10 दिन से मचा रहा था आतंक, पकड़ते ही उमड़ पड़ी भीड़! 51 हजार के इनामी बंदर के पीछे छिपी पूरी कहानी ने चौंकाया
पलवल जिले के हथीन इलाके में पिछले कई दिनों से बंदर के आतंक से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिली है। एक ऐसे बंदर को करीब 10 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद पकड़ लिया गया, जिसे लेकर स्थानीय लोगों में काफी डर बना हुआ था। बताया जा रहा है कि बंदर ने इलाके में कई लोगों पर हमला किया था और एक दर्जन से ज्यादा लोगों को काटने की बात सामने आई है।
बंदर के लगातार हमलों से परेशान लोगों ने उसे पकड़ने के लिए अभियान चलाया। उसकी तलाश में कई दिनों तक कोशिश की गई, लेकिन वह बार-बार लोगों की पकड़ से बच निकलता था। आखिरकार बंदर को पकड़ने में सफलता मिली।
बताया जा रहा है कि बंदर को पकड़ने वाले व्यक्ति के लिए 51 हजार रुपये के इनाम की घोषणा भी की गई थी। बंदर के पकड़े जाने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, बड़ी संख्या में लोग उसे देखने के लिए पहुंच गए।
हालांकि, बंदर को रिहायशी इलाके से दूर ले जाते समय जो दृश्य सामने आया, उसने इस पूरे मामले को और चर्चा में ला दिया। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक व्यक्ति बंदर को अपनी पीठ पर लादकर ले जाता दिखाई दे रहा है। उसके पीछे लोगों की भीड़ चल रही है। वीडियो में कुछ लोग बंदर को थप्पड़ मारते हुए भी नजर आ रहे हैं।
10 दिनों से लोगों के लिए बना हुआ था परेशानी का कारण
हथीन इलाके में पिछले कई दिनों से बंदर के हमलों की चर्चा थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बंदर अचानक लोगों पर हमला कर देता था और कई लोगों को काट चुका था।
लगातार हो रहे हमलों के कारण लोग घरों से बाहर निकलते समय भी सावधानी बरतने लगे थे। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को लेकर परिवार ज्यादा चिंतित थे।
लोगों का कहना था कि बंदर को पकड़ना आसान नहीं था। वह अचानक सामने आता और हमला करने के बाद तेजी से भाग जाता था। कई दिनों तक उसे पकड़ने की कोशिश होती रही, लेकिन वह हर बार बच निकलता था।
आखिरकार करीब 10 दिनों की कोशिश के बाद लोगों को सफलता मिली।
51 हजार रुपये का इनाम घोषित होने की भी चर्चा
बंदर को पकड़ने के लिए इनाम घोषित किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि हथीन नगर पालिका की चेयरपर्सन के पति ने बंदर को पकड़ने वाले व्यक्ति को 51 हजार रुपये देने की घोषणा की थी।
इतनी बड़ी इनामी रकम की घोषणा के बाद बंदर को पकड़ने की कोशिश और तेज हो गई।
इलाके में बंदर की गतिविधियों को लेकर पहले से ही लोगों में चिंता थी। कई लोगों के घायल होने की बात सामने आने के बाद इसे पकड़ने की मांग लगातार बढ़ रही थी।
जब आखिरकार बंदर पकड़ लिया गया तो इसकी खबर पूरे इलाके में तेजी से फैल गई।
बंदर पकड़ा गया तो देखने के लिए जुट गई भीड़
बंदर के पकड़े जाने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग उसे देखने के लिए पहुंचने लगे।
जिस इलाके में कुछ दिन पहले लोग बंदर के डर से परेशान थे, वहीं अब लोग पकड़े गए बंदर को देखने के लिए उसके पीछे चलते नजर आए।
इसी दौरान एक व्यक्ति बंदर को अपनी पीठ पर लादकर ले जाता दिखाई दिया। उसके पीछे लोगों की लंबी भीड़ चल रही थी।
यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया और बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।
वीडियो में भीड़ के बीच कुछ लोग बंदर के साथ मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों को उसे थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है।
हालांकि, जंगली या आवारा जानवर को पकड़ने के बाद उसके साथ मारपीट करना उचित नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में प्रशिक्षित वन्यजीव कर्मियों या संबंधित विभाग की मदद लेना अधिक सुरक्षित तरीका होता है।
बंदर को आबादी से दूर ले जाया गया
बंदर को पकड़ने के बाद उसे रिहायशी इलाके से दूर ले जाने की बात सामने आई है।
इसका उद्देश्य यही बताया जा रहा है कि वह दोबारा आबादी में वापस न आए और लोगों पर हमला न करे।
लेकिन बंदर को ले जाते समय जिस तरह लोगों की भीड़ उसके पीछे चल रही थी, उससे भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जंगली जानवर तनाव या डर की स्थिति में अचानक आक्रामक हो सकता है। ऐसे में उसके आसपास भीड़ जमा होना लोगों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही होती है कि ऐसे जानवरों को घेरने या उनके साथ छेड़छाड़ करने के बजाय संबंधित वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दी जाए।
एक व्यक्ति ने बताया कैसे हुआ था हमला
बंदर के आतंक के बीच एक व्यक्ति ने अपने साथ हुई एक घटना का अनुभव भी साझा किया।
उसके अनुसार, वह सो रहा था तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि उसकी पीठ पर कोई जानवर बैठ गया है। इसके बाद उसकी गर्दन पर हमला किया गया।
उसने बताया कि नींद खुलने के बाद उसने रोशनी करने की कोशिश की, लेकिन उससे पहले ही उसके हाथ पर भी काट लिया गया।
हमला करने के बाद जानवर दरवाजे से बाहर निकलकर भाग गया।
हालांकि, उस व्यक्ति ने यह भी स्पष्ट किया कि वह हमलावर जानवर को ठीक से देख नहीं पाया था। जब उससे पूछा गया कि क्या वह निश्चित रूप से बंदर ही था, तो उसने कहा कि उसने जानवर को स्पष्ट रूप से नहीं देखा था।
चूंकि इलाके में बंदर के हमलों की चर्चा पहले से हो रही थी, इसलिए उसे आशंका थी कि हमला बंदर ने ही किया होगा।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी हमले के बाद जानवर की सही पहचान करना जरूरी होता है। केवल अनुमान के आधार पर किसी जानवर को जिम्मेदार मानना उचित नहीं है।
एक दर्जन से ज्यादा लोगों को काटने का दावा
स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि पकड़ा गया बंदर एक दर्जन से ज्यादा लोगों को काट चुका था।
हालांकि, ऐसे मामलों में घायलों की संख्या और हमलों की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग या प्रशासन की जानकारी से ही स्पष्ट हो सकती है।
फिर भी लगातार लोगों के घायल होने की शिकायतों ने इलाके में चिंता जरूर बढ़ा दी थी।
बंदर के हमलों के कारण लोगों को अपने बच्चों को लेकर भी चिंता थी। कई लोग ऐसे स्थानों से बचने लगे थे जहां बंदर दिखाई देता था।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चा
बंदर पकड़े जाने के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में एक व्यक्ति बंदर को अपनी पीठ पर लादकर आगे बढ़ता नजर आता है। उसके पीछे बड़ी संख्या में लोग चलते हुए दिखाई देते हैं।
कुछ लोग बंदर को छूने और थप्पड़ मारने की कोशिश करते हुए भी नजर आते हैं।
वीडियो के वायरल होने के बाद लोग इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग बंदर के पकड़े जाने से राहत की बात कर रहे हैं तो कुछ लोग जानवर के साथ किए गए व्यवहार पर सवाल उठा रहे हैं।
राहत के साथ जरूरी है सावधानी
बंदर पकड़े जाने के बाद हथीन इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। लगातार हमलों की वजह से जिस डर का माहौल बना हुआ था, उसमें अब कमी आने की उम्मीद है।
लेकिन ऐसी घटनाएं यह भी बताती हैं कि जब कोई जंगली या आवारा जानवर आबादी वाले क्षेत्र में आ जाए तो उससे निपटने के लिए व्यवस्थित और सुरक्षित तरीका अपनाना जरूरी है।
लोगों को खुद जानवर को घेरने, पकड़ने या उसके करीब जाने से बचना चाहिए। अगर कोई बंदर या अन्य जंगली जानवर लगातार लोगों पर हमला कर रहा है, तो संबंधित वन विभाग, स्थानीय प्रशासन या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना देना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
खासकर बच्चों को ऐसे जानवरों के पास जाने से रोकना जरूरी है।
अब लोगों को किस बात का इंतजार?
फिलहाल बंदर पकड़े जाने के बाद स्थानीय लोगों को राहत मिली है। लेकिन इस घटना से जुड़ा वायरल वीडियो और बंदर को आबादी से बाहर ले जाने की प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है।
सबसे अहम बात यह है कि भविष्य में यदि इलाके में फिर कोई आक्रामक बंदर या अन्य जंगली जानवर दिखाई देता है तो लोग खुद जोखिम लेने के बजाय प्रशासन और वन विभाग की मदद लें।
हथीन में करीब 10 दिनों तक लोगों को परेशान करने वाले बंदर के पकड़े जाने से फिलहाल लोगों ने चैन की सांस ली है। अब देखना यह होगा कि उसे सुरक्षित तरीके से कहां रखा जाता है और क्या इलाके में बंदरों के आतंक को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई स्थायी व्यवस्था की जाती है।

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