रात में तलवों में क्यों लगती है आग? इस संकेत के पीछे छिपी हो सकती है बड़ी बीमारी!
दिनभर काम करने के बाद जब इंसान रात में आराम करने के लिए बिस्तर पर जाता है, तो शरीर से थकान दूर होने की उम्मीद होती है। लेकिन कुछ लोगों के लिए रात का समय आराम के बजाय एक नई परेशानी लेकर आता है। बिस्तर पर लेटते ही पैरों के तलवों में अचानक गर्मी और जलन महसूस होने लगती है। कई बार ऐसा लगता है जैसे तलवों के अंदर आग जल रही हो। कुछ लोग पैर रजाई से बाहर निकाल देते हैं, तो कुछ ठंडे फर्श पर पैर रखकर राहत पाने की कोशिश करते हैं।
अगर यह समस्या कभी-कभार हो तो लोग इसे दिनभर की थकान मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन जब पैरों के तलवों में जलन लगातार कई दिनों या हफ्तों तक रात में परेशान करने लगे, तो इसे सिर्फ थकान समझना सही नहीं है। इसके पीछे शरीर में पोषण की कमी से लेकर नसों से जुड़ी समस्या, ब्लड शुगर बढ़ना या त्वचा संबंधी परेशानी तक कई कारण हो सकते हैं।
रात में ही ज्यादा क्यों महसूस होती है तलवों की जलन?
हमारे पैरों में शरीर की लंबी नसों का नेटवर्क मौजूद होता है। ये नसें दिमाग तक स्पर्श, तापमान और दर्द से जुड़ी जानकारी पहुंचाने का काम करती हैं। जब किसी कारण से नसों पर असर पड़ता है, तो उनमें सामान्य संवेदनाओं की जगह जलन, झनझनाहट, चुभन या सुन्नपन जैसी अनुभूति होने लगती है।
दिन के समय हमारा ध्यान काम, बातचीत और दूसरी गतिविधियों में बंटा रहता है। रात में जब शरीर शांत होता है और आसपास कोई दूसरी गतिविधि नहीं होती, तब व्यक्ति को पैरों में होने वाली असामान्य संवेदना ज्यादा स्पष्ट महसूस हो सकती है। यही वजह है कि कई लोगों को तलवों की जलन दिन के मुकाबले रात में ज्यादा परेशान करती है।
हालांकि, हर व्यक्ति में इसका कारण एक जैसा नहीं होता। इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
विटामिन बी12 की कमी भी हो सकती है वजह
पैरों में जलन के पीछे पोषण की कमी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। खासतौर पर विटामिन बी12 की कमी नसों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक बी12 की कमी रहने पर हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी या जलन जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
कुछ लोगों में खानपान की वजह से बी12 का सेवन पर्याप्त नहीं होता, जबकि कुछ मामलों में शरीर इस विटामिन को ठीक से अवशोषित नहीं कर पाता। इसलिए केवल भोजन में कोई एक चीज शामिल कर लेने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से जांच कराना ज्यादा बेहतर होता है।
बढ़ी हुई ब्लड शुगर को भी न करें नजरअंदाज
पैरों के तलवों में लगातार जलन का एक महत्वपूर्ण कारण डायबिटीज से जुड़ी नसों की समस्या भी हो सकती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर शरीर की नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।
इस स्थिति में पैरों में जलन, चुभन, झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द महसूस हो सकता है। कई लोगों को शुरुआत में यह समस्या मामूली लगती है और वे इसे थकान मानकर छोड़ देते हैं। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज है और पैरों में नए तरीके की जलन या सुन्नपन शुरू हुआ है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डायबिटीज में पैरों की संवेदनशीलता कम होने के कारण चोट या छोटा घाव भी कई बार देर से महसूस होता है। इसलिए ऐसे लोगों को पैरों की नियमित जांच पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
थायरॉयड और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं जिम्मेदार
कुछ मामलों में थायरॉयड से जुड़ी गड़बड़ी भी नसों और शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा किडनी या लिवर से जुड़ी कुछ स्थितियां, पोषण संबंधी समस्याएं और अन्य न्यूरोलॉजिकल कारण भी पैरों में असामान्य संवेदनाएं पैदा कर सकते हैं।
यही कारण है कि यदि जलन लगातार बनी हुई है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय मूल कारण का पता लगाना जरूरी है।
लंबे समय तक खड़े रहने और गलत जूतों का भी असर
हर बार तलवों में जलन किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। दिनभर लगातार खड़े रहना, ज्यादा चलना या पैरों पर लंबे समय तक दबाव पड़ना भी अस्थायी जलन और थकान पैदा कर सकता है।
इसके अलावा बहुत तंग जूते, खराब फिटिंग वाले फुटवियर या ऐसे जूते जिनमें पैरों को पर्याप्त हवा न मिले, वे भी परेशानी बढ़ा सकते हैं। गर्म मौसम में पैरों में अत्यधिक पसीना आने से त्वचा संबंधी संक्रमण, खासकर फंगल इंफेक्शन, में भी जलन और खुजली हो सकती है।
इसलिए पैरों की जलन के साथ खुजली, त्वचा का छिलना, लाल चकत्ते या उंगलियों के बीच सफेद परत जैसी समस्या हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
घर पर राहत के लिए क्या किया जा सकता है?
अगर जलन हल्की है और किसी गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं हैं, तो कुछ सामान्य सावधानियां राहत देने में मदद कर सकती हैं।
दिनभर लंबे समय तक खड़े रहने की स्थिति में बीच-बीच में बैठकर पैरों को आराम दें। संभव हो तो कुछ समय के लिए पैरों को शरीर के स्तर से थोड़ा ऊपर रखें। आरामदायक और सही आकार के जूते पहनें। बहुत गर्म वातावरण में पैरों को ज्यादा देर तक बंद जूतों में रखने से बचें।
सोने से पहले पैरों को सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से धोना कुछ लोगों को आराम दे सकता है। हालांकि पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए। खासकर जिन लोगों के पैरों में सुन्नपन है, उन्हें गर्म पानी या हीटिंग पैड का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि कम संवेदना होने पर जलने का खतरा बढ़ सकता है।
हल्की मालिश भी कुछ लोगों को अस्थायी राहत दे सकती है। लेकिन यदि मालिश करने से दर्द या जलन बढ़ती है, तो इसे रोक देना चाहिए।
खानपान पर भी दें ध्यान
पैरों की जलन का इलाज केवल खानपान बदलने से नहीं किया जा सकता, लेकिन संतुलित आहार शरीर के सामान्य स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। भोजन में दालें, दूध या दही, अंडे, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को विटामिन या मिनरल की कमी का संदेह है, तो बिना जांच के सप्लीमेंट या हाई-डोज विटामिन लेना उचित नहीं है। पहले डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर होता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर तलवों की जलन लगातार बढ़ रही है या कई सप्ताह से बनी हुई है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर जलन के साथ पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट, कमजोरी, संतुलन बिगड़ना या चलने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
पैरों में घाव या छाला बनने और देर से ठीक होने, त्वचा का रंग बदलने, अचानक बहुत ज्यादा दर्द होने या एक पैर में दूसरे की तुलना में असामान्य रूप से ज्यादा जलन होने पर भी जांच करानी चाहिए।
डायबिटीज वाले लोगों को पैरों से जुड़े किसी नए लक्षण को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
सिर्फ थकान समझना पड़ सकता है भारी
रात में तलवों में होने वाली जलन कई बार सामान्य थकान या लंबे समय तक खड़े रहने का परिणाम हो सकती है, लेकिन हर बार ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं। लगातार होने वाली जलन शरीर में किसी समस्या का संकेत भी हो सकती है।
इसलिए बार-बार होने वाली पैरों के तलवों में जलन को दबाने के बजाय उसके कारण को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड शुगर, विटामिन बी12, थायरॉयड या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं।
ध्यान रखें कि घरेलू उपाय केवल अस्थायी राहत दे सकते हैं। किसी बीमारी या पोषण की कमी की पुष्टि होने पर उसका उचित इलाज जरूरी होता है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा बंद या शुरू न करें।
रात में तलवों की जलन बार-बार हो रही है, तो शरीर के इस संकेत को नजरअंदाज न करें। समय पर कारण पता चल जाए तो कई समस्याओं को बढ़ने से पहले नियंत्रित किया जा सकता है।

कोई टिप्पणी नहीं