मक्का की मस्जिद में कथित Kiss के आरोप में कपल को फांसी, 22 साल के बेटे की मौत से टूट गई मां
सऊदी अरब में 22 वर्षीय बांग्लादेशी प्रवासी मजदूर नजरुल इस्लाम की मौत की खबर ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिवार का कहना है कि नजरुल को 14 अक्टूबर 2026 को मक्का क्षेत्र में मृत्युदंड दिया गया, लेकिन उन्हें इस फैसले की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई। परिवार के मुताबिक, उन्हें बेटे की मौत के बारे में मीडिया रिपोर्टों के जरिए पता चला। नजरुल की मां रहीमा बेगम बेटे की मौत के बाद लगातार रो रही हैं और परिवार अब उसका शव बांग्लादेश वापस लाने की मांग कर रहा है।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के अनुसार नजरुल और एक बांग्लादेशी महिला को मक्का की एक मस्जिद में कथित “अनैतिक कृत्य” के मामले में दोषी ठहराया गया था। दोनों को ताजीर के तहत मौत की सजा सुनाई गई और बाद में 14 अक्टूबर को मक्का क्षेत्र में सजा लागू कर दी गई। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने कथित कृत्य की सटीक प्रकृति, मस्जिद का नाम और गिरफ्तारी से लेकर मुकदमे तक की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
आखिर नजरुल इस्लाम को किस मामले में मिली मौत की सजा?
सऊदी अरब के आधिकारिक बयान के अनुसार, नजरुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिती अख्तर को एक मस्जिद के अंदर “अनैतिक कृत्य” करने का दोषी पाया गया था। जांच के बाद मामला अदालत में पहुंचा और अदालत ने मौत की सजा सुनाई। सऊदी गृह मंत्रालय ने कहा कि अपराध की गंभीरता और मस्जिद की पवित्रता के उल्लंघन को देखते हुए ताजीर के तहत सजा दी गई। फैसला संबंधित अधिकारियों द्वारा बरकरार रखे जाने और शाही आदेश के बाद 14 अक्टूबर को इसे लागू किया गया।
हालांकि, इस पूरे मामले में कई सवाल अब भी बने हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि नजरुल को मुकदमे के दौरान किस तरह की कानूनी सहायता मिली, क्या उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिला और उसके परिवार या बांग्लादेशी मिशन को मृत्युदंड की जानकारी कब दी गई। बांग्लादेश सरकार ने भी शुरुआत में दोनों मृत्युदंड पाने वाले नागरिकों की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।
नौकरी की तलाश में सऊदी अरब गया था नजरुल
नजरुल इस्लाम ब्राह्मणबाड़िया जिले के एक गांव का रहने वाला था और चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा बताया गया है। परिवार के अनुसार, वह 10 नवंबर 2022 को बेहतर कमाई और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से सऊदी अरब गया था। वहां वह सफाईकर्मी के तौर पर काम करता था।
परिवार के लिए यह विदेश यात्रा उम्मीदों से भरी थी। पिता अब्दुल बशीर ने बेटे को सऊदी अरब भेजने के लिए करीब 7 लाख टका का कर्ज लिया था। उन्हें उम्मीद थी कि नजरुल वहां नौकरी करके पैसे कमाएगा और परिवार की आर्थिक परेशानियां कम होंगी।
लेकिन कुछ ही समय बाद हालात पूरी तरह बदल गए। परिवार के मुताबिक, सऊदी अरब पहुंचने के कुछ महीनों बाद नजरुल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसके बाद वह वर्षों तक जेल में रहा। परिवार का कहना है कि उन्हें इस दौरान पूरी कानूनी स्थिति की जानकारी नहीं मिल सकी।
हर रविवार जेल से मां को फोन करता था बेटा
नजरुल की मां रहीमा बेगम के लिए बेटे से होने वाली फोन पर बातचीत ही सबसे बड़ा सहारा थी। परिवार के अनुसार, नजरुल जेल से नियमित रूप से फोन करता था और रविवार को परिवार से उसकी बात होती थी। मां को उम्मीद थी कि एक दिन उसका बेटा जेल से बाहर आएगा और वापस घर लौटेगा।
लेकिन परिवार को यह अंदाजा नहीं था कि इन फोन कॉल्स में से एक आखिरी बातचीत साबित होगी। रिपोर्टों के अनुसार, नजरुल ने 11 अक्टूबर को भी परिवार से बात की थी। इसके कुछ ही दिन बाद 14 अक्टूबर को उसकी मौत की सजा लागू कर दी गई। परिवार का कहना है कि उन्हें पहले इसकी सूचना नहीं मिली थी।
बेटे की मौत की खबर सुनने के बाद मां रहीमा बेगम का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार ने कहा कि नजरुल की बुआ अबेदा बेगम की भी यह खबर सुनने के बाद कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। इस घटना ने परिवार के दुख को और गहरा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें, लेकिन सच्चाई अभी साफ नहीं
नजरुल की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उसके और दूसरी मृत्युदंड पाने वाली महिला के रिश्ते और कथित अपराध को लेकर कई तरह के दावे सामने आए। कुछ रिपोर्टों में कथित तौर पर “किस” किए जाने जैसी बातें भी कही गईं, लेकिन सऊदी अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से कथित कृत्य का इतना विशिष्ट विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए इन दावों को पुख्ता तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं है।
नजरुल के परिवार ने सोशल मीडिया पर चल रहे कुछ दावों को भी खारिज किया है। उसकी मां ने कहा है कि उनका बेटा अविवाहित था और परिवार को दूसरी महिला के बारे में जानकारी नहीं थी। परिवार ने मामले में साजिश की आशंका जताते हुए न्याय की मांग की है।
बांग्लादेश को भी पहले नहीं दी गई थी जानकारी
इस मामले ने सिर्फ नजरुल के परिवार को ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश सरकार को भी चिंता में डाल दिया है। बांग्लादेश के जेद्दा स्थित वाणिज्य दूतावास ने कहा कि उसे दोनों नागरिकों के मृत्युदंड को लागू किए जाने से पहले सूचना नहीं दी गई थी। इसके बाद बांग्लादेश ने सऊदी अधिकारियों से औपचारिक स्पष्टीकरण मांगा।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सऊदी राजदूत से भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। ढाका यह जानना चाहता है कि दोनों नागरिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किस तरह हुई और मौत की सजा लागू करने से पहले बांग्लादेशी मिशन को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
दिलचस्प बात यह है कि बाद की रिपोर्टों में सामने आया कि दोनों के नाम सऊदी अधिकारियों द्वारा साझा की गई कैदियों की सूची में मौजूद थे, लेकिन उस सूची में यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। इससे मामले में सूचना के आदान-प्रदान को लेकर सवाल और बढ़ गए हैं।
परिवार पर कर्ज का बोझ भी बढ़ गया
नजरुल के पिता ने बेटे को विदेश भेजने के लिए करीब 7 लाख टका उधार लिया था। परिवार को उम्मीद थी कि नजरुल नौकरी करके कर्ज चुकाने में मदद करेगा। लेकिन बेटे की मौत के बाद परिवार के सामने अब भावनात्मक संकट के साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
पिता अब्दुल बशीर का कहना है कि कर्ज देने वाले लोग पैसे वापस मांग रहे हैं। उन्होंने सरकार से बेटे के मामले की जांच कराने और उसके शव को बांग्लादेश वापस लाने में मदद करने की अपील की है।
परिवार की सबसे बड़ी इच्छा अब यही है कि नजरुल का शव उन्हें मिल सके, ताकि वे अपने बेटे को अंतिम विदाई दे सकें।
प्रशासन ने कहा—शव आने पर नियमों के अनुसार मदद करेंगे
ब्राह्मणबाड़िया के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद अबू सईद ने कहा कि प्रशासन को अभी तक उच्च स्तर से कोई निर्देश नहीं मिला है और परिवार की ओर से भी औपचारिक आवेदन नहीं किया गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर नजरुल का शव बांग्लादेश लाया जाता है तो जिला प्रशासन नियमों के अनुसार परिवार की मदद करेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
नजरुल इस्लाम की मौत के बाद कई सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि उसके खिलाफ मुकदमा किस आधार पर चला, उसे किस तरह की कानूनी सहायता मिली और क्या उसके परिवार तथा बांग्लादेशी राजनयिक मिशन को मृत्युदंड से पहले पर्याप्त जानकारी दी गई थी।
सऊदी अरब ने अपने आधिकारिक बयान में अदालत की प्रक्रिया और ताजीर के तहत दी गई सजा का उल्लेख किया है, जबकि नजरुल का परिवार दावा कर रहा है कि उसे पूरी जानकारी नहीं दी गई और उसे न्याय नहीं मिला। इन दोनों पक्षों के बीच मौजूद अंतर को देखते हुए बांग्लादेश सरकार की ओर से मांगा गया आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण हो गया है।
फिलहाल नजरुल का परिवार इंसाफ और बेटे के शव की वापसी का इंतजार कर रहा है। एक परिवार जिसने बेहतर भविष्य की उम्मीद में बेटे को विदेश भेजा था, अब उसी बेटे की अंतिम विदाई के लिए सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। मामले में आगे सऊदी अरब की ओर से क्या जवाब आता है और बांग्लादेश सरकार किस तरह आगे कार्रवाई करती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
इस खबर में मृत्युदंड, आरोप और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी उपलब्ध आधिकारिक बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। कथित अपराध की पूरी प्रकृति, मुकदमे की प्रक्रिया और कानूनी सहायता से जुड़े कुछ तथ्य स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।

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