हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है ये खतरनाक संकेत! WHO की रिपोर्ट ने खोला बड़ा राज, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे नजरअंदाज?
आज के समय में हार्ट की बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे कारणों से हृदय रोग का खतरा लगातार महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चिंता बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की हालिया वैश्विक रिपोर्ट ने एक बार फिर इस खतरे की गंभीरता की ओर ध्यान खींचा है।
WHO के नए आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में दुनिया भर में मौतों का सबसे बड़ा कारण इस्केमिक हार्ट डिजीज यानी हृदय की धमनियों से जुड़ी बीमारी रही। इस बीमारी से 2023 में करीब 95 लाख लोगों की मौत हुई, जो दुनिया भर में हुई कुल मौतों का लगभग 16 प्रतिशत है। WHO के अनुसार, 2000 के बाद इस बीमारी से होने वाली मौतों की संख्या में लगभग 30 लाख की वृद्धि हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हृदय की बीमारी कई बार अचानक सामने आती हुई दिखाई देती है, जबकि इसके पीछे जोखिम कारक लंबे समय से मौजूद हो सकते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे संकेत शरीर में बिना किसी स्पष्ट दर्द के भी बढ़ सकते हैं। यही वजह है कि नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
WHO की रिपोर्ट ने क्यों बढ़ाई चिंता?
WHO की 2023 की वैश्विक मृत्यु संबंधी रिपोर्ट में इस्केमिक हार्ट डिजीज को दुनिया की सबसे बड़ी जानलेवा बीमारी बताया गया है। इसके बाद स्ट्रोक और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी COPD का स्थान आता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में दुनिया भर में हुई कुल 6.1 करोड़ मौतों में से 3.3 करोड़ मौतें शीर्ष 10 कारणों से हुईं। इनमें आठ कारण गैर-संचारी बीमारियां यानी Non-Communicable Diseases थीं।
इसका मतलब साफ है कि संक्रमण वाली बीमारियों के साथ-साथ अब लंबे समय तक रहने वाली बीमारियां भी वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती हैं।
WHO के अनुसार, हृदय रोगों का बड़ा हिस्सा उन जोखिम कारकों से जुड़ा है जिन्हें समय रहते पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है।
शरीर में दिखने वाले कौन से संकेत नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति में हार्ट की बीमारी के संकेत एक जैसे नहीं होते। कई लोगों में बीमारी के शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं दिखाई देते। WHO के अनुसार, कभी-कभी हार्ट अटैक या स्ट्रोक ही रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारी का पहला स्पष्ट संकेत बन सकता है।
फिर भी कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।
1. सीने में दबाव या दर्द
सीने के बीच में दबाव, जकड़न, भारीपन या दर्द हार्ट अटैक का प्रमुख संकेत हो सकता है। यह जरूरी नहीं कि दर्द हमेशा तेज ही हो। कई बार व्यक्ति इसे गैस, एसिडिटी या सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देता है।
WHO के अनुसार, हार्ट अटैक में सीने की परेशानी के साथ दर्द या असहजता हाथ, कंधे, जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैल सकती है।
2. अचानक सांस फूलना
बिना ज्यादा मेहनत किए सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी भी गंभीर संकेत हो सकता है। खासकर अगर इसके साथ सीने में असहजता, कमजोरी, चक्कर या पसीना आने जैसी समस्या हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
3. ठंडा पसीना और चक्कर
अचानक ठंडा पसीना आना, कमजोरी महसूस होना, सिर हल्का लगना या बेहोशी जैसी स्थिति हार्ट अटैक के दौरान हो सकती है। हालांकि ये लक्षण कई दूसरी स्थितियों में भी दिखाई दे सकते हैं, इसलिए इनके कारण का चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
4. मितली या उल्टी
हार्ट अटैक के दौरान कुछ लोगों को मितली या उल्टी की शिकायत भी हो सकती है। महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज वाले लोगों में लक्षण कभी-कभी सामान्य हार्ट अटैक के पारंपरिक लक्षणों से अलग हो सकते हैं। WHO के अनुसार कुछ लोगों में सांस फूलना, थकान, पीठ या जबड़े में दर्द अथवा अपच जैसी परेशानी प्रमुख हो सकती है।
बीमारी से पहले कौन से जोखिम संकेत मिल सकते हैं?
हार्ट की बीमारी का खतरा केवल दर्द से नहीं पहचाना जा सकता। कई महत्वपूर्ण संकेत ब्लड टेस्ट और स्वास्थ्य जांच के जरिए सामने आते हैं।
WHO के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ ब्लड ग्लूकोज, असामान्य ब्लड लिपिड यानी कोलेस्ट्रॉल, अधिक वजन और मोटापा हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम संकेत हैं।
इनमें से खास तौर पर हाई ब्लड प्रेशर को कई बार “साइलेंट” समस्या माना जाता है, क्योंकि लंबे समय तक व्यक्ति को कोई स्पष्ट परेशानी महसूस नहीं होती। लेकिन लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप रक्त वाहिकाओं और हृदय पर दबाव डाल सकता है।
इसी तरह डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल भी लंबे समय में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?
जिन लोगों का वजन अधिक है, शारीरिक गतिविधि बहुत कम है, वे धूम्रपान करते हैं, उनका ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है अथवा परिवार में हृदय रोग का इतिहास है, उन्हें अपने स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
WHO के मुताबिक हृदय रोग के प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में अस्वास्थ्यकर भोजन, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का इस्तेमाल और शराब का हानिकारक सेवन शामिल हैं। पर्यावरणीय कारकों में वायु प्रदूषण भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसलिए केवल सीने में दर्द का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है। जोखिम कारकों की समय पर पहचान ज्यादा महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है यह चेतावनी?
भारत जैसे देश में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती हैं। WHO India के अनुसार भारत में गैर-संचारी बीमारियों से होने वाली मौतों में हृदय संबंधी बीमारियों की बड़ी हिस्सेदारी रही है और 40 से 69 वर्ष की उम्र के लोगों में भी इनका महत्वपूर्ण प्रभाव देखा गया है।
यही वजह है कि केवल उम्र बढ़ने का इंतजार करने के बजाय कम उम्र से ही रक्तचाप, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, वजन और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी है।
बचाव के लिए क्या करें?
हार्ट की बीमारी के खतरे को कम करने के लिए जीवनशैली में कुछ बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं। नमक और अत्यधिक अस्वास्थ्यकर वसा वाले भोजन को सीमित करना, फल-सब्जियों को भोजन का हिस्सा बनाना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, तंबाकू से दूर रहना और शराब के हानिकारक सेवन से बचना मददगार उपाय माने जाते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार उसका इलाज और नियमित जांच जरूरी है।
अचानक सीने में दर्द हो तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, चक्कर, मितली या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैलना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य गैस या थकान मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए।
WHO के अनुसार हार्ट अटैक मेडिकल इमरजेंसी है और समय पर उपचार मिलने से परिणाम बेहतर हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
WHO की नई वैश्विक रिपोर्ट का संदेश साफ है—हार्ट की बीमारी आज भी दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बनी हुई है। 2023 में इस्केमिक हार्ट डिजीज से करीब 95 लाख मौतें हुईं।
हालांकि खतरा बड़ा है, लेकिन कई जोखिम कारकों को समय रहते पहचानकर नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर में दिखाई देने वाले संकेतों के साथ-साथ उन चीजों की भी निगरानी की जाए जो बिना लक्षण के बढ़ सकती हैं—जैसे ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और वजन।
इसलिए अगर लंबे समय से स्वास्थ्य जांच नहीं कराई है, तो इसे टालना सही नहीं है। और अगर अचानक हार्ट अटैक के संभावित लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू इलाज या इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना सबसे जरूरी कदम है।

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