नवरात्रि का व्रत रख रहे हैं तो सावधान! ये 5 गलतियां पड़ सकती हैं भारी, कहीं आपकी एक चूक से न बिगड़ जाए सेहत
शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो चुका है। इस दौरान देशभर में लाखों लोग मां दुर्गा की आराधना करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं। इस साल शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर तक चलेगी।
व्रत को धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके दौरान शरीर की जरूरतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई लोग यह सोचकर पूरे दिन कुछ नहीं खाते कि जितना ज्यादा समय भूखे रहेंगे, उतना ही व्रत का लाभ मिलेगा। इसके बाद व्रत खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं। यही आदत परेशानी का कारण बन सकती है।
व्रत के दौरान कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर, गैस, एसिडिटी, पेट फूलना और ऊर्जा की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। हालिया स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह में भी हाइड्रेशन, संतुलित भोजन, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर तथा सीमित मात्रा में भोजन करने पर जोर दिया गया है।
आपके द्वारा साझा की गई जानकारी में जनरल फिजिशियन डॉ. शालिनी सिंह सालुंके ने भी व्रत के दौरान कुछ सामान्य गलतियों से बचने की सलाह दी है। आइए जानते हैं वे कौन-सी पांच गलतियां हैं जिन्हें नवरात्रि के व्रत में करने से बचना चाहिए।
1. पानी की कमी को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
व्रत के दौरान सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात है शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना। खासकर ऐसे व्रत जिनमें पानी पीने की अनुमति होती है, उनमें पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में तरल लेना जरूरी है।
कई लोग व्रत के दौरान खाने पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन पानी पीना भूल जाते हैं। इसके कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन होने पर थकान, कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी शिकायतें हो सकती हैं।
अगर आपके व्रत में अनुमति हो तो नियमित अंतराल पर पानी पी सकते हैं। नारियल पानी, छाछ या बिना ज्यादा चीनी वाले कुछ पेय भी विकल्प हो सकते हैं। हालांकि केवल मीठे पेय या पैकेज्ड ड्रिंक को हाइड्रेशन का विकल्प मानना सही नहीं है।
ध्यान रखें कि बहुत ज्यादा चाय-कॉफी पीना भी अच्छा विकल्प नहीं है। खाली पेट अत्यधिक चाय या कॉफी लेने से कुछ लोगों में एसिडिटी और नींद से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है।
2. व्रत खोलते ही ओवरईटिंग करना पड़ सकता है भारी
व्रत रखने वालों की सबसे आम गलतियों में से एक है व्रत खोलते समय जरूरत से ज्यादा खाना।
पूरे दिन कम खाने या लंबे समय तक भोजन से दूरी के बाद जब खाने का समय आता है तो भूख बहुत ज्यादा महसूस हो सकती है। ऐसे में लोग एक साथ बड़ी मात्रा में साबूदाना, आलू, कुट्टू की पूरी, पकौड़े, मिठाई या दूसरी व्रत वाली चीजें खाने लगते हैं।
इससे पेट पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ सकता है। नतीजतन गैस, पेट फूलना, अपच, एसिडिटी और जी मिचलाने जैसी समस्या हो सकती है। हालिया स्वास्थ्य सलाह में भी व्रत के दौरान छोटे और संतुलित भोजन तथा पोर्शन कंट्रोल पर जोर दिया गया है।
इसलिए व्रत खोलते समय धीरे-धीरे खाना बेहतर है। पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लिया जा सकता है और फिर जरूरत के अनुसार सामान्य भोजन किया जा सकता है।
3. सिर्फ आलू और साबूदाना पर निर्भर रहना सही नहीं
नवरात्रि में कई घरों में आलू, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा और तली हुई चीजें ज्यादा बनाई जाती हैं। ये खाद्य पदार्थ व्रत की परंपराओं के अनुसार उपयुक्त हो सकते हैं, लेकिन केवल इन्हीं चीजों पर निर्भर रहने से भोजन असंतुलित हो सकता है।
शरीर को केवल कैलोरी नहीं, बल्कि प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिज भी चाहिए। इसलिए व्रत की भोजन व्यवस्था में उपलब्ध विकल्पों के अनुसार दही, दूध, पनीर, मूंगफली, मेवे, फल और उपयुक्त सब्जियों को शामिल किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी व्रत के दौरान प्रोटीन और फाइबर को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं। साबूदाना या आलू जैसे स्टार्च वाले खाद्य पदार्थों को बड़ी मात्रा में अकेले खाने के बजाय उन्हें अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित करना बेहतर माना जाता है।
यानी व्रत का मतलब यह नहीं है कि दिनभर केवल आलू या साबूदाना खाया जाए। थाली जितनी संतुलित होगी, शरीर को ऊर्जा बनाए रखने में उतनी मदद मिल सकती है।
4. नींद कम करना और जरूरत से ज्यादा थकान लेना भी गलत
नवरात्रि के दौरान पूजा-पाठ के साथ कई जगह गरबा और डांडिया जैसे कार्यक्रम भी होते हैं। देर रात तक जागने और सुबह जल्दी उठने से नींद का समय कम हो सकता है।
अगर इसके साथ व्रत भी रखा जा रहा है तो शरीर पर अतिरिक्त थकान पड़ सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने पर दिनभर सुस्ती, चिड़चिड़ापन और थकान महसूस हो सकती है।
इसलिए व्रत रखने वाले लोगों को अपनी नींद और दिनचर्या का भी ध्यान रखना चाहिए। अगर किसी दिन गरबा या डांडिया के कारण देर रात तक जागना पड़े तो अगले दिन शरीर के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
व्रत के दौरान अत्यधिक व्यायाम या बहुत ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से भी बचना चाहिए, खासकर तब जब शरीर पहले से कमजोर या डिहाइड्रेट महसूस कर रहा हो।
5. बीमारी होने पर बिना सलाह के व्रत रखना खतरनाक हो सकता है
सबसे महत्वपूर्ण सावधानी उन लोगों के लिए है जिन्हें पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या है।
डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, गंभीर गैस्ट्रिक समस्या, किडनी संबंधी परेशानी या ऐसी अन्य बीमारी में बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक भोजन की मात्रा या समय में बड़ा बदलाव करना उचित नहीं है।
डायबिटीज के मरीजों के लिए तो व्रत के दौरान विशेष सावधानी जरूरी हो सकती है। भोजन में लंबे अंतराल और दवाओं के समय में बदलाव से ब्लड शुगर प्रभावित हो सकता है। कुछ दवाएं लेने वाले लोगों में बिना चिकित्सकीय सलाह के फास्टिंग जोखिम बढ़ा सकती है।
इसी तरह हृदय रोग से जूझ रहे लोगों में भोजन छोड़ना और डिहाइड्रेशन ब्लड शुगर तथा ब्लड प्रेशर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
इसलिए अगर कोई व्यक्ति नियमित दवा लेता है या उसे कोई पुरानी बीमारी है, तो व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। केवल व्रत रखने के लिए अपनी दवा बंद या उसकी मात्रा में बदलाव खुद से नहीं करना चाहिए।
क्या व्रत का मतलब पूरे दिन भूखा रहना है?
यह समझना भी जरूरी है कि धार्मिक व्रत की अलग-अलग परंपराएं होती हैं। कोई व्यक्ति फलाहार करता है, कोई एक समय भोजन करता है और कुछ लोग अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार अलग नियम अपनाते हैं।
इसलिए सभी लोगों के लिए एक जैसा फास्टिंग पैटर्न सही नहीं हो सकता। खासकर लंबे या अत्यधिक प्रतिबंध वाले व्रत को केवल वजन कम करने या किसी कथित 'डिटॉक्स' के नाम पर अपनाना उचित नहीं माना जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने भी लंबे समय तक पानी के अलावा कुछ न लेने वाले फास्ट को चिकित्सकीय मार्गदर्शन के बिना न करने की सलाह दी है।
व्रत में कैसी हो सकती है संतुलित थाली?
अगर आपकी धार्मिक परंपरा इसकी अनुमति देती है तो व्रत के दौरान भोजन में अलग-अलग पोषक तत्वों को शामिल करने की कोशिश की जा सकती है।
फल, दही, दूध, पनीर, मेवे, मूंगफली, मखाना और उपयुक्त सब्जियां कुछ विकल्प हो सकते हैं। कुट्टू, राजगीरा या सिंघाड़े जैसे व्रत में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों को भी संतुलित मात्रा में लिया जा सकता है।
तली हुई चीजों की जगह भुना, उबला या कम तेल में तैयार भोजन लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
साथ ही मिठाइयों और बहुत ज्यादा नमक वाली चीजों का सेवन सीमित रखना भी समझदारी है। व्रत के नाम पर अगर रोजाना बड़ी मात्रा में तली हुई चीजें, मिठाइयां और हाई-कैलोरी स्नैक्स लिए जाएं तो इससे व्रत का भोजन पौष्टिक होने के बजाय उल्टा भारी पड़ सकता है।
शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें
व्रत के दौरान हल्की भूख या सामान्य बदलाव महसूस होना अलग बात है, लेकिन लगातार चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी जैसा महसूस होना, भ्रम की स्थिति, लगातार उल्टी या गंभीर अस्वस्थता को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में व्रत जारी रखने के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
नवरात्रि में आस्था के साथ सेहत का भी रखें ध्यान
नवरात्रि आस्था, पूजा और आत्मअनुशासन का पर्व है। व्रत रखने का उद्देश्य केवल भूखे रहना नहीं होना चाहिए। अगर व्रत रखा जा रहा है तो अपनी शारीरिक क्षमता, उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और धार्मिक परंपरा के अनुसार सुरक्षित तरीका अपनाना जरूरी है।
पानी की कमी न होने देना, व्रत खोलते समय ओवरईटिंग से बचना, प्रोटीन और फाइबर वाले विकल्पों को शामिल करना, पर्याप्त नींद लेना और बीमारी की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना—ये छोटी-छोटी सावधानियां व्रत को अधिक सुरक्षित बना सकती हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। जो फास्टिंग पैटर्न एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए ठीक हो सकता है, जरूरी नहीं कि वही डायबिटीज, हृदय रोग, गर्भावस्था या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के लिए भी सुरक्षित हो। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ शरीर के संकेतों को समझना भी उतना ही जरूरी है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी बीमारी, नियमित दवा या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में व्रत रखने से पहले योग्य डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेना जरूरी है।

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