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हाथरस में छापेमारी के बाद मचा हड़कंप! परिसर के अंदर मिला हजारों किलो ड्राई फ्रूट और 1,800 किलो सफेद पाउडर, खुलने वाला है बड़ा राज!



उत्तर प्रदेश के हाथरस से खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। हाथरस गेट थाना क्षेत्र के नगला भूरा में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पुलिस बल के साथ एक परिसर में छापेमारी की। अंबेडकर मूर्ति के पास स्थित इस परिसर में जांच के दौरान बड़ी मात्रा में ड्राई फ्रूट, चायपत्ती और अन्य खाद्य सामग्री के साथ कई मशीनें बरामद की गईं। सबसे ज्यादा चर्चा 1,800 किलो सफेद पाउडर की बरामदगी को लेकर हो रही है। हालांकि, इस सफेद पाउडर की वास्तविक प्रकृति और उसका इस्तेमाल क्या था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

कार्रवाई के दौरान परिसर का संचालक मौके पर मौजूद नहीं था। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने परिसर को सील कर दिया। अधिकारियों ने संचालक को विभागीय कार्यालय में उपस्थित होकर परिसर में किए जा रहे कार्य और वहां से बरामद खाद्य सामग्री के संबंध में जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

गुप्त सूचना के बाद पहुंची खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम

बताया जा रहा है कि खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना मिली थी कि नगला भूरा स्थित एक परिसर में खाने-पीने से संबंधित सामग्री का काम किया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम ने मामले की जांच शुरू की और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर परिसर में छापेमारी की।

टीम जब परिसर में पहुंची तो वहां बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री रखी मिली। अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई। इससे बरामद सामग्री और परिसर की स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया गया।

जांच के दौरान टीम को कई तरह के ड्राई फ्रूट और चायपत्ती मिली। इसके साथ ही खाद्य सामग्री से जुड़े काम में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनें भी परिसर में मौजूद थीं।

हजारों किलो सामान देखकर अधिकारी भी रह गए हैरान

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में सामने आए आंकड़े काफी बड़े हैं। विभाग के अनुसार परिसर से 560 किलो बादाम बरामद हुआ। इसके अलावा 2,720 किलो चायपत्ती भी मौके पर मिली।

जांच के दौरान 135 किलो पिस्ता और 2,528 किलो काजू भी बरामद किया गया। इसके साथ ही करीब 1,800 किलो सफेद पाउडर मिलने से मामले ने और गंभीर रूप ले लिया।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि बरामद सफेद पाउडर की प्रकृति को लेकर अभी अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। केवल उसके सफेद रंग के आधार पर उसके बारे में किसी तरह का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। विभाग द्वारा इसकी जांच और आवश्यक प्रक्रिया के बाद ही पता चल सकेगा कि यह पदार्थ क्या था और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।

परिसर में मिलीं खाद्य सामग्री से जुड़ी मशीनें

छापेमारी के दौरान अधिकारियों को परिसर में खाद्य सामग्री से संबंधित काम में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनें भी मिलीं। इससे यह संकेत मिला कि परिसर में केवल खाद्य सामग्री का भंडारण ही नहीं, बल्कि किसी प्रकार की प्रोसेसिंग या अन्य गतिविधि भी की जा रही हो सकती है।

हालांकि, परिसर में वास्तव में किस प्रकार का काम किया जा रहा था, किन नियमों के तहत किया जा रहा था और बरामद सामग्री का इस्तेमाल किस उद्देश्य से होना था, इसका स्पष्ट जवाब संचालक की मौजूदगी में पूछताछ और आगे की जांच के बाद ही सामने आएगा।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसी वजह से परिसर को सील करने का फैसला लिया है, ताकि बिना अनुमति वहां किसी प्रकार की गतिविधि न हो सके और मौके पर मौजूद सामग्री एवं मशीनों की स्थिति सुरक्षित रहे।

किसका है परिसर और किसने लिया था किराए पर?

विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह परिसर नगला भूरा निवासी लाखन सिंह का बताया गया है। इसे रौनक वाष्णेय ने किराए पर लिया हुआ था।

जब खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम कार्रवाई के लिए परिसर में पहुंची, उस समय रौनक वाष्णेय मौके पर मौजूद नहीं था। संचालक की अनुपस्थिति में टीम ने परिसर की जांच की और बाद में उसे सील कर दिया।

अधिकारियों ने अब संचालक को विभागीय कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। उससे परिसर में किए जा रहे काम, वहां रखी खाद्य सामग्री, मशीनों और अन्य सामान के संबंध में जानकारी ली जाएगी।

संचालक की मौजूदगी में फिर होगी जांच

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार मामला अभी जांच के स्तर पर है। संचालक के कार्यालय में उपस्थित होने के बाद उससे परिसर की गतिविधियों और वहां रखे सामान के संबंध में जानकारी ली जाएगी।

इसके बाद संचालक की मौजूदगी में परिसर की दोबारा जांच किए जाने की बात कही गई है। इस दौरान बरामद सामग्री, मशीनों और परिसर में चल रही गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।

यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग ने बरामद सामान को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है।

वीडियोग्राफी के बीच हुई पूरी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने परिसर में की गई कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई। खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में मौके की स्थिति, बरामद सामग्री और जांच की प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

टीम ने परिसर में मौजूद अलग-अलग खाद्य सामग्री का निरीक्षण किया और वहां इस्तेमाल हो रही मशीनों को भी देखा। बरामद सामग्री की मात्रा दर्ज की गई, जिसके बाद परिसर को सील कर दिया गया।

इतनी बड़ी मात्रा में ड्राई फ्रूट और चायपत्ती मिलने के बाद अब यह भी जांच का विषय होगा कि इन खाद्य पदार्थों को कहां से लाया गया था और इनका आगे किस तरह इस्तेमाल किया जाना था।

पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई

कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की सचल टीम के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इनमें यदुवीर सिंह, सुरेंद्र कुमार गौड़, करतार सिंह, डॉ. विकास कुमार और प्रिमेश कुमार समेत टीम के अन्य सदस्य शामिल रहे।

वहीं, सुरक्षा व्यवस्था के लिए हाथरस गेट थाना प्रभारी नितिन कसाना पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। पुलिस की मौजूदगी में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने परिसर की जांच और सीलिंग की कार्रवाई पूरी की।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर

हाथरस के नगला भूरा में हुई इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिसर में इतनी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री क्यों रखी गई थी और वहां किस प्रकार का काम किया जा रहा था।

560 किलो बादाम, 2,720 किलो चायपत्ती, 135 किलो पिस्ता, 2,528 किलो काजू और 1,800 किलो सफेद पाउडर की बरामदगी ने मामले को गंभीर बना दिया है। हालांकि, इन सभी सामग्रियों की वैधता, गुणवत्ता, उपयोग और परिसर में चल रही गतिविधियों के बारे में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

फिलहाल परिसर सील है और संचालक को विभाग के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। अब उसकी मौजूदगी में होने वाली अगली जांच और विभागीय रिपोर्ट से यह साफ होगा कि परिसर में वास्तव में किस तरह की खाद्य गतिविधि संचालित हो रही थी और बरामद सामग्री के संबंध में क्या स्थिति सामने आती है। 

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