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A, B या O… ब्लड ग्रुप का खुल गया दिल से जुड़ा बड़ा राज! 4 लाख लोगों की रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला खतरा



आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियां लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं। अनियमित खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और लंबे समय तक रहने वाला तनाव हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों में गिने जाते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने लंबे समय से एक और सवाल पर भी ध्यान दिया है—क्या इंसान का ब्लड ग्रुप भी उसके हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के जोखिम को प्रभावित कर सकता है?

रिसर्च में इस सवाल का जवाब पूरी तरह सीधा नहीं है, लेकिन कई अध्ययनों में O के मुकाबले non-O ब्लड ग्रुप यानी A, B और AB में कुछ हृदय और रक्त के थक्कों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम अधिक पाया गया है। 4 लाख से अधिक लोगों के डेटा पर आधारित एक अध्ययन में A और B ब्लड ग्रुप वाले लोगों में O ब्लड ग्रुप की तुलना में हार्ट अटैक का संयुक्त जोखिम करीब 8% अधिक पाया गया। इसी अध्ययन में हार्ट फेलियर का जोखिम करीब 10% अधिक था।

क्या A और B ब्लड ग्रुप वालों को ज्यादा खतरा है?

यहां सबसे पहले एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि A या B ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को हार्ट अटैक जरूर आएगा। ब्लड ग्रुप केवल संभावित जोखिम से जुड़ा एक कारक है। हार्ट अटैक के जोखिम पर उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान, वजन, खान-पान, व्यायाम और परिवार में हृदय रोग का इतिहास जैसे कई दूसरे कारकों का बहुत बड़ा प्रभाव होता है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित जानकारी के अनुसार, 4 लाख से अधिक लोगों के अध्ययन में A और B समूह को मिलाकर O ब्लड ग्रुप की तुलना में हार्ट अटैक का जोखिम 8% ज्यादा और हार्ट फेलियर का जोखिम 10% ज्यादा पाया गया था।

यानी इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर A या B ग्रुप वाला व्यक्ति हाई-रिस्क मरीज है। यह एक सांख्यिकीय संबंध है, व्यक्तिगत भविष्यवाणी नहीं।

खून के थक्के और ब्लड ग्रुप का क्या संबंध है?

इस रिसर्च का सबसे दिलचस्प हिस्सा रक्त के थक्कों यानी ब्लड क्लॉट्स से जुड़ा है।

हमारे शरीर में खून को जमाने की प्रक्रिया बेहद जरूरी है। चोट लगने पर यही प्रक्रिया ज्यादा रक्तस्राव को रोकती है। लेकिन यदि शरीर में जरूरत से ज्यादा या गलत जगह पर रक्त का थक्का बनने लगे, तो यह गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि A और B जैसे non-O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में रक्त के थक्के बनने से संबंधित जोखिम O ग्रुप की तुलना में अधिक हो सकता है। 4 लाख से अधिक लोगों वाली स्टडी में A और B समूह के लोगों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस का जोखिम O समूह की तुलना में 51% और पल्मोनरी एम्बोलिज्म का जोखिम 47% अधिक पाया गया था।

हालांकि यहां भी सावधानी जरूरी है। नसों में बनने वाला क्लॉट और दिल की कोरोनरी आर्टरी में बनने वाला क्लॉट एक ही बीमारी नहीं है। इसलिए हर तरह के क्लॉट के आंकड़ों को सीधे हार्ट अटैक के जोखिम के बराबर नहीं माना जा सकता।

आखिर ऐसा क्यों हो सकता है?

वैज्ञानिकों ने इसके पीछे कई संभावित जैविक कारणों की ओर संकेत किया है।

ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम का संबंध रक्त में मौजूद कुछ प्रोटीनों से है, जिनमें von Willebrand factor (VWF) और factor VIII महत्वपूर्ण हैं। ये दोनों रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया में भूमिका निभाते हैं।

कुछ शोधों के अनुसार non-O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में इन क्लॉटिंग से जुड़े प्रोटीनों का स्तर O ब्लड ग्रुप की तुलना में अधिक हो सकता है। इससे कुछ परिस्थितियों में रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

इसके अलावा कुछ शोधों में A ब्लड ग्रुप और कोलेस्ट्रॉल जैसे अन्य हृदय जोखिम कारकों के बीच भी संबंध देखा गया है। हालांकि ब्लड ग्रुप और हार्ट अटैक के बीच संबंध को समझने के लिए अभी भी रिसर्च जारी है।

सिर्फ एक स्टडी नहीं, कई रिसर्च में मिला संकेत

ब्लड ग्रुप और हृदय रोगों के बीच संबंध पर केवल एक ही अध्ययन नहीं हुआ है।

2023 में प्रकाशित एक बड़े मेटा-विश्लेषण में 72 अध्ययनों को शामिल किया गया, जिनमें करीब 1,45,499 मामले और 21 लाख से ज्यादा नियंत्रण प्रतिभागी शामिल थे। शोधकर्ताओं ने O ब्लड ग्रुप की तुलना में non-O ब्लड ग्रुप में इस्केमिक स्ट्रोक, मायोकार्डियल इंफार्क्शन यानी हार्ट अटैक और peripheral vascular disease के साथ अधिक संबंध पाया।

इस विश्लेषण में O की तुलना में non-O ब्लड ग्रुप के लिए हार्ट अटैक का odds ratio 1.17 था। वहीं A ब्लड ग्रुप के लिए हार्ट अटैक के साथ संबंध और अधिक मजबूत पाया गया।

एक अन्य व्यापक umbrella review में भी O की तुलना में A और non-O ब्लड ग्रुप के बीच मायोकार्डियल इंफार्क्शन के बढ़े हुए जोखिम का संबंध सामने आया।

क्या O ब्लड ग्रुप वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं?

बिल्कुल नहीं।

यह सबसे जरूरी बात है जिसे समझना चाहिए। O ब्लड ग्रुप होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को हार्ट अटैक नहीं हो सकता।

अगर किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर है, वह धूम्रपान करता है, उसका LDL कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा है, उसे डायबिटीज है, वजन अधिक है या वह बिल्कुल व्यायाम नहीं करता, तो उसका हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है—चाहे उसका ब्लड ग्रुप O ही क्यों न हो।

इसी तरह A, B या AB ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति यदि स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं और अपने ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखते हैं, तो वे अपने कई प्रमुख जोखिम कारकों को कम कर सकते हैं।

अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

ब्लड ग्रुप बदला नहीं जा सकता, लेकिन जीवनशैली से जुड़े कई जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है।

1. रोजाना शारीरिक गतिविधि करें

तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अन्य उपयुक्त व्यायाम को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना फायदेमंद हो सकता है।

2. खान-पान पर ध्यान दें

फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में जगह दें। अत्यधिक नमक, ट्रांस फैट और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना बेहतर है।

3. ब्लड प्रेशर की जांच कराएं

हाई ब्लड प्रेशर कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहता है। इसलिए समय-समय पर इसकी जांच जरूरी है।

4. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर पर नजर रखें

खासकर उन लोगों को नियमित जांच पर ध्यान देना चाहिए जिनके परिवार में हृदय रोग या डायबिटीज का इतिहास रहा है।

5. धूम्रपान से दूरी बनाएं

धूम्रपान हृदय और रक्त वाहिकाओं के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। इसे छोड़ना हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

6. तनाव और नींद को नजरअंदाज न करें

लगातार तनाव और खराब नींद भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। नियमित नींद, शारीरिक गतिविधि और तनाव प्रबंधन की आदतें उपयोगी हो सकती हैं।

हार्ट अटैक के लक्षणों को पहचानना भी जरूरी

ब्लड ग्रुप से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति हार्ट अटैक के संभावित संकेतों को पहचाने। सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अचानक कमजोरी, ठंडा पसीना, मतली या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक पहुंचना गंभीर संकेत हो सकते हैं।

ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें तो उन्हें केवल गैस या सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

वैज्ञानिक शोध यह संकेत देते हैं कि A, B और AB यानी non-O ब्लड ग्रुप और कुछ हृदय तथा रक्त-थक्का संबंधी बीमारियों के बीच संबंध हो सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि A या B ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को हार्ट अटैक होना तय है।

4 लाख से अधिक लोगों के अध्ययन में A और B समूह को मिलाकर हार्ट अटैक का जोखिम O समूह की तुलना में करीब 8% अधिक पाया गया था, जबकि हार्ट फेलियर का जोखिम करीब 10% अधिक था।

इसलिए ब्लड ग्रुप को डर का कारण बनाने के बजाय इसे स्वास्थ्य के बारे में जागरूक रहने की एक अतिरिक्त जानकारी के रूप में देखना चाहिए। असली फर्क अक्सर उन चीजों से पड़ता है जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं—खान-पान, व्यायाम, धूम्रपान, वजन, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और नियमित स्वास्थ्य जांच।

 यह लेख उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और सार्वजनिक स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। ब्लड ग्रुप किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक होने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं करता। व्यक्तिगत जोखिम समझने के लिए डॉक्टर से सलाह और आवश्यक जांच कराना सबसे उचित है।

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