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'पायलट को जिसने भेजा...', नेतन्याहू ने दिखाया रौद्र रूप, हाईजैक कांड पर नया वीडियो



नई दिल्ली। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को ऐसा खौफनाक घटनाक्रम हुआ, जिसने विमान सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कथित तौर पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद विमान अचानक तेजी से नीचे उतरने लगा। कुछ ही देर में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को समझ आ गया कि विमान में सामान्य तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि कॉकपिट के भीतर गंभीर संकट पैदा हो चुका है।

विमान में 174 यात्री सवार थे और इनमें बड़ी संख्या में इजरायली नागरिक शामिल थे। घायल होने के बावजूद कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और विमान में मौजूद अन्य पायलटों ने कथित हमलावर को काबू करने में मदद की। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया और सुरक्षित आपात लैंडिंग कराई गई।

घटना के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे बेहद गंभीर सुरक्षा घटना बताया। 2 अक्टूबर को जारी एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ तस्वीर स्पष्ट हो रही है। नेतन्याहू के अनुसार, हमलावर में इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होने के संकेत मिले हैं और जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उसे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन ने भेजा था। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने उसे भेजा है तो उसे “बहुत भारी कीमत” चुकानी होगी।

दुबई से तेल अवीव जा रही थी फ्लाइट

फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई थी। विमान में 174 यात्री सवार थे। उड़ान के दौरान अचानक कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच हिंसक घटनाक्रम शुरू हुआ।

रिपोर्टों के अनुसार, ओमान के नागरिक सह-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। हमले के बाद विमान की ऊंचाई बेहद तेजी से कम होने लगी। फ्लाइट ट्रैकिंग के आंकड़ों के मुताबिक विमान लगभग 14,000 फीट तक तेजी से नीचे आया। यह स्थिति कुछ ही समय में यात्रियों और चालक दल के लिए बेहद खतरनाक हो गई।

कॉकपिट में मौजूद कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विमान को बचाने की कोशिश करते रहे। उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद विमान में मौजूद यात्रियों और अन्य पायलटों को अंदर पहुंचने का मौका मिला।

यात्रियों ने हमलावर को काबू करने में निभाई अहम भूमिका

घटना के दौरान विमान में मौजूद यात्रियों ने असाधारण स्थिति का सामना किया। इजरायली यात्री यानिव हायून समेत कुछ यात्रियों ने कॉकपिट तक पहुंचकर सह-पायलट को नियंत्रण से हटाने में मदद की। विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी बाद में विमान का नियंत्रण संभालने में मदद की।

रिपोर्टों के अनुसार, विमान के नियंत्रण को स्थिर करने के बाद उसे सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया। वहां विमान की सुरक्षित आपात लैंडिंग कराई गई। इसके बाद यात्रियों को दूसरे विमान से इजरायल पहुंचाया गया।

इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बाद में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने यानिव हायून और अन्य यात्रियों के साहस की सराहना की। नेतन्याहू ने इस घटना की तुलना संभावित रूप से 11 सितंबर जैसे बड़े विमान हादसे से की, हालांकि यह तुलना उनका आकलन था, जांच का अंतिम निष्कर्ष नहीं।

सह-पायलट ओमान का नागरिक, जांच में कट्टरपंथी विचारधारा का एंगल

घटना के बाद सह-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक के रूप में सामने आई। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में उसके कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होने के संकेत मिले हैं। नेतन्याहू ने भी कहा कि उसे “इस्लामिस्ट रेडिकल इंडॉक्ट्रिनेशन” से प्रभावित होने के संकेत मिले हैं।

हालांकि, इस बिंदु को लेकर जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इजरायली सुरक्षा अधिकारियों के शुरुआती आकलन में यह संभावना भी बताई गई कि सह-पायलट ने अकेले कार्रवाई की हो सकती है। वहीं, जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या उसके पीछे कोई संगठन या बाहरी व्यक्ति था।

यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना के पीछे किसी आतंकी संगठन या किसी देश का हाथ था। जांच एजेंसियां सह-पायलट की पृष्ठभूमि, संपर्कों और संभावित वैचारिक प्रभावों की पड़ताल कर रही हैं।

नेतन्याहू की कड़ी चेतावनी- “जिसने भेजा है, वह भारी कीमत चुकाएगा”

2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मामले को लेकर नया बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां इस बात को स्पष्ट करने की कोशिश कर रही हैं कि क्या सह-पायलट को किसी अन्य पक्ष ने भेजा था।

नेतन्याहू के अनुसार, यदि जांच में यह साबित होता है कि हमलावर को किसी ने निर्देश देकर भेजा था, तो जिम्मेदार पक्ष को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा, “हम अभी यह स्पष्ट कर रहे हैं कि क्या उसे भेजा गया था। जिसने भी उसे भेजा है, वह बहुत भारी कीमत चुकाएगा।”

यह बयान ऐसे समय आया है जब जांच एजेंसियां हमले के पीछे संभावित नेटवर्क या किसी बाहरी निर्देश की संभावना को भी देख रही हैं। हालांकि, अभी तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई निर्णायक सबूत सामने नहीं आया है जिससे किसी विशेष संगठन या देश को इस घटना का जिम्मेदार ठहराया जा सके।

ईरान कनेक्शन पर भी जांच, लेकिन अभी कोई निष्कर्ष नहीं

फ्लाईदुबई घटना के बाद संभावित ईरान कनेक्शन को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें मिली जानकारी में ईरान से संभावित संबंध का संकेत मिला है। दूसरी ओर, नेतन्याहू ने कहा कि इस संबंध में निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी और जांच जारी है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक ईरान से संबंध का कोई निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है। जांच में इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब समेत कई देशों की एजेंसियां शामिल हैं। सह-पायलट को पूछताछ के लिए UAE ले जाया गया है और इजरायली अधिकारी भी उससे पूछताछ की प्रक्रिया में शामिल होने वाले हैं।

7 अक्टूबर की बरसी से पहले बढ़ी सुरक्षा चिंता

यह घटना ऐसे समय हुई जब इजरायल 7 अक्टूबर के हमलों की बरसी के करीब है। क्षेत्र में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। ऐसे में इजरायल जाने वाली एक वाणिज्यिक उड़ान के कॉकपिट में ही हिंसक हमला होने से विमान सुरक्षा और पायलटों की जांच को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

घटना के बाद इजरायल ने विदेशी पायलटों की सुरक्षा जांच और स्क्रीनिंग प्रक्रिया को लेकर भी कदम उठाए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल में फ्लाईदुबई की उड़ानों को लेकर अतिरिक्त सुरक्षा कदमों पर विचार किया गया। यह सवाल भी उठाया गया कि ओमान जैसे ऐसे देश के नागरिक को इजरायल जाने वाली उड़ान के कॉकपिट में सह-पायलट के रूप में काम करने की अनुमति कैसे मिली, क्योंकि इजरायल की पायलट संबंधी सुरक्षा व्यवस्थाओं में कुछ राष्ट्रीयताओं को लेकर प्रतिबंध मौजूद हैं।

भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका चर्चा में

पूरे घटनाक्रम में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका भी सामने आई है। हमले में घायल होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिससे यात्रियों और अन्य पायलटों को अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने का अवसर मिला।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना की है। उन्हें फिलहाल चिकित्सा देखभाल दी जा रही है। इजरायली और भारतीय अधिकारियों ने घटना के दौरान उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है।

जांच के बाद ही सामने आएगा पूरा सच

फ्लाईदुबई FZ1073 की घटना ने विमान के अंदर होने वाले संभावित “इनसाइडर थ्रेट” यानी अंदरूनी खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सुरक्षा व्यवस्था आमतौर पर यात्रियों और बाहरी हमलावरों से विमान की रक्षा पर केंद्रित होती है, लेकिन जब खतरा खुद कॉकपिट के अंदर मौजूद किसी व्यक्ति से पैदा हो तो स्थिति कहीं अधिक जटिल हो जाती है।

फिलहाल जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सह-पायलट ने ऐसा कदम क्यों उठाया। क्या वह अकेले कार्रवाई कर रहा था? क्या वह किसी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था? क्या किसी संगठन या व्यक्ति ने उसे निर्देश दिए थे? या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था?

इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेंगे। अभी तक उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट है कि FZ1073 में एक गंभीर कॉकपिट हमला हुआ, विमान तेजी से नीचे आया, लेकिन कैप्टन, यात्रियों और अन्य पायलटों की त्वरित कार्रवाई से विमान तबुक में सुरक्षित उतार लिया गया। घटना के पीछे किसी बाहरी संगठन या देश की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने तक किसी भी दावे को निश्चित तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा।

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