा राज

वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को सुलझाने के लिए genome-wide CRISPR screening का इस्तेमाल किया। CRISPR ऐसी तकनीक है जिसके जरिए शोधकर्ता किसी कोशिका के विशेष जीन को निष्क्रिय करके यह देख सकते हैं कि उस जीन की अनुपस्थिति में कोशिका का व्यवहार कैसे बदलता है।

मैक्सवेल व्हाइट और उनके सहयोगियों ने कोलन epithelial cells में अलग-अलग जीनों को निष्क्रिय किया। इसके बाद उन्होंने देखा कि किन कोशिकाओं में BFT का असर कम हुआ और किन कोशिकाओं ने अपनी सतह पर E-cadherin को बनाए रखा।

इस स्क्रीनिंग में claudin-4 से संबंधित जीन प्रमुख परिणाम के रूप में सामने आया।

जब वैज्ञानिकों ने claudin-4 को निष्क्रिय किया, तो BFT कोशिकाओं से उसी तरह नहीं जुड़ पाया। परिणामस्वरूप E-cadherin को होने वाला नुकसान भी कम हुआ। इससे वैज्ञानिकों को मजबूत संकेत मिला कि claudin-4 BFT के लिए महत्वपूर्ण receptor की भूमिका निभाता है।

Claudin-4 क्या करता है?

Claudin-4 कोशिकाओं के बीच बनने वाले tight junctions से संबंधित प्रोटीन है। Tight junctions कोशिकाओं के बीच एक तरह की जैविक सील बनाने में मदद करते हैं और यह नियंत्रित करते हैं कि पदार्थ कोशिकाओं के बीच से किस तरह गुजरें।

वैज्ञानिकों के लिए सबसे दिलचस्प बात यह थी कि BFT ने किसी सामान्य signaling receptor को अपना मुख्य डॉकिंग पॉइंट नहीं बनाया, बल्कि एक ऐसे प्रोटीन से जुड़ने का तरीका अपनाया जो कोशिकाओं की संरचना और आपसी संपर्क से जुड़ा है।

शोधकर्ताओं के अनुसार claudin-4 से जुड़ने के बाद BFT कोशिका की सतह के पास E-cadherin तक पहुंच सकता है और उसे काट सकता है। यही प्रक्रिया BFT के हानिकारक प्रभावों की शुरुआत में महत्वपूर्ण हो सकती है।

वैज्ञानिकों ने बनाया 'मॉलिक्यूलर डिकॉय'

इस खोज का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ receptor की पहचान तक सीमित नहीं रहा। वैज्ञानिकों ने यह भी सोचा कि अगर BFT को claudin-4 की जरूरत है, तो क्या उसे एक नकली claudin-4 से बांधकर वास्तविक कोशिकाओं से दूर रखा जा सकता है?

इसी विचार से टीम ने एक soluble claudin-4 analogue यानी molecular decoy तैयार किया।

इस डिकॉय को इस तरह तैयार किया गया कि BFT उससे जुड़ जाए, लेकिन वह आंत की कोशिकाओं पर मौजूद वास्तविक receptor तक न पहुंच पाए।

प्रयोगों में BFT ने इस decoy से जुड़ना पसंद किया और इसके कारण कोलन कोशिकाओं को होने वाले नुकसान में कमी देखी गई।

चूहों में भी दिखा असर

शोधकर्ताओं ने इसके बाद इस रणनीति का परीक्षण चूहों के मॉडल में किया। BFT के कारण चूहों की आंत के ऊतकों में epithelial cell shedding और सूजन जैसी क्षति देखी गई थी।

लेकिन जब BFT के साथ soluble claudin-4 आधारित decoy दिया गया, तो इस नुकसान में महत्वपूर्ण कमी देखी गई। इसके अलावा E-cadherin की संरक्षा भी बेहतर बनी रही।

यह परिणाम वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इससे संकेत मिला कि BFT को नुकसान पहुंचाने के बाद रोकने के बजाय उसके कोशिका से जुड़ने के शुरुआती चरण में ही ब्लॉक किया जा सकता है।

हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। ये प्रयोग पशु मॉडल में किए गए थे। इसका मतलब यह नहीं है कि यह decoy अभी इंसानों में कोलोरेक्टल कैंसर को रोकने वाली दवा बन चुका है।

क्या अब कोलन कैंसर की दवा बन जाएगी?

फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।

शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण जैविक तंत्र की पहचान की है और पशु मॉडल में BFT के नुकसान को रोकने की दिशा में उत्साहजनक परिणाम हासिल किए हैं। लेकिन मनुष्यों में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित करने के लिए आगे कई चरणों के शोध की आवश्यकता होगी।

विशेष रूप से यह पता लगाना जरूरी होगा कि क्या claudin-4 आधारित decoy को मानव शरीर में सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकता है, कितनी मात्रा प्रभावी होगी और लंबे समय तक इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा वैज्ञानिक अभी BFT और claudin-4 के बीच बनने वाले interaction की सटीक 3D संरचना को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। Johns Hopkins के अनुसार मौजूदा AI modeling tools, जिनमें AlphaFold भी शामिल है, इस interaction को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर पाए।

कैंसर के अलावा दूसरी बीमारियों में भी हो सकता है महत्व

इस शोध का महत्व केवल कोलोरेक्टल कैंसर तक सीमित नहीं हो सकता।

BFT को पहले से ही दस्त जैसी बीमारी और कुछ परिस्थितियों में गंभीर संक्रमण से जोड़ा गया है। Johns Hopkins के शोधकर्ताओं के अनुसार BFT की कार्यप्रणाली को बेहतर तरीके से समझने से भविष्य में इससे संबंधित कई बीमारियों की पहचान और उपचार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

शोधकर्ताओं का अगला लक्ष्य ऐसे छोटे अणुओं या अन्य biological therapies की तलाश करना है जो BFT और claudin-4 के बीच होने वाले संपर्क को प्रभावी ढंग से रोक सकें।

क्या हर व्यक्ति को B. fragilis से डरने की जरूरत है?

नहीं।

यह अध्ययन यह नहीं कहता कि आंत में Bacteroides fragilis मिलना कैंसर का संकेत है। यह बैक्टीरिया स्वस्थ लोगों में भी पाया जा सकता है। वैज्ञानिकों की चिंता विशेष रूप से उन toxigenic strains को लेकर है जो BFT बनाते हैं।

इसके अलावा कैंसर का विकास आमतौर पर एक जटिल प्रक्रिया होती है, जिसमें कई आनुवंशिक, पर्यावरणीय, जीवनशैली और जैविक कारक शामिल हो सकते हैं। इसलिए केवल किसी एक बैक्टीरिया की मौजूदगी के आधार पर किसी व्यक्ति के कैंसर जोखिम का अनुमान लगाना उचित नहीं है।

शोध ने खोला नया रास्ता

करीब डेढ़ दशक से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि BFT आंत की कोशिका पर हमला शुरू करने के लिए किस receptor का इस्तेमाल करता है। अब claudin-4 की पहचान ने इस प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण गुत्थी सुलझा दी है।

इस खोज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वैज्ञानिकों को केवल यह पता नहीं चला कि BFT कहां जुड़ता है, बल्कि उन्होंने उसी जानकारी का इस्तेमाल करके एक molecular decoy भी तैयार किया, जिसने पशु मॉडल में विष से होने वाली क्षति को कम किया।

फिर भी इसे कैंसर की नई दवा मानना अभी जल्दबाजी होगी। आगे मानव कोशिकाओं, बेहतर molecular inhibitors और अंततः clinical studies की जरूरत होगी।

लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह खोज एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है—क्योंकि अब BFT के हमले की शुरुआत को समझने के बाद उसे नुकसान होने से पहले रोकने की संभावना पर काम किया जा सकता है।

यह शोध अभी प्रयोगशाला और पशु मॉडल के स्तर पर है। इससे यह साबित नहीं होता कि claudin-4 decoy मनुष्यों में कोलोरेक्टल कैंसर को रोकता या उसका इलाज करता है। किसी भी कैंसर संबंधी चिंता या लक्षण के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

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