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टॉयलेट में दिख रहा है ये बदलाव तो तुरंत हो जाएं सावधान! बड़ी आंत के कैंसर के 8 संकेत कहीं आप तो नजरअंदाज नहीं कर रहे?



बड़ी आंत और रेक्टम से जुड़ा कैंसर, जिसे आम तौर पर बाउल कैंसर या कोलोरेक्टल कैंसर कहा जाता है, एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसकी शुरुआत कई बार ऐसे लक्षणों से होती है जिन्हें लोग सामान्य कब्ज, गैस, बवासीर या पेट की दूसरी परेशानियों से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि शरीर में होने वाले लगातार बदलावों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मल त्याग की आदत में बदलाव, मल में खून, लगातार पेट दर्द, बिना कोशिश वजन कम होना और असामान्य थकान जैसे संकेत कई कारणों से हो सकते हैं। इनका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर ही है, लेकिन अगर ये लक्षण लगातार बने रहें तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। NHS भी बाउल कैंसर के संभावित संकेतों में मल में खून, लंबे समय तक कब्ज या दस्त, पेट दर्द, पेट फूलना, बिना कोशिश वजन कम होना और थकान जैसे लक्षणों को शामिल करता है।

बड़ी आंत का कैंसर आखिर होता क्या है?

कोलोरेक्टल कैंसर उस समय होता है जब बड़ी आंत यानी कोलन या रेक्टम की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। बड़ी आंत पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भोजन से बचे पदार्थों से पानी सोखने और शरीर से अपशिष्ट बाहर निकालने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कई मामलों में कैंसर बनने से पहले आंत में पॉलीप्स यानी असामान्य छोटी-छोटी वृद्धि हो सकती हैं। इनमें से कुछ पॉलीप्स समय के साथ कैंसर में बदल सकते हैं। स्क्रीनिंग के दौरान ऐसे पॉलीप्स की पहचान कर उन्हें हटाया जा सकता है, जिससे कुछ मामलों में कैंसर को बनने से पहले ही रोका जा सकता है।

यही कारण है कि केवल लक्षणों का इंतजार करना हमेशा पर्याप्त नहीं माना जाता। उम्र और जोखिम के अनुसार डॉक्टर से स्क्रीनिंग के बारे में बात करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

1. मल त्याग की आदत अचानक बदलना

सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक है बॉवेल हैबिट में लगातार बदलाव।

अगर पहले आपका पेट सामान्य रूप से साफ होता था लेकिन अचानक लंबे समय तक कब्ज रहने लगी, बार-बार दस्त होने लगे या सामान्य से ज्यादा या कम बार टॉयलेट जाना पड़ने लगा, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।

कभी-कभार कब्ज या दस्त होना आम बात हो सकती है। खान-पान, संक्रमण, तनाव या कई अन्य कारणों से भी ऐसा हो सकता है। लेकिन जब मल त्याग की आदत में बदलाव लगातार बना रहे या आपके सामान्य पैटर्न से काफी अलग हो जाए, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

CDC भी कोलोरेक्टल कैंसर के संभावित लक्षणों में bowel habits में बदलाव, कब्ज, दस्त और आंत पूरी तरह खाली न होने जैसा महसूस होना शामिल करता है।

2. मल में लाल या काला खून दिखाई देना

मल में खून आना ऐसा संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

खून चमकीले लाल रंग का हो सकता है या मल का रंग काला/बहुत गहरा दिखाई दे सकता है। हालांकि, मल में खून आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर है। बवासीर, गुदा में चोट, संक्रमण और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।

लेकिन बिना जांच के यह तय नहीं किया जा सकता कि खून किस वजह से आ रहा है। NHS के अनुसार मल में लाल या काला खून और मलद्वार से रक्तस्राव बाउल कैंसर के संभावित लक्षणों में शामिल हैं।

इसलिए अगर खून बार-बार दिखाई दे रहा है या इसके साथ दूसरे लक्षण भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

3. टॉयलेट करने के बाद भी पेट साफ न होने का एहसास

कुछ लोगों को मल त्याग करने के बाद भी ऐसा महसूस होता है कि आंत पूरी तरह खाली नहीं हुई। इसके बाद थोड़ी देर में फिर टॉयलेट जाने की इच्छा हो सकती है।

इस तरह की समस्या के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन अगर यह बार-बार और लंबे समय तक हो रही है तो इसे सामान्य मानकर छोड़ना सही नहीं है।

CDC इस तरह के incomplete bowel emptying को भी कोलोरेक्टल कैंसर के संभावित लक्षणों में शामिल करता है।

4. लगातार पेट दर्द या ऐंठन

पेट में कभी-कभी दर्द होना आम हो सकता है। गैस, अपच, संक्रमण या खाने-पीने की गड़बड़ी से भी पेट दर्द हो सकता है।

लेकिन अगर पेट दर्द, ऐंठन या बेचैनी लगातार बनी हुई है और उसका कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा, तो जांच की जरूरत हो सकती है।

NHS और CDC दोनों लगातार पेट दर्द या ऐंठन को संभावित चेतावनी संकेतों में शामिल करते हैं।

5. पेट में गांठ या लगातार पेट फूलना

कुछ लोगों में पेट में असामान्य गांठ या सूजन महसूस हो सकती है। लगातार पेट फूलना, भारीपन या असहजता भी कई स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हो सकती है।

हर बार इसका संबंध कैंसर से नहीं होता, लेकिन यदि पेट फूलने की समस्या लगातार बनी रहती है या उसके साथ वजन कम होना, मल में बदलाव या रक्तस्राव जैसे दूसरे संकेत भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी हो जाता है।

NHS बाउल कैंसर के संभावित लक्षणों में पेट में गांठ और bloating दोनों को शामिल करता है।

6. बिना कोशिश वजन कम होना

अगर आपने वजन कम करने के लिए डाइट या एक्सरसाइज में कोई खास बदलाव नहीं किया है, फिर भी वजन लगातार घट रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बिना कारण वजन कम होने के पीछे कई अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। कैंसर भी उनमें से एक हो सकता है।

CDC के अनुसार बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना कोलोरेक्टल कैंसर के संभावित लक्षणों में शामिल है।

इसका मतलब यह नहीं कि वजन कम होने वाला हर व्यक्ति कैंसर से पीड़ित है। लेकिन अचानक और लगातार वजन घटने की वजह जानना जरूरी है।

7. लगातार थकान और कमजोरी

कई लोग लगातार थकान को काम का दबाव, नींद की कमी या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर पर्याप्त आराम के बावजूद थकान बनी हुई है, तो इसकी जांच कराना उचित हो सकता है।

बाउल कैंसर में कभी-कभी लंबे समय तक रक्तस्राव के कारण शरीर में आयरन की कमी या एनीमिया हो सकता है। इससे कमजोरी, थकान और कुछ लोगों में सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है।

NHS भी लगातार थकान या सांस फूलने को संभावित संकेतों में शामिल करता है और इसे एनीमिया से जोड़ता है।

8. सांस फूलना भी हो सकता है संकेत

अगर सामान्य गतिविधि या थोड़ी मेहनत के बाद असामान्य रूप से सांस फूलने लगे और इसके साथ थकान या कमजोरी भी हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

हालांकि सांस फूलने के बहुत से कारण हो सकते हैं, जैसे हृदय या फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं, एनीमिया और अन्य स्थितियां। इसलिए इसे देखकर खुद से कैंसर का अनुमान लगाना बिल्कुल सही नहीं होगा।

जरूरी यह है कि अगर समस्या लगातार बनी हुई है तो उसकी वजह की चिकित्सकीय जांच हो।

किन लोगों में जोखिम ज्यादा हो सकता है?

कोलोरेक्टल कैंसर का जोखिम उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है। इसके अलावा परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर या पॉलीप्स का इतिहास, कुछ आनुवंशिक स्थितियां, inflammatory bowel disease जैसे Crohn's disease और ulcerative colitis, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी, धूम्रपान और शराब का सेवन जोखिम से जुड़े कारक हो सकते हैं।

CDC के अनुसार कोलोरेक्टल कैंसर के लगभग 93 प्रतिशत मामले 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में पाए जाते हैं।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि कम उम्र के लोगों को यह बीमारी नहीं हो सकती। जिन लोगों में पारिवारिक या अन्य जोखिम कारक हैं, उन्हें डॉक्टर से स्क्रीनिंग की उम्र और तरीके के बारे में अलग सलाह मिल सकती है।

45 की उम्र के बाद स्क्रीनिंग पर करें बात

कई अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य दिशानिर्देश औसत जोखिम वाले लोगों के लिए 45 वर्ष की उम्र से कोलोरेक्टल कैंसर स्क्रीनिंग पर विचार करने की सलाह देते हैं। CDC के अनुसार 45 से 75 वर्ष की उम्र के वयस्कों में नियमित स्क्रीनिंग की सिफारिश की जाती है।

स्क्रीनिंग के कई तरीके उपलब्ध हैं। इनमें कुछ stool-based tests और colonoscopy जैसे परीक्षण शामिल हैं। कौन-सा टेस्ट व्यक्ति के लिए उचित है और कितनी बार कराया जाना चाहिए, यह उम्र, जोखिम, स्वास्थ्य इतिहास और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

खास बात यह है कि स्क्रीनिंग और लक्षणों की जांच अलग चीजें हैं। स्क्रीनिंग ऐसे व्यक्ति में बीमारी खोजने के लिए की जाती है जिसमें कोई लक्षण नहीं हैं, जबकि लक्षण होने पर डॉक्टर कारण पता करने के लिए diagnostic tests की सलाह दे सकते हैं।

क्या इन लक्षणों का मतलब कैंसर ही है?

नहीं। यह बात सबसे ज्यादा समझना जरूरी है।

मल में खून, कब्ज, दस्त, पेट दर्द, गैस, पेट फूलना या वजन कम होने के पीछे कई अन्य कारण हो सकते हैं। NHS और CDC दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि इन लक्षणों का होना अपने आप में कैंसर की पुष्टि नहीं करता। कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच जरूरी है।

इसलिए किसी लक्षण को देखकर घबराने के बजाय उसकी जांच करवाना ज्यादा समझदारी है।

जोखिम कम करने के लिए क्या करें?

हर मामले में कैंसर को रोकना संभव नहीं होता, लेकिन कुछ जीवनशैली संबंधी कदम जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तंबाकू से बचना और शराब का सेवन सीमित करना जोखिम कम करने से जुड़े उपाय हैं।

इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर या पॉलीप्स का इतिहास है, उन्हें डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए। कुछ लोगों को सामान्य आबादी की तुलना में पहले या अधिक बार जांच की जरूरत हो सकती है।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर मल में बार-बार खून दिखाई दे रहा है, मल का रंग काला या बहुत गहरा हो गया है, लंबे समय से कब्ज या दस्त है, पेट दर्द बना हुआ है, बिना कोशिश वजन कम हो रहा है या लगातार कमजोरी और थकान महसूस हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

अगर बहुत ज्यादा रक्तस्राव हो रहा हो, लगातार खून निकल रहा हो या खून के बड़े थक्के दिखाई दें, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी हो सकता है।

बड़ी आंत का कैंसर कई बार शुरुआती दौर में स्पष्ट संकेत नहीं देता। इसलिए शरीर में होने वाले लगातार बदलावों को समझना और जरूरत के अनुसार स्क्रीनिंग करवाना महत्वपूर्ण है। खासकर मल में खून, लंबे समय तक bowel habit में बदलाव, लगातार पेट दर्द, बिना कारण वजन कम होना और असामान्य थकान जैसे संकेतों को केवल सामान्य पेट की समस्या मानकर लंबे समय तक टालना सही नहीं है।

ध्यान रखें—इन लक्षणों का मतलब कैंसर होना जरूरी नहीं है। लेकिन इनकी वजह जानने के लिए समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी व्यक्ति को अपनी स्थिति के आधार पर जांच और उपचार के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

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