यूपी चुनाव से पहले बड़ा सर्वे: क्या योगी सरकार को तीसरी बार मौका देना चाहती है जनता? सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। चुनाव में अभी कुछ समय बाकी है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच News18 के यूपी मेगा सर्वे ने राज्य की जनता के मूड को लेकर कई अहम संकेत सामने रखे हैं। सर्वे में सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए?
सर्वे में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि इस सवाल पर बीजेपी के पक्ष में फिलहाल मजबूत जनमत दिखाई दे रहा है। करीब 65 फीसदी लोगों ने माना कि बीजेपी को तीसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए, जबकि लगभग 30 फीसदी लोगों ने इससे असहमति जताई। करीब 5 फीसदी लोगों ने इस सवाल पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी।
News18 के अनुसार, इस मेगा सर्वे में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को शामिल किया गया और कुल 30,925 लोगों से बातचीत की गई। सर्वे 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 के बीच किया गया।
तीसरी बार बीजेपी सरकार के सवाल पर क्या बोली जनता?
सर्वे में लोगों से सीधे पूछा गया कि क्या बीजेपी को उत्तर प्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। जवाब में:
हां – करीब 65 फीसदी
नहीं – करीब 30 फीसदी
कह नहीं सकते – करीब 5 फीसदी
News18 के प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक यह समर्थन 65.2 फीसदी के आसपास रहा। यानी हर 100 लोगों में लगभग 65 लोग बीजेपी को एक और मौका देने के पक्ष में नजर आए।
हालांकि, इसे चुनाव का नतीजा नहीं माना जा सकता। यह सर्वे के दौरान पूछे गए सवालों पर लोगों की राय है। चुनाव के समय मुद्दे, उम्मीदवार, गठबंधन, स्थानीय समीकरण और राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं।
30 हजार से ज्यादा लोगों से हुई बातचीत
इस सर्वे की खास बात इसका बड़ा सैंपल बताया गया है। News18 के अनुसार उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में लोगों की राय ली गई। गांव और शहर दोनों क्षेत्रों को सर्वे में शामिल किया गया।
18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के महिला और पुरुषों से आमने-सामने बातचीत के आधार पर राय जुटाई गई। सर्वे में अलग-अलग आयु वर्ग, शिक्षा, पेशा, जातीय समूह और धार्मिक समुदायों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया।
इस तरह सर्वे का उद्देश्य सिर्फ किसी एक वर्ग की राय जानना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक समूहों के बीच सरकार को लेकर धारणा समझना था।
किस उम्र के कितने लोगों से सवाल पूछे गए?
सर्वे में अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों को शामिल किया गया। आंकड़ों के मुताबिक:
18 से 25 वर्ष – 17%
26 से 35 वर्ष – 36%
36 से 45 वर्ष – 29%
46 से 55 वर्ष – 11%
56 से 65 वर्ष – 5%
66 वर्ष या उससे अधिक – 1%
इन आंकड़ों में 26 से 35 वर्ष की उम्र वाले लोगों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। इसके बाद 36 से 45 वर्ष और 18 से 25 वर्ष के लोगों की संख्या रही।
युवा और कामकाजी उम्र के लोगों की बड़ी भागीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रोजगार, शिक्षा, महंगाई और सरकारी योजनाओं जैसे मुद्दे इस वर्ग के लिए चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
सर्वे में पुरुषों की संख्या ज्यादा
सर्वे में पुरुषों की हिस्सेदारी 76 फीसदी, जबकि महिलाओं की हिस्सेदारी 24 फीसदी बताई गई है।
इस आंकड़े को देखते हुए सर्वे के नतीजों की व्याख्या करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि सैंपल में पुरुष और महिला प्रतिभागियों का अनुपात समान नहीं था।
व्यापारी और किसान भी बड़ी संख्या में शामिल
सर्वे में अलग-अलग पेशों से जुड़े लोगों की राय भी ली गई। इनमें व्यापारी, किसान, महिलाएं, कामगार, छात्र, बेरोजगार और मजदूर शामिल रहे।
पेशा आधारित हिस्सेदारी इस प्रकार बताई गई है:
व्यापारी – 17.6%
किसान – 16.9%
महिलाएं – 15%
कामगार – 12.7%
छात्र – 8.4%
बेरोजगार – 6.7%
मजदूर – 5.9%
गैर-कृषि क्षेत्र में मजदूरी – 5.5%
भूमिहीन मजदूर – 5%
नौकरीपेशा – 4.6%
रिटायर लोग – 1.8%
इससे पता चलता है कि सर्वे में ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था से जुड़े अलग-अलग वर्गों को शामिल करने की कोशिश की गई।
शिक्षा के आधार पर भी लिया गया लोगों का फीडबैक
शैक्षणिक स्थिति के आधार पर भी लोगों की राय दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार 6.5 फीसदी लोग ऐसे थे जो पढ़े-लिखे नहीं थे। वहीं प्राइमरी शिक्षा प्राप्त लोगों की हिस्सेदारी 10.1 फीसदी रही।
10वीं पास लोगों की हिस्सेदारी 20.1 फीसदी, 12वीं पास लोगों की 27.4 फीसदी, कॉलेज स्तर तक पढ़े लोगों की 13.7 फीसदी और ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट लोगों की हिस्सेदारी 21.4 फीसदी बताई गई।
यानी सर्वे में कम शिक्षा वाले लोगों से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों तक को शामिल किया गया।
जातीय समीकरण में OBC की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। सर्वे में भी अलग-अलग सामाजिक समूहों को शामिल किया गया।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार:
OBC – 45.8%
सामान्य वर्ग – 35.8%
SC – 14.7%
ST – 2.4%
OBC वर्ग की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में गैर-यादव OBC समेत विभिन्न पिछड़ी जातियों का राजनीतिक प्रभाव कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक माना जाता है।
धार्मिक आधार पर हिंदू और मुस्लिम समुदायों की भागीदारी
धार्मिक आधार पर भी अलग-अलग समुदायों से राय ली गई। सर्वे में हिंदू प्रतिभागियों की हिस्सेदारी 89.5 फीसदी बताई गई।
इसके अलावा मुस्लिम शिया समुदाय से 4 फीसदी और मुस्लिम सुन्नी समुदाय से 5.1 फीसदी लोगों की राय शामिल की गई। सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और नास्तिक वर्गों के लोगों को भी सर्वे में शामिल किया गया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि किसी भी सर्वे में अलग-अलग समूहों की हिस्सेदारी और सैंपलिंग पद्धति उसके नतीजों की व्याख्या को प्रभावित कर सकती है।
योगी सरकार के कामकाज पर भी सामने आई राय
News18 के इसी मेगा सर्वे में सिर्फ तीसरे कार्यकाल के सवाल पर राय नहीं ली गई, बल्कि योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज और विभिन्न मुद्दों पर भी लोगों से सवाल पूछे गए।
ताजा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक 77.1 फीसदी लोगों ने योगी सरकार के कामकाज से संतुष्टि जताई, जबकि 13.5 फीसदी लोग असंतुष्ट नजर आए। कानून-व्यवस्था को सरकार के प्रदर्शन का मजबूत पक्ष बताया गया, जबकि रोजगार से जुड़े मुद्दे पर अपेक्षाकृत अधिक चिंता सामने आई।
सर्वे में कानून-व्यवस्था और कथित 'गुंडाराज' की वापसी का डर सबसे बड़े चुनावी मुद्दों में दिखाई दिया। इसके अलावा रोजगार, महंगाई, भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी लोगों की राय दर्ज की गई।
क्या 2027 में फिर बनेगी बीजेपी सरकार?
अगर सर्वे के आंकड़ों को संकेत के तौर पर देखा जाए तो फिलहाल बीजेपी के लिए तस्वीर मजबूत दिखाई देती है। इसी मेगा सर्वे में 66.6 फीसदी लोगों ने बीजेपी नेतृत्व वाले NDA के पक्ष में वोट देने की बात कही, जबकि करीब 26.4 फीसदी लोग समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में दिखाई दिए। BSP के लिए यह आंकड़ा करीब 5.4 फीसदी रहा।
मुख्यमंत्री पद की पसंद के सवाल पर भी योगी आदित्यनाथ आगे दिखाई दिए। सर्वे में करीब 66.2 फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के तौर पर पसंद किया, जबकि 24.4 फीसदी लोगों ने अखिलेश यादव के पक्ष में राय दी।
हालांकि विधानसभा चुनाव तक राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं। विपक्षी दल अपनी रणनीति, गठबंधन और उम्मीदवारों को लेकर फैसले करेंगे। बीजेपी भी अपने मौजूदा विधायकों और संगठन की तैयारियों पर काम कर रही है।
सर्वे के आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
इस सर्वे का सबसे बड़ा संदेश यही है कि फिलहाल उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए लगातार तीसरे कार्यकाल की संभावना को लेकर जनता के एक बड़े हिस्से में सकारात्मक राय दिखाई दे रही है। लेकिन दूसरी तरफ करीब 30 फीसदी लोगों का तीसरे कार्यकाल के खिलाफ होना भी विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
इसके अलावा रोजगार, महंगाई और अन्य स्थानीय मुद्दे चुनाव के दौरान मतदाताओं की प्राथमिकता बदल सकते हैं। खासकर युवा, बेरोजगार, किसान और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की समस्याएं आने वाले महीनों में राजनीतिक बहस के केंद्र में रह सकती हैं।
इसलिए 65 फीसदी से ज्यादा लोगों का तीसरे कार्यकाल के समर्थन में होना बीजेपी के लिए मजबूत संकेत जरूर है, लेकिन इसे 2027 के चुनाव का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। असली तस्वीर चुनावी मैदान में उम्मीदवारों, गठबंधनों, स्थानीय मुद्दों और मतदान के दिन मतदाताओं के अंतिम फैसले से ही सामने आएगी।

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