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ऑर्डर बिकते ही खुश मत होइए! Return होते ही ₹999 के सामान में ऐसे डूब जाते हैं ₹300, ऑनलाइन सेलर्स के लिए बड़ा खतरा



ऑनलाइन कारोबार शुरू करना आज पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। घर से छोटे स्तर पर सामान बेचने वाला व्यक्ति भी बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने उत्पाद पहुंचा सकता है। ऑर्डर आता है, सामान पैक होता है, डिलीवरी के लिए भेजा जाता है और ग्राहक के पास पार्सल पहुंच जाता है। लेकिन कई बार इसके कुछ दिन बाद सेलर के मोबाइल या डैशबोर्ड पर एक ऐसा संदेश दिखाई देता है, जो सीधे मुनाफे पर असर डालता है—Return Requested यानी ग्राहक ने सामान वापस करने का अनुरोध किया है।

शुरुआत में एक ऑर्डर के वापस आने को सामान्य घटना समझा जाता है। लेकिन छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं के लिए बार-बार होने वाले रिटर्न का असर काफी बड़ा हो सकता है। खासकर तब, जब सामान की कीमत कम हो और हर ऑर्डर पर मार्जिन पहले से ही सीमित हो।

सबसे बड़ी गलती यह होती है कि विक्रेता रिटर्न का नुकसान सिर्फ सामान वापस आने तक सीमित समझता है। असल में एक रिटर्न कई तरह के खर्च लेकर आता है। अगर इन खर्चों का सही हिसाब नहीं रखा जाए तो बिक्री बढ़ने के बावजूद वास्तविक मुनाफा कम होता जा सकता है।

सिर्फ एक रिटर्न नहीं, कई खर्चों का झटका

मान लीजिए आपने ₹999 का कोई उत्पाद बेचा। आपको लगता है कि इस ऑर्डर से अच्छी कमाई होगी। लेकिन ग्राहक ने सामान वापस कर दिया। अब केवल उत्पाद वापस आने की बात नहीं है।

सबसे पहले उस सामान को ग्राहक तक भेजने की लागत जुड़ी होती है। इसके बाद वापसी की शिपिंग का खर्च भी हो सकता है। इसके अलावा पैकिंग सामग्री, प्लेटफॉर्म से जुड़े शुल्क और उत्पाद की दोबारा बिक्री में होने वाला मूल्य नुकसान अलग से हो सकता है।

यानी जिस ऑर्डर से आपको कमाई की उम्मीद थी, वही ऑर्डर रिटर्न के बाद नुकसान का कारण बन सकता है।

इसी वजह से ऑनलाइन कारोबार करने वालों के लिए सिर्फ बिक्री की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि कुल बिक्री में कितने ऑर्डर वापस आए और हर रिटर्न से औसतन कितना नुकसान हुआ।

रिटर्न होने पर किन-किन जगहों पर कटता है पैसा?

रिटर्न से होने वाले नुकसान को समझने के लिए इसके अलग-अलग हिस्सों को देखना जरूरी है।

1. ग्राहक तक भेजने की शिपिंग

ऑर्डर स्वीकार होने के बाद सामान को ग्राहक तक पहुंचाने में शिपिंग खर्च होता है। यदि बाद में ग्राहक सामान वापस करता है तो कई मामलों में विक्रेता को पहले की शिपिंग लागत का पूरा लाभ वापस नहीं मिलता।

यानी सामान बिकने के बाद रिटर्न होने पर भेजने में खर्च हुई रकम भी आपके मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।

2. वापसी की शिपिंग

इसके बाद दूसरा खर्च आता है रिटर्न शिपिंग का। सामान ग्राहक के पास से वापस विक्रेता तक पहुंचाने में भी लागत आती है।

किस प्लेटफॉर्म पर कौन-सा शुल्क किसकी जिम्मेदारी है, यह उसकी मौजूदा नीति पर निर्भर करता है। इसलिए विक्रेता को अपने सेलर डैशबोर्ड में रिटर्न और लॉजिस्टिक्स से संबंधित नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

3. पैकिंग का खर्च

सामान भेजने के लिए इस्तेमाल होने वाला डिब्बा, टेप, बबल रैप, पॉलीबैग या अन्य पैकिंग सामग्री भी मुफ्त नहीं आती।

अगर कोई उत्पाद वापस आता है तो कई बार उसकी मूल पैकिंग दोबारा इस्तेमाल करने लायक नहीं रहती। ऐसे में दोबारा बेचते समय फिर से पैकिंग करनी पड़ सकती है।

छोटे विक्रेता अक्सर इस खर्च को अपनी गणना में शामिल ही नहीं करते।

4. प्लेटफॉर्म शुल्क और अन्य चार्ज

ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर सामान बेचने के लिए अलग-अलग प्रकार के शुल्क हो सकते हैं। इनमें रेफरल या कमीशन जैसे शुल्क शामिल हो सकते हैं।

रिटर्न की स्थिति में कौन-सा शुल्क वापस होता है और कौन-सा नहीं, यह प्लेटफॉर्म, श्रेणी और ऑर्डर की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए किसी एक सामान्य नियम को हर ऑर्डर पर लागू करना सही नहीं है।

5. उत्पाद की कीमत में गिरावट

यह रिटर्न का सबसे छिपा हुआ नुकसान हो सकता है।

मान लीजिए ग्राहक ने उत्पाद खोला, इस्तेमाल किया या उसकी पैकिंग खराब कर दी। अब वह सामान बिल्कुल नए उत्पाद की तरह बेचना मुश्किल हो सकता है।

कुछ मामलों में उसे कम कीमत पर बेचना पड़ सकता है। यही मूल्य अंतर वास्तविक नुकसान बन जाता है।

₹999 के ऑर्डर का समझिए पूरा उदाहरण

अब एक उदाहरण से समझते हैं।

मान लीजिए किसी ऑनलाइन विक्रेता ने ₹999 का सामान बेचा। रिटर्न होने के बाद अनुमानित खर्च इस तरह हो सकता है:

  • ग्राहक तक शिपिंग: ₹70

  • वापसी शिपिंग: ₹70

  • पैकिंग सामग्री: ₹30

  • शुल्क से संबंधित संभावित नुकसान: ₹50

  • उत्पाद की कीमत में कमी: ₹80

इन सभी को जोड़ने पर कुल नुकसान करीब ₹300 बैठता है।

यानी ₹999 के ऑर्डर में केवल रिटर्न की वजह से लगभग ₹300 का प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि यह सिर्फ समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक खर्च उत्पाद के वजन, आकार, डिलीवरी दूरी, श्रेणी, प्लेटफॉर्म की नीति, रिटर्न के कारण और अन्य शुल्कों पर निर्भर करेगा।

यही कारण है कि हर विक्रेता को अपने वास्तविक आंकड़ों के आधार पर गणना करनी चाहिए।

रिटर्न का अलग रिकॉर्ड बनाना क्यों जरूरी?

अगर कोई विक्रेता महीने में 100 ऑर्डर बेचता है और उनमें से 10 वापस आते हैं, तो उसे सिर्फ यह नहीं देखना चाहिए कि 90 ऑर्डर सफल हुए।

उसे यह भी देखना चाहिए कि उन 10 रिटर्न से कुल कितनी रकम प्रभावित हुई।

एक साधारण रजिस्टर या स्प्रेडशीट में ये जानकारी रखी जा सकती है:

ऑर्डर नंबर, उत्पाद, बिक्री मूल्य, रिटर्न की वजह, शिपिंग खर्च, वापसी खर्च, पैकिंग खर्च, उत्पाद की स्थिति और दोबारा बेचने पर मिली कीमत।

महीने के अंत में इन आंकड़ों का जोड़ करने पर वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

कई बार विक्रेता को पता चलता है कि जिस उत्पाद की बिक्री सबसे ज्यादा है, उसी में रिटर्न का प्रतिशत भी सबसे अधिक है।

रिटर्न कम करने के लिए क्या करें?

रिटर्न को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन सही रणनीति से इसे काफी कम किया जा सकता है।

उत्पाद की सही फोटो लगाएं

ऑनलाइन खरीदारी में ग्राहक उत्पाद को हाथ में लेकर नहीं देख सकता। इसलिए तस्वीरें स्पष्ट और वास्तविक होनी चाहिए।

फोटो में उत्पाद का आकार, रंग और डिजाइन सही तरीके से दिखाई देना चाहिए।

साइज़ और माप साफ लिखें

कपड़े, जूते, फर्नीचर और अन्य आकार आधारित उत्पादों में गलत साइज़ रिटर्न का बड़ा कारण बन सकता है।

इसलिए स्पष्ट साइज़ चार्ट और माप देना जरूरी है।

उत्पाद का विवरण ईमानदारी से दें

उत्पाद की ऐसी विशेषता न लिखें जो वास्तव में उसमें मौजूद न हो। बढ़ा-चढ़ाकर किया गया दावा ग्राहक की उम्मीद और वास्तविक उत्पाद के बीच अंतर पैदा कर सकता है।

यही अंतर बाद में रिटर्न का कारण बन सकता है।

रिटर्न की वजहों का विश्लेषण करें

हर सप्ताह या महीने में रिटर्न के कारणों को देखें।

अगर बार-बार ग्राहक लिख रहे हैं कि उत्पाद का रंग फोटो से अलग है, तो फोटो सुधारने की जरूरत हो सकती है।

अगर साइज़ गलत निकल रहा है तो साइज़ चार्ट में बदलाव जरूरी हो सकता है।

अगर ग्राहक बार-बार गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर रहे हैं तो समस्या उत्पाद में भी हो सकती है।

कीमत तय करते समय रिटर्न का खर्च भी सोचें

ऑनलाइन कारोबार में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कीमत सिर्फ खरीद लागत और सामान्य शिपिंग देखकर तय नहीं करनी चाहिए।

विक्रेता को अपने औसत रिटर्न रेट, रिटर्न से होने वाले नुकसान, प्लेटफॉर्म शुल्क, पैकिंग, टैक्स और अन्य खर्चों को ध्यान में रखकर वास्तविक मार्जिन निकालना चाहिए।

यदि किसी उत्पाद पर कागज पर ₹200 का मुनाफा दिखाई दे रहा है, लेकिन रिटर्न और दूसरे खर्चों के बाद औसतन ₹100 ही बच रहा है, तो वास्तविक लाभ ₹200 नहीं माना जा सकता।

छोटे ऑनलाइन कारोबारियों के लिए सबसे बड़ा सबक

ऑनलाइन बिक्री में सिर्फ ऑर्डर की संख्या बढ़ाना सफलता का पैमाना नहीं है। असली सफलता तब है जब बिक्री के बाद खर्च निकालकर पर्याप्त मुनाफा बचे।

एक छोटा विक्रेता यदि शुरुआत से ही हर रिटर्न का रिकॉर्ड रखता है, उसके कारण को समझता है और उत्पाद की गुणवत्ता तथा विवरण में सुधार करता है, तो वह धीरे-धीरे अनावश्यक नुकसान को कम कर सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि रिटर्न को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज न करें। एक-दो रिटर्न शायद बड़ी समस्या न हों, लेकिन लगातार लौटने वाले ऑर्डर आपके पूरे कारोबार के मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं।

इसलिए अगली बार जब आपके सेलर डैशबोर्ड पर “Return Requested” दिखाई दे, तो सिर्फ सामान वापस आने का इंतजार न करें। उस ऑर्डर की पूरी लागत लिखें। महीने के अंत में सभी रिटर्न का हिसाब जोड़ें। संभव है कि इसी गणना से आपको अपने कारोबार में छिपे उस नुकसान का पता चल जाए, जो अब तक आपकी नजर से बचा हुआ था।

 रिटर्न, शिपिंग, कमीशन और अन्य शुल्क अलग-अलग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, उत्पाद श्रेणी और विक्रेता की शर्तों के अनुसार बदल सकते हैं। ऊपर दिए गए आंकड़े उदाहरण के लिए हैं। वास्तविक लागत जानने के लिए अपने संबंधित सेलर डैशबोर्ड और मौजूदा शुल्क/रिटर्न नीति की जांच जरूर करें।

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