मां का अंतिम संस्कार कर घर पहुंचा 60 साल का बेटा, फिर अचानक जो हुआ उसे देख रो पड़ा गांव!
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। यहां एक परिवार ने पहले मां को खोया और फिर कुछ ही घंटों के भीतर बेटे की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया। जिस बेटे ने अपनी मां को अंतिम विदाई दी थी, उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि कुछ देर बाद उसके परिवार को उसी बैकुंठ धाम में उसे भी अंतिम विदाई देनी पड़ेगी। करीब 12 घंटे के भीतर मां और बेटे की मौत से गांव में शोक की लहर फैल गई है।
यह घटना गोरखपुर के भटहट क्षेत्र के गुलरिहा थाना अंतर्गत फुलवरिया गांव की बताई जा रही है। परिवार में पहले से ही मां की मौत का दुख छाया हुआ था। परिजन किसी तरह खुद को संभालकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर रहे थे। लेकिन घर लौटने के बाद जो हुआ, उसने परिवार की खुशियों और उम्मीदों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। मां की चिता की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि बेटे की मौत की खबर ने सभी को झकझोर दिया।
मां के निधन से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
जानकारी के अनुसार, फुलवरिया गांव की रहने वाली शांतिदेवी का मंगलवार देर रात निधन हो गया था। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार के लोग शोक में डूब गए। घर में मातम छा गया और रिश्तेदारों तथा परिचितों का आना-जाना शुरू हो गया। परिवार के सामने अब मां को अंतिम विदाई देने की जिम्मेदारी थी।
शांतिदेवी के निधन के बाद परिजन उनके अंतिम संस्कार के लिए बरगदही स्थित बैकुंठ धाम पहुंचे। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस दुखद घड़ी में एक-दूसरे को संभालने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान शांतिदेवी के 60 वर्षीय बेटे कैलाश यादव भी वहां मौजूद थे। मां के अंतिम संस्कार की पूरी प्रक्रिया में वह परिवार के साथ रहे।
मां को अंतिम विदाई देना किसी भी बेटे के लिए बेहद कठिन पल होता है। कैलाश यादव ने भी अपनी मां को अंतिम विदाई दी। इसके बाद परिवार के सभी लोग भारी मन से घर लौट आए। परिवार को उम्मीद थी कि समय के साथ इस दुख से उबरने की कोशिश करेंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
घर लौटते ही अचानक बिगड़ गई कैलाश की तबीयत
मां का अंतिम संस्कार करने के बाद कैलाश यादव भी परिवार के साथ घर लौट आए थे। लेकिन घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। शुरुआत में परिजनों को समझ नहीं आया कि आखिर उन्हें क्या परेशानी हो रही है। जब उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो परिवार के लोग घबरा गए।
परिजनों ने बिना देर किए कैलाश को अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को गंभीर बताया। परिवार के सामने अब एक नई मुसीबत खड़ी हो गई थी। कुछ देर पहले तक जिस व्यक्ति ने अपनी मां को अंतिम विदाई दी थी, अब उसी की जिंदगी बचाने के लिए परिजन अस्पतालों के चक्कर लगा रहे थे।
कैलाश की हालत लगातार गंभीर होती चली गई। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उन्हें लखनऊ पीजीआई रेफर कर दिया। परिवार को उम्मीद थी कि बड़े अस्पताल में इलाज मिलने से उनकी जान बच सकती है।
आर्थिक तंगी बनी बड़ी मजबूरी
डॉक्टरों की ओर से लखनऊ पीजीआई रेफर किए जाने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें वहां तक पहुंचाने की थी। बताया गया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। ऐसे में कैलाश को तत्काल लखनऊ ले जाने और वहां इलाज की व्यवस्था करना परिजनों के लिए आसान नहीं था।
एक तरफ परिवार मां की मौत के सदमे से बाहर नहीं निकल पाया था, दूसरी तरफ कैलाश की बिगड़ती हालत ने सभी को परेशान कर दिया था। आर्थिक मजबूरियों के बीच परिजनों ने उन्हें गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया।
परिवार को उम्मीद थी कि इलाज से कैलाश की हालत में सुधार होगा और वह स्वस्थ होकर घर लौट आएंगे। लेकिन उनकी हालत गंभीर बनी रही। आखिरकार इलाज के दौरान कैलाश यादव ने भी दम तोड़ दिया। इस खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया।
तीन भाइयों में सबसे बड़े थे कैलाश यादव
बताया गया कि कैलाश यादव तीन भाइयों में सबसे बड़े थे। वह मुंबई में रहकर मजदूरी करते थे और मेहनत करके अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाते थे। परिवार के लिए वह एक महत्वपूर्ण सहारा थे।
कैलाश का जीवन संघर्षों से भरा था। रोजी-रोटी के लिए उन्हें अपने गांव और परिवार से दूर मुंबई में रहकर काम करना पड़ता था। मजदूरी से होने वाली कमाई के सहारे वह परिवार की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करते थे। ऐसे में उनकी अचानक मौत ने परिवार को भावनात्मक ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी गहरा झटका दिया है।
परिवार के सदस्यों के लिए यह समझ पाना बेहद मुश्किल हो गया कि कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें दो अपनों को खोने का दर्द सहना पड़ेगा। पहले शांतिदेवी का निधन और फिर कैलाश की मौत ने घर को मातम में डुबो दिया।
जिस घाट पर मां को दी विदाई, वहीं बेटे का भी हुआ अंतिम संस्कार
इस घटना का सबसे भावुक कर देने वाला पहलू यह रहा कि जिस बैकुंठ धाम में परिवार ने शांतिदेवी का अंतिम संस्कार किया था, कुछ ही घंटों बाद उसी स्थान पर कैलाश यादव का भी अंतिम संस्कार करना पड़ा।
गांव में जब मां और बेटे दोनों की मौत की खबर पहुंची तो लोग स्तब्ध रह गए। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि मां को अंतिम विदाई देकर घर लौटने वाला बेटा इतनी जल्दी दुनिया छोड़ देगा। गांव के लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे, लेकिन इस दोहरे दुख के सामने हर किसी के शब्द कम पड़ गए।
परिवार के लिए यह दृश्य जीवनभर नहीं भूलने वाला बन गया। एक ही दिन में मां और बेटे को खोने का दर्द कितना गहरा होगा, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। जिस स्थान पर कुछ समय पहले शांतिदेवी की अंतिम विदाई हुई थी, वहीं बेटे कैलाश को भी अंतिम विदाई देनी पड़ी।
पूरे गांव में पसरा मातम, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मां-बेटे की मौत के बाद फुलवरिया गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीण इस घटना को लेकर दुखी हैं और परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं। लोगों के बीच इस बात की चर्चा है कि कैलाश ने मां का अंतिम संस्कार किया और घर लौटने के कुछ ही समय बाद उनकी खुद की तबीयत बिगड़ गई।
परिवार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस असहनीय दुख से उबरना है। मां के निधन से घर में जो खालीपन आया था, बेटे की मौत ने उसे और गहरा कर दिया। कैलाश के जाने से परिवार ने अपना एक अहम सहारा भी खो दिया है।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। कभी-कभी कुछ घंटे के भीतर ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जिनकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता। गोरखपुर के फुलवरिया गांव में मां और बेटे की एक के बाद एक मौत ने हर किसी को भावुक कर दिया है। जिस बेटे ने मां को अंतिम विदाई दी थी, उसी बेटे को कुछ ही घंटों बाद अंतिम विदाई देनी पड़ी। यह दुखद घटना लंबे समय तक गांव के लोगों के जेहन में बनी रहेगी।

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