डायबिटीज मरीजों की रिपोर्ट में HbA1c 8.1% आया तो बढ़ सकती है चिंता! क्या शरीर दे रहा है किसी बड़े खतरे का संकेत?
डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्लड शुगर की केवल एक दिन की रिपोर्ट ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक शरीर में शुगर का स्तर कितना नियंत्रित रहा, यह जानना भी बेहद जरूरी है। इसी के लिए HbA1c टेस्ट किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति की रिपोर्ट में HbA1c का स्तर 8.1 प्रतिशत आया है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। यह स्तर आमतौर पर संकेत देता है कि ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने की जरूरत है।
HbA1c टेस्ट पिछले लगभग दो से तीन महीनों के औसत ब्लड ग्लूकोज का अंदाजा देता है। डायबिटीज से पीड़ित अधिकांश वयस्कों के लिए HbA1c का सामान्य उपचार लक्ष्य अक्सर 7 प्रतिशत से कम रखा जाता है। हालांकि, हर मरीज के लिए लक्ष्य एक जैसा नहीं होता। उम्र, दूसरी बीमारियां, हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा, इलाज और व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर डॉक्टर अलग लक्ष्य तय कर सकते हैं।
इसलिए HbA1c 8.1% आने का मतलब यह नहीं है कि तुरंत घबराने की जरूरत है, लेकिन यह जरूर संकेत है कि वर्तमान डाइट, व्यायाम, दवाओं और शुगर मॉनिटरिंग की समीक्षा करना जरूरी हो सकता है।
HbA1c 8.1% का क्या मतलब है?
HbA1c टेस्ट में यह देखा जाता है कि खून में मौजूद हीमोग्लोबिन का कितना हिस्सा ग्लूकोज से जुड़ा हुआ है। इसकी रिपोर्ट प्रतिशत में आती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर अधिक रहने पर HbA1c भी बढ़ सकता है।
आमतौर पर HbA1c के स्तर को इस तरह समझा जाता है:
5.7% से कम – सामान्य श्रेणी
5.7% से 6.4% – प्रीडायबिटीज की श्रेणी
6.5% या अधिक – डायबिटीज की श्रेणी में आ सकता है
8.1% – डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में अक्सर निर्धारित शुगर लक्ष्य से अधिक
हालांकि, किसी व्यक्ति में डायबिटीज का निदान केवल एक रिपोर्ट देखकर तय नहीं किया जाता। चिकित्सक लक्षणों, अन्य ब्लड टेस्ट और जरूरत के अनुसार दोबारा जांच को ध्यान में रखते हैं।
HbA1c और रोजाना की शुगर रिपोर्ट में क्या अंतर है?
कई लोग HbA1c और रोजाना की ब्लड शुगर रिपोर्ट को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों अलग जानकारी देते हैं।
फास्टिंग ब्लड शुगर उस समय शरीर में मौजूद ग्लूकोज का स्तर बताती है। इसी तरह भोजन के बाद की जांच खाने के बाद शुगर की स्थिति दिखाती है। दूसरी ओर, HbA1c पिछले कई हफ्तों के औसत शुगर नियंत्रण की तस्वीर देता है।
इसलिए किसी दिन शुगर सामान्य आने का मतलब यह नहीं है कि पिछले कई महीनों से शुगर भी सामान्य रही होगी।
HbA1c बढ़ने से क्यों चिंतित होना चाहिए?
अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक बढ़ी रहती है, तो शरीर की छोटी और बड़ी रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ सकता है। समय के साथ डायबिटीज की कई जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है।
आंखों में डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी समस्या हो सकती है। किडनी की रक्त वाहिकाएं प्रभावित हो सकती हैं। नसों पर असर पड़ने से हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन या दर्द महसूस हो सकता है।
इसके अलावा लंबे समय तक अनियंत्रित डायबिटीज हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा सकती है। पैरों में घाव होने पर उसके भरने में देरी और संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
हालांकि, इन जटिलताओं का खतरा हर व्यक्ति में समान नहीं होता। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, वजन, किडनी की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए अपनाएं ये 8 आदतें
1. सफेद चावल और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर ध्यान दें
सफेद चावल, मैदा, सफेद ब्रेड और दूसरे रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ खाने के बाद ब्लड शुगर बढ़ा सकते हैं। हालांकि इसका असर केवल खाद्य पदार्थ पर निर्भर नहीं करता। भोजन की मात्रा, उसके साथ खाए जाने वाले प्रोटीन और सब्जियों तथा व्यक्ति की शारीरिक स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है।
डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं है कि सफेद चावल हमेशा के लिए छोड़ना जरूरी है। मात्रा नियंत्रित करना और भोजन को दाल, सब्जियों तथा प्रोटीन के स्रोतों के साथ संतुलित करना बेहतर तरीका हो सकता है।
साबुत अनाज और कम प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थों को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है।
2. भोजन की दिनचर्या व्यवस्थित रखें
भोजन का समय और मात्रा व्यक्ति की दवाओं, गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होनी चाहिए।
कुछ लोगों को भोजन छोड़ने के बाद अत्यधिक भूख लग सकती है, जबकि इंसुलिन या कुछ शुगर कम करने वाली दवाएं लेने वाले लोगों में भोजन छोड़ने से ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा हो सकता है।
इसलिए यदि आप ऐसी दवाएं लेते हैं जिनसे हाइपोग्लाइसीमिया का खतरा रहता है, तो भोजन छोड़ने या लंबे समय तक उपवास करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
3. फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं
फाइबर युक्त भोजन पेट को लंबे समय तक भरा रखने और भोजन के बाद ब्लड शुगर में तेज बढ़ोतरी को कम करने में मदद कर सकता है।
हरी सब्जियां, सलाद, दालें, चना, राजमा, बीन्स, ओट्स और साबुत अनाज को भोजन में शामिल किया जा सकता है।
साबुत फल आमतौर पर फलों के जूस की तुलना में बेहतर विकल्प होते हैं। बादाम, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ भी संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं।
हालांकि, किडनी की बीमारी या किसी अन्य विशेष स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेनी चाहिए।
4. हर 3-4 घंटे में खाना जरूरी नहीं
डायबिटीज के हर मरीज के लिए हर तीन या चार घंटे में खाना जरूरी नहीं होता। कुछ लोगों को छोटे और नियमित भोजन से भूख नियंत्रित करने में मदद मिलती है, जबकि कुछ लोग तीन संतुलित भोजन के साथ बेहतर रहते हैं।
मुख्य बात यह है कि कुल कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा, दवाओं और शारीरिक गतिविधि में संतुलन बना रहे।
बार-बार स्नैक्स लेने से अतिरिक्त कैलोरी भी बढ़ सकती है। इसलिए अपनी जरूरत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार भोजन का पैटर्न तय करना बेहतर है।
5. कम प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें
डाइट में सब्जियां, दालें, बीन्स, साबुत अनाज, ओट्स, मेवे और उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल किए जा सकते हैं।
मीठे पेय, अधिक चीनी वाली चाय-कॉफी, मिठाइयां और अत्यधिक प्रोसेस्ड स्नैक्स को सीमित करना फायदेमंद हो सकता है।
केवल किसी खाद्य पदार्थ का ग्लाइसेमिक इंडेक्स देखकर फैसला करना भी सही तरीका नहीं है। भोजन की कुल मात्रा, उसमें मौजूद फाइबर, प्रोटीन और फैट तथा व्यक्ति की दवाएं भी ब्लड शुगर को प्रभावित करती हैं।
6. रोजाना शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं
व्यायाम और शारीरिक गतिविधि ब्लड शुगर मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं और नियमित गतिविधि से शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया बेहतर हो सकती है।
यदि स्वास्थ्य इसकी अनुमति देता है, तो सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखा जा सकता है।
तेज चलना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य गतिविधियां की जा सकती हैं।
कुछ लोगों में भोजन के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की सैर भी भोजन के बाद ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
7. लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें
आजकल ऑफिस का काम, मोबाइल और कंप्यूटर के कारण लोग कई घंटे लगातार बैठे रहते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने की आदत को कम करना भी जरूरी है।
काम के दौरान बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट चलना या हल्की स्ट्रेचिंग करना दैनिक गतिविधि बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है।
हर 30 से 60 मिनट में छोटा ब्रेक लेना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। हालांकि, यह नियमित व्यायाम का विकल्प नहीं है।
8. दवाएं समय पर लें और डॉक्टर से फॉलो-अप करें
HbA1c 8.1% होने पर केवल खानपान बदलना हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। यदि डॉक्टर ने डायबिटीज की दवा या इंसुलिन दिया है, तो उसे निर्धारित तरीके से लेना जरूरी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खुद से दवा की खुराक न बढ़ाएं, न घटाएं और न ही बंद करें।
डॉक्टर आपकी ब्लड शुगर रीडिंग, मौजूदा दवाओं, डाइट, शारीरिक गतिविधि और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को देखकर उपचार में बदलाव कर सकते हैं।
HbA1c की अगली जांच कब करनी है, यह भी डॉक्टर से पूछना चाहिए। उपचार में बदलाव के बाद कई मरीजों में लगभग तीन महीने के आसपास HbA1c की दोबारा जांच की जाती है, लेकिन समय व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।
तनाव और नींद को भी न करें नजरअंदाज
ब्लड शुगर कंट्रोल में केवल खाना और दवा ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। लगातार तनाव और खराब नींद भी शुगर मैनेजमेंट को प्रभावित कर सकते हैं।
सोने और जागने का समय नियमित रखने की कोशिश करें। तनाव कम करने के लिए पैदल चलना, ध्यान, हल्का योग या अपनी पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकाल सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति को तेज खर्राटे, सोते समय सांस रुकने जैसी समस्या या दिन में अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर से चर्चा करना उचित है।
क्या HbA1c 8.1% आने पर घबराने की जरूरत है?
HbA1c 8.1% को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि वर्तमान डायबिटीज मैनेजमेंट की समीक्षा करने की जरूरत है।
सबसे पहले डॉक्टर से रिपोर्ट पर चर्चा करें। इसके बाद डाइट, शारीरिक गतिविधि, दवाओं और नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग पर ध्यान दिया जा सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि HbA1c 8.1% होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को डायबिटीज की कोई जटिलता निश्चित रूप से हो चुकी है। यह मुख्य रूप से शुगर नियंत्रण को बेहतर करने की जरूरत का संकेत हो सकता है।
किन लक्षणों में तुरंत चिकित्सा सहायता लें?
अगर ब्लड शुगर बहुत ज्यादा हो और उसके साथ उल्टी, पेट दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम, बहुत ज्यादा प्यास या बार-बार पेशाब आने जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
तेज या गहरी सांस लेने जैसी समस्या भी गंभीर स्थिति का संकेत हो सकती है। ऐसे लक्षणों को केवल घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
HbA1c 8.1% एक ऐसी रिपोर्ट है जिसे गंभीरता से लेकर आगे की रणनीति बनानी चाहिए। संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का सही तरीके से पालन ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद कर सकता है।
हालांकि, हर डायबिटीज मरीज का HbA1c लक्ष्य अलग हो सकता है। इसलिए इंटरनेट पर मौजूद किसी सामान्य लक्ष्य को अपनी व्यक्तिगत दवा या इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
अगर आपकी HbA1c रिपोर्ट 8.1% है, तो अपनी पूरी स्वास्थ्य स्थिति और मौजूदा दवाओं के आधार पर डॉक्टर से सलाह लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद करना या उसकी खुराक में बदलाव करना खतरनाक हो सकता है।

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