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महिलाओं को बार-बार क्यों घेर रही है आयरन की कमी? पीरियड्स से लेकर प्रेग्नेंसी तक छिपे हैं ये 5 बड़े कारण!



महिलाओं में आयरन की कमी एक आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली स्वास्थ्य समस्या है। थकान, कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना या हर समय सुस्ती महसूस होना कई बार सामान्य कमजोरी समझ लिया जाता है, जबकि इसके पीछे शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। आयरन शरीर के लिए बेहद जरूरी खनिज है, क्योंकि यह हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में 15 से 49 वर्ष की लगभग 30 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। गर्भवती महिलाओं में यह आंकड़ा लगभग 37 प्रतिशत है। हालांकि हर एनीमिया आयरन की कमी के कारण नहीं होता, लेकिन आयरन की कमी एनीमिया का सबसे आम पोषण संबंधी कारण है।

आखिर महिलाओं में आयरन की कमी ज्यादा क्यों होती है?

महिलाओं में आयरन की कमी के पीछे कई कारण एक साथ काम कर सकते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव, गर्भावस्था में आयरन की बढ़ी जरूरत, भोजन में पर्याप्त आयरन न मिलना और शरीर द्वारा आयरन का कम अवशोषण।

WHO के मुताबिक प्रजनन आयु की महिलाओं में मासिक धर्म के कारण नियमित रूप से आयरन की हानि होती है। अगर भोजन से खोए हुए आयरन की भरपाई पर्याप्त मात्रा में नहीं हो पाती, तो धीरे-धीरे शरीर में आयरन का स्टोर कम होने लग सकता है।

यही कारण है कि किशोरियों और प्रजनन आयु की महिलाओं को आयरन की कमी का जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा रहता है।

पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग सबसे बड़ी वजहों में से एक

महिलाओं में आयरन की कमी का एक महत्वपूर्ण कारण मासिक धर्म के दौरान होने वाला रक्तस्राव है। सामान्य मासिक धर्म में भी शरीर से कुछ मात्रा में खून और उसके साथ आयरन निकलता है। लेकिन जिन महिलाओं को बहुत ज्यादा या लंबे समय तक पीरियड्स आते हैं, उनमें आयरन की कमी का खतरा और बढ़ सकता है।

WHO भी भारी मासिक रक्तस्राव को आयरन की कमी वाले एनीमिया के जोखिम से जोड़ता है।

अगर किसी महिला को हर महीने बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, बड़े-बड़े रक्त के थक्के आते हैं, पीरियड्स सामान्य से ज्यादा दिनों तक चलते हैं या इसके कारण कमजोरी और थकान रहने लगी है, तो इसे केवल "नॉर्मल पीरियड्स" मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

गर्भावस्था में क्यों बढ़ जाती है आयरन की जरूरत?

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के शरीर में कई बड़े बदलाव होते हैं। बच्चे के विकास के साथ-साथ मां के शरीर में रक्त की मात्रा और लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन भी बढ़ता है। इसके अलावा भ्रूण और प्लेसेंटा की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी आयरन की आवश्यकता बढ़ती है।

NIH के अनुसार, गर्भावस्था में शरीर की आयरन आवश्यकता बढ़ जाती है और गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी का जोखिम अधिक होता है।

WHO के अनुसार गर्भावस्था में आयरन और फोलिक एसिड की जरूरत को पूरा करना मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था के दौरान आयरन की कमी से एनीमिया का खतरा बढ़ सकता है और इसके साथ समय से पहले प्रसव तथा कम वजन वाले बच्चे जैसे खराब गर्भावस्था परिणाम जुड़े हुए हैं।

इसी वजह से गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर अक्सर आयरन और फोलिक एसिड की सप्लीमेंट की सलाह देते हैं।

खाने में आयरन की कमी भी बन सकती है कारण

आयरन की कमी का एक बड़ा कारण भोजन में पर्याप्त आयरन न मिलना भी है। अगर किसी महिला के भोजन में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ नियमित रूप से शामिल नहीं हैं, तो समय के साथ शरीर के आयरन स्टोर कम हो सकते हैं।

आयरन दो प्रमुख रूपों में भोजन से मिलता है। मांस, मछली और पोल्ट्री में पाया जाने वाला heme iron शरीर अपेक्षाकृत आसानी से अवशोषित करता है। वहीं पौधों से मिलने वाला non-heme iron शरीर में अलग तरीके से अवशोषित होता है।

शाकाहारी भोजन लेने वाली महिलाओं के लिए दालें, चना, राजमा, सोयाबीन, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल और आयरन से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ उपयोगी स्रोत हो सकते हैं। भोजन में विटामिन C वाले खाद्य पदार्थ शामिल करने से पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में मदद मिल सकती है।

हालांकि केवल किसी एक खाद्य पदार्थ को खाने से आयरन की कमी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

आयरन खा रही हैं फिर भी कमी क्यों हो सकती है?

कई बार महिला पर्याप्त आयरन वाला भोजन ले रही होती है, फिर भी शरीर में आयरन का स्तर कम रहता है। इसका कारण आयरन का पर्याप्त अवशोषण न होना भी हो सकता है।

कुछ पाचन संबंधी बीमारियां शरीर की पोषक तत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। NIH के अनुसार कुछ gastrointestinal disorders और malabsorption की स्थितियां आयरन की कमी से जुड़ी हो सकती हैं।

इसलिए लगातार आयरन की कमी होने पर केवल भोजन बढ़ाने के बजाय डॉक्टर से इसका कारण पता करना जरूरी हो सकता है।

बार-बार खून की कमी भी हो सकती है वजह

मासिक धर्म के अलावा शरीर से होने वाला अन्य रक्तस्राव भी आयरन की कमी का कारण बन सकता है।

उदाहरण के लिए कुछ महिलाओं में पाचन तंत्र से होने वाला रक्तस्राव लंबे समय तक दिखाई नहीं देता, लेकिन इससे धीरे-धीरे आयरन कम हो सकता है। कुछ चिकित्सकीय स्थितियां और संक्रमण भी रक्त की कमी या एनीमिया में भूमिका निभा सकते हैं।

WHO के अनुसार एनीमिया के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें पोषण संबंधी कमियां, संक्रमण, सूजन, पुरानी बीमारियां, स्त्री रोग संबंधी स्थितियां और आनुवंशिक रक्त विकार शामिल हैं।

इसलिए हर एनीमिया को केवल आयरन की कमी मानना सही नहीं है।

आयरन की कमी के कौन-कौन से लक्षण दिख सकते हैं?

शुरुआत में आयरन की कमी के लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं। कई महिलाओं को इसका पता तब चलता है जब कमजोरी काफी बढ़ जाती है।

संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

  • लगातार थकान या कमजोरी

  • चक्कर आना

  • सिरदर्द

  • थोड़ी मेहनत में सांस फूलना

  • त्वचा का पीला या फीका दिखना

  • दिल की धड़कन तेज महसूस होना

  • काम करने या व्यायाम करने की क्षमता कम होना

  • ध्यान लगाने में परेशानी

  • हाथ-पैरों में कमजोरी

  • कुछ मामलों में बर्फ या गैर-खाद्य चीजें खाने की इच्छा

WHO के अनुसार एनीमिया से थकान, कमजोरी, चक्कर और सांस फूलने जैसे लक्षण हो सकते हैं।

लेकिन इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि हर महिला को आयरन की कमी ही है। इनके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

किशोरियों को क्यों रहना चाहिए ज्यादा सावधान?

किशोरावस्था में शरीर तेजी से विकसित होता है और इसी दौरान कई लड़कियों में मासिक धर्म शुरू हो जाता है। यानी शरीर को एक तरफ विकास के लिए पोषक तत्वों की जरूरत होती है और दूसरी तरफ मासिक रक्तस्राव के कारण आयरन की नियमित हानि हो सकती है।

WHO किशोरियों और मासिक धर्म वाली महिलाओं को आयरन की कमी और एनीमिया के लिहाज से महत्वपूर्ण जोखिम समूह मानता है।

इस उम्र में भोजन में पर्याप्त आयरन और अन्य जरूरी पोषक तत्वों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।

क्या हर थकान का मतलब आयरन की कमी है?

नहीं। यह समझना बहुत जरूरी है।

थकान और कमजोरी के पीछे नींद की कमी, तनाव, संक्रमण, थायरॉयड संबंधी समस्याएं, विटामिन B12 या फोलेट की कमी, अन्य पुरानी बीमारियां और कई दूसरे कारण हो सकते हैं।

इसी तरह हर एनीमिया भी आयरन की कमी के कारण नहीं होता। WHO के अनुसार एनीमिया के कई पोषण और गैर-पोषण संबंधी कारण हो सकते हैं।

इसलिए बिना जांच के आयरन की गोली शुरू करना उचित नहीं है।

आयरन की कमी का पता कैसे चलता है?

डॉक्टर लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर रक्त की जांच की सलाह दे सकते हैं। हीमोग्लोबिन की जांच एनीमिया का पता लगाने में उपयोगी होती है, जबकि serum ferritin शरीर में आयरन के स्टोर के बारे में जानकारी दे सकता है।

NIH के अनुसार ferritin आयरन स्टोर्स का एक महत्वपूर्ण संकेतक है, हालांकि शरीर में सूजन होने पर इसका स्तर बढ़ सकता है और इससे आयरन की कमी का आकलन प्रभावित हो सकता है।

इसलिए रिपोर्ट की व्याख्या व्यक्ति के पूरे स्वास्थ्य और अन्य जांचों के साथ डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए।

क्या आयरन की गोली खुद से लेनी चाहिए?

आयरन सप्लीमेंट की जरूरत होने पर डॉक्टर उचित मात्रा और अवधि तय कर सकते हैं। बिना जरूरत या ज्यादा मात्रा में आयरन लेना सही नहीं है।

किसी महिला में आयरन की कमी के पीछे अगर भारी पीरियड्स, गर्भावस्था, भोजन की कमी या शरीर में आयरन के अवशोषण से जुड़ी समस्या है, तो केवल सप्लीमेंट लेने के साथ मूल कारण का पता लगाना भी जरूरी है।

खासकर गर्भवती महिलाओं को किसी भी सप्लीमेंट की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए।

महिलाओं के लिए आयरन पर ध्यान देना क्यों जरूरी है?

आयरन सिर्फ खून बनाने के लिए ही जरूरी नहीं है। शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचाने और सामान्य ऊर्जा उत्पादन में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

आयरन की कमी लंबे समय तक बनी रहने पर एनीमिया हो सकता है और इससे रोजमर्रा के काम, शारीरिक क्षमता और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। WHO के अनुसार एनीमिया महिलाओं के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

इसलिए लगातार थकान या कमजोरी को सिर्फ काम का दबाव मानकर छोड़ने के बजाय जरूरत पड़ने पर जांच कराना समझदारी है।

महिलाओं में आयरन की कमी आम होने के पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। मासिक धर्म के दौरान होने वाली आयरन की हानि, ज्यादा ब्लीडिंग, गर्भावस्था में बढ़ी हुई जरूरत, भोजन में पर्याप्त आयरन की कमी और आयरन का कम अवशोषण प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

अगर लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, सांस फूलना या त्वचा का रंग फीका पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो इन्हें नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच कराना बेहतर है।

यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। आयरन की कमी या एनीमिया का सही निदान रक्त जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन से किया जाता है। बिना डॉक्टर की सलाह के आयरन की दवा शुरू न करें।

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